मशीन खराब रहेगी तो हम क्या सीखेंगे आज से विभाग में होगी कलमबंद हड़ताल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :28 May 2019 3:12 AM (IST)
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रांची : रिम्स के रेडियोलॉजी विभाग में पीजी की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर चिंतित है. जेडीए के बैनर तले रेडियाेलॉजी के पीजी स्टूडेेंट्स सोमवार को निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह से मिले. विद्यार्थियों ने कहा कि सात माह से सीटी स्कैन मशीन खराब है. अल्ट्रासाउंड की दो मशीनेें खराब हैं. एमआरआइ […]
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रांची : रिम्स के रेडियोलॉजी विभाग में पीजी की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर चिंतित है. जेडीए के बैनर तले रेडियाेलॉजी के पीजी स्टूडेेंट्स सोमवार को निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह से मिले. विद्यार्थियों ने कहा कि सात माह से सीटी स्कैन मशीन खराब है. अल्ट्रासाउंड की दो मशीनेें खराब हैं.
एमआरआइ बीच-बीच में खराब होती रहती है. इतनी महत्वपूर्ण मशीनों के खराब होने के कारण जांच की रिपोर्टिंग नहीं हो पाती है. ऐसे में विद्यार्थी क्या सीखेंगे. मशीन खराब होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो ही रही है, मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. रिम्स को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है.
प्रबंधन अपने स्तर से करे निदान :विद्यार्थियों ने निदेशक को बताया कि वह मंगलवार से कलमबंद हड़ताल कर अपना विरोध करेंगे. प्रबंधन अपने स्तर से इस समस्या का निदान करे तो अच्छा है, नहीं तो वह सभी भूख हड़ताल पर जाने काे विवश हैं. रेडियोलॉजी विभाग में मंगलवार से कलमबंद हड़ताल होने से सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड व एमआरआइ की जांच व उसकी रिपोर्टिंग प्रभावित रहेगी. मरीजों को सिर्फ निजी जांच एजेंसी हेल्थ मैप के भरोसे रहना होगा.
सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड व एमआरआइ की जांच और उसकी रिपोर्टिंग नहीं होगी
रिम्स में प्रतिदिन होते हैं 100 से ज्यादा अल्ट्रासाउंड 35 सीटी स्कैन और 25 एमआरआइ
मेडॉल के कारण पैथोलॉजी, बॉयोकेमेस्ट्री व माइक्रोबॉयोलॉजी में भी विद्यार्थियों को नहीं मिलता पर्याप्त सैंपल
पैथोलॉजी, बॉयोकेमेस्ट्री व माइक्रोबॉयोलॉजी के छात्रों का भविष्य भी संकट में
राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स मेें सरकार द्वारा अधिकृत निजी जांच एजेंसी मेडॉल द्वारा जांच किये जाने से पैथोलॉजी, बॉयोकेमेस्ट्री व माइक्रोबॉयोलॉजी के पीजी स्टूडेंट्स का भविष्य भी संकट में है. मेडॉल अधिकांश जांच अपने यहां करता है, इसलिए सीखने के लिए जितना सैंपल रिम्स के विद्यार्थियों को मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पाता है. हालांकि मेडाॅल को वहीं जांच करनी थी, जो रिम्स मेेेें नहीं होती है.
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