रांची : परिवहन अधिकारियों की वजह से करोड़ों का घाटा : सीपी सिंह

Updated at : 10 Jan 2019 7:17 AM (IST)
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रांची : परिवहन अधिकारियों की वजह से करोड़ों का घाटा : सीपी सिंह

रांची : राज्य के परिवहन मंत्री सीपी सिंह ने अपने ही विभाग के अफसरों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किये हैं. उन्होंने इस बारे में परिवहन सचिव को पत्र भी लिखा है. इसमें कहा है कि झारखंड मोटर चालक संघ के महासचिव गोपाल शरण पांडेय के आवेदन से यह पता चला है कि विभाग ने […]

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रांची : राज्य के परिवहन मंत्री सीपी सिंह ने अपने ही विभाग के अफसरों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किये हैं. उन्होंने इस बारे में परिवहन सचिव को पत्र भी लिखा है. इसमें कहा है कि झारखंड मोटर चालक संघ के महासचिव गोपाल शरण पांडेय के आवेदन से यह पता चला है कि विभाग ने प्राइवेट टेस्टिंग सेंटर द्वारा निर्गत फिटनेस सर्टिफिकेट पर मोटरयान निरीक्षक (एमवीआइ) के प्रतिहस्ताक्षर (संबंधित एजेंसी द्वारा सर्टिफिकेट जारी करने के बाद एमवीआइ द्वारा हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया) को समाप्त कर दिया गया है.
साथ ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने पर भी रोक लगा दी गयी है. यह मोटर वाहन अधिनियम 1988 एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश का उल्लंघन है. पत्र के मुताबिक विभाग की ओर से जारी इन आदेशों में सरकार का अनुमोदन तक प्राप्त नहीं किया गया.
यह स्पष्ट रूप से कार्यपालिका नियमावली के प्रावधानों के विपरीत है. इससे पूर्व भी बस बॉडी कोड के संबंध में भी विभाग द्वारा बिना सरकार का अनुमोदन लिये निर्गत पत्र को शिथिल करने का आदेश दे दिया गया.
संलेख तक मंत्रिपरिषद के सामने नहीं लाया जाना घोर निंदनीय है. विभाग द्वारा निर्गत पत्र के कारण पूरे राज्य में बसों का निबंधन रुका हुआ है. सैकड़ाें की संख्या में बस ओनर्स द्वारा दूसरे राज्यों से बसों का निबंधन कराया जा चुका है.
इस वजह से राज्य को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है. ऐसा परिवहन विभाग में बैठे अधिकारियों के मनमाने रवैये के कारण हो रहा है. नीतिगत मामलों में बगैर सरकार (विभागीय मंत्री) का अनुमोदन लिये स्वयं अपने स्तर से आदेश निकाला जाना खेदजनक है.
बिना सरकार की अनुमति के कोई आदेश नहीं करें जारी
मंत्री ने पत्र में परिवहन सचिव को निर्देश भी दिया है. कहा है कि फिटनेस सर्टिफिकेट प्रतिहस्ताक्षर से संबंधित नियम एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के तहत मामले की समीक्षा कर अविलंब संचिका उपस्थापित करें. साथ ही नीतिगत मामलों में बगैर सरकार का अनुमोदन प्राप्त किये कोई आदेश जारी करने पर तत्काल रोक लगाना सुनिश्चित कराएं. ऐसा नहीं करने पर इसे गंभीरता से लिया जायेगा.
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