मनरेगा योजना में नहीं मिल रहा रोजगार, लकड़ियां बेचने को विवश हैं महिलाएं

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सिल्ली : पूरे राज्य भर में महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने व उन्हें स्वावलंबी बनाने की दिशा में कई योजनाएं चलायी जा रही है. एसएचजी के माध्यम से सरकार भले ही महिला सशक्तीकरण के नाम पर अपनी पीठ थपथपाती रही है, पर गांवों में स्थिति एकदम विपरीत है. इस गर्मी में जहां लोग घरों से […]

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सिल्ली : पूरे राज्य भर में महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने व उन्हें स्वावलंबी बनाने की दिशा में कई योजनाएं चलायी जा रही है. एसएचजी के माध्यम से सरकार भले ही महिला सशक्तीकरण के नाम पर अपनी पीठ थपथपाती रही है, पर गांवों में स्थिति एकदम विपरीत है. इस गर्मी में जहां लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं, वहीं काम व रोजगार के अभाव में दर्जनों महिलाएं करीब सात किमी धूप में पैदल चल कर माथे पर लकड़ी का बोझ लेकर सिल्ली के हलमाद में बुध बाजार आतीं हैं.

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100 से 120 रुपये में लकड़ियां बेचतीं हैं, तब जाकर उनके घरों में चूल्हा जलता है. ऐसी स्थिति कमोबेश सुदूर जंगली इलाकों में है, लेकिन महिलाएं अनगड़ा व सिल्ली प्रखंड के सीमावर्ती इलाकों से ज्यादा आतीं हैं.
सिल्ली के हलमाद की तपती सड़कों पर लकड़ी लेकर जा रही महिलाओं ने अपना नाम तो नहीं बताया, लेकिन कहा ये जंगल की लकड़ियां काट कर बेचना ही उनकी किस्मत है. इस गर्मी में भी सबेरे ही जंगल जाकर लकड़ियां काटती हैं. एक दिन काटने व बोझा बनाने में लगता है. दूसरे दिन इसे बाजारों अथवा कहीं और भी बेचने जाना पड़ता है. तब जाकर कहीं हमें दो वक्त की रोटी मिलती है.
अनगड़ा प्रखंड से सिल्ली आतीं हैं महिलाएं
मनरेगा योजनाओं के माध्यम से लोगों को उसके गृह पंचायत में ही रोजगार देने का प्रावधान है, बावजूद सिल्ली, अनगड़ा, सीमापर, अनगड़ा प्रखंड के सुरसु, कुतुरलोवा, हरजालूम, पूटादाग आदि गांव की दर्जनों महिलाएं नियमित लकड़ी काट कर अपना गुजारा करतीं हैं.
मनरेगा में भी काम नहीं
महिलाओं से यह पूछे जाने पर कि सरकार ने हर इलाके में मनरेगा योजनाओं में रोजगार दे रही है, आप मनरेगा में काम क्यों नहीं करती. महिलाओं ने कहा कि मनरेगा में हमें कहीं भी काम नहीं मिलता. इसलिए ये काम मजबूरी में करना पड़ता है. कइयों के जॉब कार्ड नहीं है. जिनके हैं उनको काम करके पेमेंट ही नहीं मिलता तो क्यों काम करेंगी.
सीओ सह प्रभारी बीडीओ राकेश भूषण सिंह ने ऐसे लोगों को चिह्नित कर उन्हें रोजगार मुहैया कराया जायेगा. किसी भी ग्रामीण को बेरोजगार नहीं रहने दिया जायेगा.
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