बकोरिया कांड के पीड़ित पहुंचे राजभवन, कहा केस वापस लेने की मिल रही धमकी, दिया जा रहा प्रलोभन
Updated at : 31 Jan 2019 8:46 AM (IST)
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रांची : पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड के बकोरिया गांव में 9 जून 2015 को हुए कथित नक्सली मुठभेड़ में मारे गये पारा शिक्षक उदय यादव और नीरज यादव के परिजन बुधवार को राजभवन पहुंचे. सभी का कहना था कि उग्रवादी संगठन झारखंड जन मुक्ति परिषद (जेजेएमपी) और पुलिस जांच को प्रभावित करने की कोशिश […]
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रांची : पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड के बकोरिया गांव में 9 जून 2015 को हुए कथित नक्सली मुठभेड़ में मारे गये पारा शिक्षक उदय यादव और नीरज यादव के परिजन बुधवार को राजभवन पहुंचे. सभी का कहना था कि उग्रवादी संगठन झारखंड जन मुक्ति परिषद (जेजेएमपी) और पुलिस जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है.
मामले को रफा-दफा करने के लिए मुठभेड़ में मारे गये परिवार को केस वापस लेने का दबाव और प्रलोभन दिया जा रहा है. अगर इस कांड के अनुसंधान में और देरी हुई, तो मजबूर होकर परिवार के अन्य सदस्यों के साथ आत्महत्या का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा. मामले को लेकर राजभवन को ज्ञापन देने पीड़ित परिवार के लोग आये थे.
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि बकोरिया कांड में पारा शिक्षक उदय यादव के साथ कुल 12 लोगों की हत्या उग्रवादी संगठन जेजेएमपी, पुलिस, सीआरपीएफ कोबरा के लोगों द्वारा कर दी गयी थी. दोषियों को सजा दिलाने के लिए पीड़ित परिवार के सदस्य द्वारा कई बार गृह सचिव, मुख्य सचिव, डीजीपी एवं सरकार को आवेदन दिया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. डीजीपी, सीआरपीएफ, कोबरा के पदाधिकारी द्वारा हाइकोर्ट व केंद्र सरकार को झूठी बातें बतायी गयी. कोर्ट ने मामले में 22 अक्टूबर 2018 को सीबीआइ जांच का आदेश दिया.
इसके बाद सीबीआइ ने 19 नवंबर 2018 को कांड संख्या आरसी-4(एस) 2018 दर्ज किया. कांड के अनुसंधानकर्ता डीएसपी केके सिंह को बनाया गया. फिर आनन-फानन में कांड के अनुसंधानक डीएसपी केके सिंह को बदलकर एडिशनल एसपी डीके राय को कांड का अनुसंधानकर्ता बना दिया गया. इसके अलावा सीबीआइ द्वारा आज तक इस कांड के संबंध में किसी गवाह का बयान तक दर्ज नहीं किया गया है. न ही अभी तक कोई पदाधिकारी घटनास्थल पर गये हैं.
सीबीआइ पर झारखंड पुलिस एवं सीआरपीएफ के वरीय पदाधिकारी द्वारा कांड को दबाने का दबाव है. अनुसंधान में जितना विलंब होगा, उतना ही कांड के सच को नष्ट किये जाने का खतरा होगा. हम गरीब ग्रामीणों पर जान का खतरा बना रहेगा. क्योंकि झारखंड के कई आइपीएस पदाधिकारी एवं सीआरपीएफ के पदाधिकारी के साथ संगठन का भी इसमें हाथ है. जो लगातार गरीबों को धमका रहे हैं और उन्हें केस उठाने हेतु दबाव दे रहे हैं.
राजभवन पहुंचने वालों में उदय यादव के पिता जवाहर यादव, पत्नी मंजू यादव, मृतक नीरज यादव के भाई संतोष यादव, मां मनमतिया देवी, बेटी नेहा कुमारी, पिता ईश्वर यादव सहित अन्य लोग आये थे.
पुलिस वाले सुलह के लिए कह रहे हैं : जवाहर
मारे गये पारा शिक्षक उदय यादव के पिता जवाहर यादव ने कहा कि अब तक सीबीआइ ने जांच शुरू नहीं की है. पुलिस वाले सुलह करने की बात कह रहे हैं. जेजेएमपी वाले धमकी दे रहे हैं. मिलने के लिए भी बुलाते हैं. दारोगा रुस्तम अंसारी के रिश्तेदार रईस अंसारी ने घर आकर कहा कि पैसा लेकर सुलह कर लो, क्योंकि मामले में पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारी शामिल हैं. केस नहीं जीत पाओगे. उधर, सीआइडी ने जांच में मारे गये बच्चों तक को नक्सली करार दिया.
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