सांप काटने व मलेरिया से भी मरते हैं जवान

Updated at : 26 Jun 2014 11:30 AM (IST)
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सांप काटने व मलेरिया से भी मरते हैं जवान

रांची: नक्सली अभियान के दौरान सांप काटने और मलेरिया से भी जवानों की मौत हो जाती है. इस स्थिति में उनके आश्रितों को आर्थिक लाभ नहीं मिलता है. सरकार चाहती है कि नक्सली अभियान के दौरान सांप काटने या मलेरिया से मौत होने पर आश्रितों को मुआवजा मिले. सरकार की ओर से यह बात भारत […]

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रांची: नक्सली अभियान के दौरान सांप काटने और मलेरिया से भी जवानों की मौत हो जाती है. इस स्थिति में उनके आश्रितों को आर्थिक लाभ नहीं मिलता है. सरकार चाहती है कि नक्सली अभियान के दौरान सांप काटने या मलेरिया से मौत होने पर आश्रितों को मुआवजा मिले.

सरकार की ओर से यह बात भारत सरकार के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के विजय कुमार के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में कही गयी. राज्य सरकार से मिली जानकारी के बाद श्री विजय कुमार ने कहा कि यहां नक्सली हिंसा में कमी आयी है. हालांकि उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में अब भी सुरक्षा की समस्या है. उन्होंने उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में पदस्थापित और प्रतिनियुक्त पुलिसकर्मियों को कठिन परिश्रम भत्ता देने पर बल दिया.

उन्होंने विशेष भारतीय रिजर्व बटालियन (आइआरबी) में नियुक्ति करने पर जोर दिया. कहा: बटालियन में प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, बम निरोधक दस्ता, इंजीनियरों, कारीगरों व अन्य लोगों को शामिल किया जाना चाहिए. साथ ही उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के कौशल विकास हेतु विशेष कार्यक्रम चलाने का सुझाव दिया. मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती ने कहा कि राज्य में पुलिस बल में 90 प्रतिशत कांस्टेबल के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने इनके प्रशिक्षण हेतु राज्य में एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने पर बल दिया. बैठक में एसके सत्पथी, एनएन पांडेय, डीजीपी, एपी सिंह, श्री अरुण समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे.

तेज होगा पुलिस का अभियान

रांची: गृह मंत्रालय की आंतरिक सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि नक्सलियों को मुख्यधारा में आने के लिए उन्हें स्पेस देने की जरूरत है. के विजय कुमार डीजीपी राजीव कुमार समेत पुलिस के अन्य आला अफसरों के साथ बैठक करने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि नक्सलियों को खत्म करने के लिए पुलिस ऑपरेशन जारी है, लेकिन इसके साथ-साथ विकास की योजनाओं का क्रियान्वयन भी जरूरी है. के विजय कुमार ने पुलिस अफसरों के साथ हुई बैठक में डीजीपी से कहा कि नक्सलियों के लिए बनी सरेंडर पॉलिसी में और सुविधाएं जोड़ कर उन्हें मुख्यधारा में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक के विजय कुमार ने राज्य भर में नक्सलियों के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान की समीक्षा की. साथ ही अभियान को और तेज करने के लिए निर्देश दिया. बैठक में आइजी सीआरपीएफ आरपी मिश्र, आइजी ऑपरेशन मुरारीलाल मीणा समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

सरेंडर पॉलिसी नहीं बदली: झारखंड में नक्सलियों के लिए बनी सरेंडर पॉलिसी में बदलाव की जरूरत है. करीब छह माह पहले इसके लिए कोशिश की गयी थी. पूर्व मुख्य सचिव आरएस शर्मा ने सरेंडर पॉलिसी में बदलाव लाने को लेकर गृह सचिव और डीजीपी के साथ बैठक की थी. बैठक में उन्होंने कई तरह के बदलाव के निर्देश दिये थे. मुख्य सचिव के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय ने सरेंडर पॉलिसी में बदलाव के लिए करीब दो माह पहले प्रस्ताव सरकार के पास भेज दिया, लेकिन सरकार के स्तर से अब तक प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी गयी है.

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