रांची : कॉरपोरेट घरानों को जितना फायदा, राजनीतिक दलों को उतना ही बड़ा फंड : प्रफुल्ल सामंत राय

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मोमेंटम झारखंड : काॅरपोरेट को लूट की छूट और जन-आंदोलनों द्वारा संसाधनों को बचाने की चुनौती’ विषय पर परिचर्चा रांची : गोस्सनर कंपाउंड में रविवार को एक परिचर्चा आयोजित की गयी. परिचर्चा का विषय ‘मोमेंटम झारखंड : काॅरपोरेट को लूट की छूट और जन-आंदोलनों द्वारा संसाधनों को बचाने की चुनौती’ रखा गया था. परिचर्चा का […]

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मोमेंटम झारखंड : काॅरपोरेट को लूट की छूट और जन-आंदोलनों द्वारा संसाधनों को बचाने की चुनौती’ विषय पर परिचर्चा
रांची : गोस्सनर कंपाउंड में रविवार को एक परिचर्चा आयोजित की गयी. परिचर्चा का विषय ‘मोमेंटम झारखंड : काॅरपोरेट को लूट की छूट और जन-आंदोलनों द्वारा संसाधनों को बचाने की चुनौती’ रखा गया था. परिचर्चा का आयोजन इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड सस्टेनेब्लिटी दिल्ली, जन संसाधन पीठ दिल्ली, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय झारखंड, झारखंड लोकतांत्रिक मंच और एकल नारी सशक्ति संगठन ने किया था.
नियमगिरि आंदोलन के एक प्रमुख नेतृत्वकर्ता प्रफुल्ल सामंत राय ने कहा कि 90 के दशक में आर्थिक नीति में आया बदलाव संविधान की भावना के खिलाफ था. कॉरपोरेट घरानों को जितना फायदा दिलाया जाता है, राजनीतिक पार्टियां को उतना ही ज्यादा फंड मिलता है.
सामाजिक कार्यकर्ता बलराम ने कहा कि झारखंड में काॅरपोरेट को फायदा पहुंचाने के लिए अच्छी सड़कें बन रही हैं, लेकिन इसे जनता के विकास के नाम पर प्रचारित किया जा रहा है. इस अवसर पर ‘संसाधनों के स्वामित्व को हड़पने की साजिश: साहेबगंज में पोर्ट और गोड्डा में अडानी पावर प्लांट का अध्ययन’ रिपोर्ट भी जारी की गयी.
पहली बार जाति-धर्म के आधार पर टकराव व हिंसा इतनी बढ़ी :सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला ने कहा कि जाति-धर्म के आधार पर टकराव और हिंसा पहली बार इतनी बढ़ी है. कॉरपोरेट को जहां जमीन चाहिए, वहां भूमि का अधिकार ऑनलाइन ट्रांसफर हो रहा है. एनएपीएम के राष्ट्रीय समन्वयक मधुरेश कुमार ने कहा कि मोमेंटम झारखंड में 210 एमओयू कर तीन लाख करोड़ के निवेश के साथ छह लाख से ज्यादा रोजगार पैदा करने की बात कही गयी थी, जो गलत साबित हुई.
कविता का पाठ भी हुआ : युवा कवयित्री जसिंता केरकेट्टा ने अपनी कविता ‘चौराहे पर खड़ा हूं सुबह से, छोटा मोटा कोई काम चाहता …’ व ‘शहर जो बिक चुका है…’ का पाठ किया. परिचर्चा में गोड्डा में भूमि संघर्ष के नेता चिंतामणि साहू, गोड्डा साहिबगंज के विकास पर रिपोर्ट के लेखक राधेश्याम मंगोलपुरी, राइट टू सिटी अभियान से जुड़े राजेंद्र भिसे, सामाजिक कार्यकर्ता लक्खी दास, बसंत हेतमसरिया, अशोक वर्मा, राजेंद्र रवि आदि थे.
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