रांची : राष्ट्रीय संगोष्ठी में विकास आयुक्त ने कहा - सबको बिजली उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती

Updated at : 07 Dec 2018 11:21 PM (IST)
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रांची : राष्ट्रीय संगोष्ठी में विकास आयुक्त ने कहा - सबको बिजली उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती

रांची : विकास आयुक्त सह झारखंड ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी डीके तिवारी ने कहा कि सबको 24 घंटे सातों दिन बिजली उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती भरा काम है. इसके लिए वितरण कंपनियों को इफिशियेंट बनना होगा. बेहतर तरीके से मैनेजमेंट करना होगा. बिजली सरप्लस है, इसके बावजूद सभी उपभोक्ताओं को अबाधित बिजली नहीं […]

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रांची : विकास आयुक्त सह झारखंड ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी डीके तिवारी ने कहा कि सबको 24 घंटे सातों दिन बिजली उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती भरा काम है. इसके लिए वितरण कंपनियों को इफिशियेंट बनना होगा. बेहतर तरीके से मैनेजमेंट करना होगा. बिजली सरप्लस है, इसके बावजूद सभी उपभोक्ताओं को अबाधित बिजली नहीं मिल पाती. ऐसा सिर्फ मैनेजमेंट की कमी की वजह से होता है.
वितरण कंपनियों को बेहतर तरीके से अब बिजली का प्रबंधन करना होगा, ताकि उपभोक्ताओं को अबाधित बिजली मिल सके. श्री तिवारी ने यह बातें शुक्रवार को नेशनल कांफ्रेंस अॉन रेगुलेटरी फ्रेमवर्क इन इलेक्ट्रिसिटी इंडस्ट्रीज इन इंडिया पर दो दिवसीय कार्यशाला के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कही.
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिजली में तेजी से बदलाव हुआ है. एक से दो वर्षों में देश पावर सरप्लस बन गया है. पहले पब्लिक सेक्टर की कंपनियां थीं, आज निजी क्षेत्र की कंपनियां भी बिजली दे रही हैं. मोनोपोली समाप्त हुई है. अब उपभोक्ता राजा हैं, उन्हें बिजली चाहिए चाहे जैसे भी मिले.
श्री तिवारी ने मैनचेस्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि 90 के दशक में जब वे वहां थे, उनके घर में कनेक्शन देने के लिए अलग-अलग कंपनियां आग्रह कर रही थीं. अब यही सिस्टम भारत में भी होने जा रहा है. तब वितरण कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्द्धा होगी. श्री तिवारी ने कहा कि थर्मल पावर के लिए ग्रीन पावर जैसे सोलर, विंड एनर्जी आदि चुनौतियां बन रही हैं.
  • रेगुलेटरी फ्रेमवर्क इन इलेक्ट्रिसिटी इंडस्ट्रीज इन इंडिया पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन
  • सौर ऊर्जा अब थर्मल ऊर्जा के लिए बड़ी चुनौती साबित होती जा रही
  • वितरण कंपनियों को बेहतर तरीके से बिजली का प्रबंधन करना होगा
सोलर एनर्जी के लिए हाल ही में हुए बिडिंग में दर 2.44 रुपये प्रति यूनिट आयी. यानी ये भी सस्ती हो रही हैं. पर इन्हें बेहतर तरीके से ग्रिड तक ले जाने की तकनीक बनानी होगी. उन्होंने कहा कि वितरण कंपनियों को इफिशियेंट बनाना होगा. इसके लिए मैन पावर मैनेजमेंट, वैकल्पिक ऊर्जा प्रबंधन, फालतू खर्चे पर अंकुश लगाने जैसे काम करने होंगे.
झारखंड ऊर्जा संचरण निगम के एमडी निरंजन कुमार ने कहा कि सौर ऊर्जा अब थर्मल ऊर्जा के लिए बड़ी चुनौती साबित होते जा रही है. इसके स्टोरेज और वितरण को बेहतर करने की जरूरत है. दो दिवसीय इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में एनपीटीआइ दुर्गापुर के निदेशक एसके श्रीवास्तव ने सफल आयोजन पर झारखंड की सभी बिजली कंपनियों के प्रति आभार जताया.
कार्यक्रम में सहयोग देने वालों को मोमेंटो देकर सम्मानितभी किया गया, जिनमें झारखंड ऊर्जा विकास निगम के एमपी यादव व टीवीएनएल के कविंद्र राम शामिल हैं.
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