रांची : विद्युत वितरण निगम फिर से करायेगा जांच, पहले हो चुकी है एसआइटी से जांच
Updated at : 20 Mar 2019 8:13 AM (IST)
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सुनील चौधरी रांची : राज्य का बिजली महकमा (विद्युत वितरण निगम) निजी कंपनियों को साढ़े तीन करोड़ रुपये ज्यादा का भुगतान करने वाले सभी नौ अफसरों पर लगाये गये आरोपों की जांच दोबारा करायेगा. 2011 से यह तीसरी बार जांच कमेटी गठित की गयी है. पर अबतक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है. […]
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सुनील चौधरी
रांची : राज्य का बिजली महकमा (विद्युत वितरण निगम) निजी कंपनियों को साढ़े तीन करोड़ रुपये ज्यादा का भुगतान करने वाले सभी नौ अफसरों पर लगाये गये आरोपों की जांच दोबारा करायेगा. 2011 से यह तीसरी बार जांच कमेटी गठित की गयी है.
पर अबतक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है. वितरण निगम द्वारा नये सिरे से जांच के लिए कमेटी गठित की गयी है. कमेटी में आरएपीडीआरपी के जीएम श्रवण कुमार, अधीक्षण अभियंता ऋषिनंदन और वित्त नियंत्रक वीपी दूबे होंगे. झारखंड पावर इंजीनियर्स सर्विस एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील ठाकुर भी जांच कमेटी रखे गये हैं.
निदेशक मंडल ने दी थी अभियोजन की स्वीकृति : गौरतलब है कि 25 फरवरी 2019 को हुई निदेशक मंडल की बैठक में सभी आरोपियों पर अभियोजन चलाने की स्वीकृति दे दी गयी थी. पर कार्रवाई होने के बदले अब फिर से जांच करायी जा रही है.
लगभग नौ साल पुराने इस मामले में शुरुआती दौर में 19 अफसरों के नाम सामने आए थे. इस दरम्यान 10 अफसर रिटायर हो गये. ऊर्जा विभाग ने महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए सेवारत नौ अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया था.
जांच पूरी कर एसआइटी सौंप चुकी है रिपोर्ट : एसअाइटी इस पूरे मामले की जांच करके रिपोर्ट सौंप चुकी है. इस रिपोर्ट के आधार पर ऊर्जा विभाग द्वारा कार्रवाई की अनुशंसा की गयी थी.
पूरा मामला विद्युत आपूर्ति प्रमंडल आदित्यपुर, जमशेदपुर और घाटशिला का है. इसमें बिलिंग एजेंसी को फर्जी बिल के आधार अत्यधिक भुगतान करने का आरोप है. इस बाबत जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना में 12 सितंबर 2011 को केस (कांड संख्या 150/11) दर्ज कराया गया था.
तत्कालीन जेएसइबी ने भी पांच सदस्यीय जांच समिति बनाकर मामले की जांच करायी थी. इस समिति में अमित बनर्जी, शिव कुमार श्रीवास्तव, सुधीर कुमार, आरके अग्रवाल व अशोक कुमार थे.
इन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी. इसमें बताया गया था कि सितंबर 2002 से बिलिंग एजेंसी क्रिस्टल कंप्यूटर इन्फॉरमेशन प्रालि, जमशेदपुर, इंफो सॉफ्ट डाटा सर्विस आदित्यपुर, प्रकृति इंटरप्राइजेज, जमशेदपुर, और वीएक्सएल कंप्यूटर जमशेदपुर द्वारा कार्यादेश के शर्तों उल्लंघन करते हुए फर्जी एवं मनगढ़ बिल जमाकर करोड़ों रुपये हड़प लिये एवं इसमें बोर्ड के पदाधिकारियों की संलिप्तता एवं संरक्षण होने के कारण 12.9.2011 को जमशेदपुर के उपलेखा निदेशक अजय कुमार ने बिष्टुपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी.इसके बाद सरकार ने जमशेदपुर के तत्कालीन एसपी की अध्यक्षता में एसआइटी गठित की. एसआइटी ने जांच में इन अफसरों की संलिप्तता पाकर इनके खिलाफ धारा 409, 420, 467, 471, 120 के तहत मामला दर्ज कर अभियोजन चलाने की अनुमति मांगी थी. इसके बाद मामला ऊर्जा विभाग के संज्ञान में आया. विभाग ने विधि परामर्शी से सलाह ली.
इसमें कहा गया कि नौ अफसरों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं. इसमें यह प्रमाणित होता कि वित्तीय अनियमितता में उनकी भूमिका रही है. इसके बाद विभाग द्वारा अभियोजन चलाने की अनुशंसा की गयी थी. जिस पर निदेशक मंडल ने अनुमति दे दी थी. पर आरोपी अफसर अब भी कार्यरत हैं.
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