रांची : स्पीकर की बैठक में नहीं पहुंचे नेता पक्ष व प्रतिपक्ष
Updated at : 22 Dec 2018 2:07 AM (IST)
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रांची : विधानसभा का शीतकालीन सत्र 24 दिसंबर से आहूत है़ सत्र को लेकर विधानसभा सचिवालय की ओर से तैयारी पूरी कर ली गयी है़ 27 दिसंबर तक चलने वाले सत्र में दो ही कार्य दिवस है़ 25 को क्रिसमस की छुट्टी है़ सत्र छोटा है, लेकिन इसको लेकर पक्ष-विपक्ष गंभीरता नहीं दिख रही है़ […]
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रांची : विधानसभा का शीतकालीन सत्र 24 दिसंबर से आहूत है़ सत्र को लेकर विधानसभा सचिवालय की ओर से तैयारी पूरी कर ली गयी है़ 27 दिसंबर तक चलने वाले सत्र में दो ही कार्य दिवस है़ 25 को क्रिसमस की छुट्टी है़ सत्र छोटा है, लेकिन इसको लेकर पक्ष-विपक्ष गंभीरता नहीं दिख रही है़ शुक्रवार को स्पीकर दिनेश उरांव ने शीतकालीन सत्र को लेकर विधायक दल की बैठक बुलायी़
स्पीकर की बैठक में सदन के नेता रघुवर दास और प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन नहीं पहुंचे़ संसदीय कार्यमंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा, कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम और बसपा विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता पहुंचे़ आजसू, झामुमो, माले, मासस सहित छोटे दलों के कोई विधायक बैठक में नहीं पहुंचे़
विधानसभा का सत्र पिछले तीन वर्षों से सुचारू रूप से नहीं चल रहा है़ पारा शिक्षक सहित अनुबंध कर्मियों की मांगों काे लेकर विधानसभा का शीतकालीन सत्र भी हंगामेदार हो सकता है़
हाल के दिनों में कई मुद्दों पर पक्ष-विपक्ष के बीच राजनीतिक कड़वाहट बढ़ी है़ ऐसे में शीतकालीन सत्र के व्यवस्थित तरीके से चलने को लेकर भी अटकलें लगायी जा रही है़ं हालांकि स्पीकर दिनेश उरांव लगातार सदन को सुचारू रूप से चलाने और पक्ष-विपक्ष के बीच से रास्ता निकालने में जुटे है़ं
2016 से बाधित है सदन, मिनटों में पास हो रहे विधेयक
2016 के मानसून सत्र से ही विधानसभा का सत्र बाधित है़ अब तक 50 से ज्यादा दिन विधानसभा का सत्र आहूत किया जा चुका है़ दो बार निर्धारित तिथि से 12 दिन पहले सत्रावसान कर दिया गया़
शेष दिन में भी सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल पायी. मिनटों में विधेयक और बजट पास हो रहे है़ं विधानसभा में गंभीर विषयों पर चर्चा नहीं हो रही है़ जनता के सवाल सदन के अंदर नहीं उठ रहे़
सदन में चली कुर्सियां, सीएनटी-एसपीटी पर हुआ था हंगामा
23 नवंबर 2016 को विधानसभा में अभूतपूर्व घटना हुई थी. विधानसभा की मर्यादा टूटी़ सदन में सीएनटी-एसपीटी विधेयक पर विपक्ष ने जबरदस्त हंगामा किया. सदन के अंदर कुर्सियां चली़ं स्पीकर पर पिन के गाेले और स्प्रे फेंके गये़
सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव आया, तो झामुमो और कांग्रेस के विधायक उत्तेजित हो गये़ चार विधायकों को निलंबित किया गया़ बाद में विधायकों निलंबन वापस हुआ़
बिना विपक्ष के भी सदन को चलाना पड़ा
2016 में 15 फरवरी से लेकर 18 मार्च तक के लिए सत्र बुलाया गया था़ सदन में जेपीएससी के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा हुआ़ दो मार्च को सदन की कार्यवाही बिना विपक्ष के चली़ केवल सत्ता पक्ष ही सदन की कार्यवाही में शामिल हुआ़ इसके बाद सदन में सीएनटी-एसपीटी का मुद्दा तूल पकड़ा़ सीएनटी-एसपीटी के मुद्दे पर दो से तीन सत्र की कार्यवाही बाधित रही़
क्या कहते हैं स्पीकर
छोटा सत्र है़ इसका सुदपयोग होना चाहिए़ सभी के सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा करता हू़ं
प्रो दिनेश उरांव, स्पीकर
सत्र से 24दिसंबर से
सत्र को लेकर पक्ष-विपक्ष की नहीं दिख रही गंभीरता, तीन वर्षों से सुचारू नहीं है विधानसभा, स्पीकर रास्ता निकालने में हैं जुटे
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