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गिरिडीह : 2014 में मोदी के खिलाफ लड़ा चुनाव, जमानत हुई जब्‍त, अब रांची में कर रहे हैं भ्रष्टाचार जिंदाबाद का नारा बुलंद

Updated at : 17 Apr 2019 8:12 AM (IST)
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गिरिडीह : 2014 में मोदी के खिलाफ लड़ा चुनाव, जमानत हुई जब्‍त, अब रांची में कर रहे हैं भ्रष्टाचार जिंदाबाद का नारा बुलंद

सुनील चौधरी रांची : वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़नेवाले जयप्रकाश प्रसाद उर्फ प्रकाश मंडल को शायद ही रांची के लोग जानते हैं.उम्र 47 है. पता सरिया गिरिडीह. इनकी पहचान ये है कि जब पूरे देश में मोदी लहर की गूंज चल रही थी, तब वर्ष 2014 में गिरिडीह जिले के सरिया […]

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सुनील चौधरी
रांची : वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़नेवाले जयप्रकाश प्रसाद उर्फ प्रकाश मंडल को शायद ही रांची के लोग जानते हैं.उम्र 47 है. पता सरिया गिरिडीह. इनकी पहचान ये है कि जब पूरे देश में मोदी लहर की गूंज चल रही थी, तब वर्ष 2014 में गिरिडीह जिले के सरिया प्रखंड निवासी जयप्रकाश प्रसाद वाराणसी से मोदी के खिलाफ ही चुनाव मैदान में उतर गये. जमानत जब्त हो गयी. पर फिर भी हिम्मत नहीं हारी. इस बार भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ रांची से चुनाव लड़ रहे हैं.
वर्ष 2009 से लेकर अब तक ये छह बार विभिन्न जगहों से चुनाव, उपचुनाव लड़ चुके हैं. मोदी के खिलाफ चुनाव में इन्हें 44 उम्मीदवारों में से 22वें स्थान पर थे. इन्हें 1361 वोट मिले थे.
इनका चुनाव चिह्न नारियल छाप था. जयप्रकाश ने साफ कर दिया कि वे चुनाव अपने आंदोलन को एक दिशा देने के लिए लड़ रहे हैं. चुनाव जीतना इनका मकसद नहीं है.अभी रांची में 30 जनवरी 2019 से मोरहाबादी स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना दे रहे हैं. इस बार रांची लोकसभा सीट से ही उम्मीदवारी के लिए 12 अप्रैल को नामांकन दाखिल किया है.
जयप्रकाश कहते हैं कि जनहित के मुद्दे को लेकर आंदोलन पर बैठे हैं. किसी ने ये तक नहीं जाना कि मेरे पास यहां बैठने की स्वीकृति है भी या नहीं. सबका साथ सबका विकास वाली ये सरकार से मैं पूछता हूं कि क्या सरिया झारखंड में नहीं है? वहां का विकास उनकी प्राथमिकता क्यों नहीं है.
जब कोई नहीं सुन रहा है तो अपनी आवाज पहुंचाने के लिए खुद ही चुनाव में खड़ा हो गया. वह कहते हैं कि उनकी मांग है कि सरिया रेलवे फाटक पर एक ब्रिज का निर्माण हो और दूसरी मांग है कि सरिया में बन रहे पावर ग्रिड के लिए ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण शीघ्र हो.
इंटर पास जयप्रकाश के पिता रेलवे में कार्यरत थे. अभी जिंदा नहीं है. मां को पेंशन मिलती है. सरिया में घर है, जिससे किराया आता है. इसी पैसे से अपने आंदोलन को चलाते हैं. पत्नी है और चार बच्चे भी हैं. कहते हैं कि जरूरत कम है. जिनकी जरूरत कम होती है, वे समाजसेवा करते हैं और जिनकी जरूरत ज्यादा होती है वे राजनीति करते हैं.
वह बताते हैं कि चुनाव में उनका मुख्य नारा है भ्रष्टाचार जिंदाबाद. क्योंकि आज भ्रष्टाचार शिष्टाचार बन गया है. वह लोगों से बिकाऊ नेताओं के खिलाफ वोट करने की अपील भी करेंगे. साथ ही पंपलेट के माध्यम से ये चुनाव प्रचार करेंगे. जयप्रकाश ने बताया कि वे डोर टू डोर कैंपेन भी करेंगे.
कई चुनाव लड़ चुके हैं : जयप्रकाश बताते हैं कि 2009 में बगोदर विधानसभा क्षेत्र से पहला चुनाव लड़ा था. फिर 2011 में जमशेदपुर लोकसभा उपचुनाव लड़ा था. वहां 10 हजार से अधिक वोट मिले थे. 2014 में वाराणसी लोकसभा से फिर बगोदर विधानसभा से भी चुनाव लड़ा. 2015 में सरिया में पंचायती चुनाव भी लड़ चुके हैं. वह कहते हैं उनका चुनाव लड़ना उनके आंदोलन का हिस्सा है.
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