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रांची : स्थानीयता व लैंड बैंक नीति को रद्द किया जाये

झारखंड जनाधिकार महासभा ने की मांग लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दलों से महासभा ने की अपील रांची : झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में गरीब, आदिवासी, दलित, महिलाओं व अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे 30 से ज्यादा जन संगठनों, बुद्धिजीवियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के मंच झारखंड जनाधिकार महासभा ने लोकसभा चुनाव के […]

झारखंड जनाधिकार महासभा ने की मांग
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दलों से महासभा ने की अपील
रांची : झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में गरीब, आदिवासी, दलित, महिलाओं व अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे 30 से ज्यादा जन संगठनों, बुद्धिजीवियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के मंच झारखंड जनाधिकार महासभा ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दलों के समक्ष अपना मांगपत्र रखा है़
सोमवार को मनरेसा हाउस स्थित कामिल बुल्के सभागार में इसे जारी करते हुए भारत भूषण चौधरी, ज्यां द्रेज, स्टेन स्वामी व तारामणि साहू ने कहा कि जनता के अधिकारों व लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर लगातार हमले हो रहे हैं.
भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव, भूख से मौत, भीड़ द्वारा लोगों की हत्या, आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक व महिलाओं पर बढ़ती हिंसा, सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रताड़ना, सरकार द्वारा प्रायोजित सांप्रदायिकता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला, आदिवासियों के पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था पर हमला इसकी बानगी हैं.
इस परिपेक्ष्य में 2019 का चुनाव लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है. यदि सत्तापक्ष लोकतंत्र को कमजोर करने पर तुला है, तो विपक्षी राजनीतिक दलों में भी जन मुद्दों के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दिखती.
झारखंड जनाधिकार महासभा की मांगें
भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून 2018 (झारखंड) व लैंड बैंक नीति रद्द हो.
समता जजमेंट, पांचवीं अनुसूची के प्रावधान और पेसा कानून को पूर्ण रूप से लागू किया जाये.
वनभूमि के निजी व सामुदायिक पट्टों के सभी दावे स्वीकार किये जायें.
ऐसे कानून जिन्हें सरकार द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन और सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उन्हें तुरंत निरस्त किया जाये.
वर्तमान स्थानीयता नीति रद्द की जाये़
महिलाओं के लिए हर क्षेत्र में न्यूनतम 33 प्रतिशत आरक्षण लागू हो.
सभी नागरिकों के लिए सार्वजानिक बुनियादी सुविधाएं व सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाये़
वर्तमान रोजगार के अधिकार (नरेगा के माध्यम से) का विस्तार शहरी क्षेत्रों में भी किया जाये़ नरेगा में ग्रामीण परिवार के लिए काम का अधिकार 200 दिन प्रतिवर्ष व न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन की जाये.
सभी बच्चों के लिए 12वीं कक्षा तक की शिक्षा समान व निःशुल्क की जाये.
कृषि के क्षेत्र में स्वामीनाथन समिति की सभी सिफारिशें पूरी तरह लागू करें
झारखंड धर्म स्वातंत्र्य कानून को रद्द किया जाये और सरना या अन्य किसी नाम के स्वतंत्र आदिवासी धर्म को मान्यता दी जाये.
सच्चर कमेटी की अनुशंसाओं के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए विशेष नीति बने़
राजनीतिक दलों के चंदों पर पूर्ण पारदर्शिता हो, नागरिकों द्वारा सरकारी कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों पर मुकदमा दर्ज कराने पर लगाये गये सारे प्रतिबंध समाप्त किये जायें और प्रतिनिधि वापसी का कानूनी अधिकार हो़
सूचना के अधिकार कानून में किसी प्रकार की छेड़छाड़ न की जाये़
Prabhat Khabar Digital Desk
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