डॉक्टर के इकलौते बेटे की आंख से दुनिया देखेगी गिरिडीह की युवती

Published at :25 Nov 2018 1:57 AM (IST)
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डॉक्टर के इकलौते बेटे की आंख से दुनिया देखेगी गिरिडीह की युवती

रांची : जमशेदपुर के डाॅक्टर दंपती एके दास व सीमा शर्मा के इकलौते बेटे दीपांकर कुमार दास (18 वर्ष) की मौत शुक्रवार को मेडिका सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज के दौरान हो गयी. सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद दीपांकर को मेडिका में भर्ती किया गया था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका. दूसरी […]

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रांची : जमशेदपुर के डाॅक्टर दंपती एके दास व सीमा शर्मा के इकलौते बेटे दीपांकर कुमार दास (18 वर्ष) की मौत शुक्रवार को मेडिका सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज के दौरान हो गयी. सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद दीपांकर को मेडिका में भर्ती किया गया था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका.
दूसरी तरफ, बेटे को खोने का दर्द डाॅक्टर दंपती को है, इसके बावजूद उन्होंने बेटे के अंग को दान करने की हिम्मत दिखायी. चूंकि आंख को दान करना संभव था, इसलिए दोनों ने रिम्स के नेत्र विभाग से संपर्क किया गया. शुक्रवार की रात को ही राज्य अंधापन नियंत्रण विभाग, रिम्स व मेडिका अस्पताल के डॉक्टरों के सहयोग से रिम्स आइ बैंक में कॉर्निया को संग्रहित किया गया.
दूसरी तरफ, पहले से कॉर्निया की प्रतीक्षा कर रही गिरिडीह की 19 वर्षीय युवती की आंखों का रिम्स के नेत्र विभाग की टीम द्वारा सफल नेत्र प्रत्यारोपण शनिवार को किया गया. युवती की दोनों आंखें खराब थी, जिसके कारण वह देख नहीं पा रही थी. रिम्स के नेत्र विभाग के अध्यक्ष डॉ वीवी सिन्हा, नोडल ऑफिसर डॉ राजीव गुप्ता की देखरेख में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुनील कुमार ने नेत्र प्रत्यारोपण किया.
नेत्र प्रत्यारोपण के बाद युवती के चेहरे पर खुशी देखने लायक है. डॉ सुनील ने बताया कि एक सप्ताह बाद युवती की आंखों पर लगी पट्टी को हटाया जायेगा. डॉ राजीव ने बताया कि रिम्स में नेत्र प्रत्यारोपण का यह दूसरा मामला है. इससे पूर्व दो माह पहले दो युवतियों का नेत्र प्रत्यारोपण किया गया था. मेडिका की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अनिंद्या अनुराधा ने कहा कि डाॅक्टर दंपती के लिए यह कठिन समय था, लेकिन उन्हाेंने अपने इकलौते बेटे की आंखें दान कर दूसरे की जिंदगी में रोशनी ला दी.
उठ दीपू तेरे मोबाइल पर आ रहा है दोस्तों का मैसेज
दीपांकर उर्फ दीपू की मृत्यु के बाद उसके माता-पिता परेशान थे. मां को विश्वास नहीं हो रहा था कि उनका दीपू अब दुनिया में नहीं रहा. वरिष्ठ चिकित्सक डॉ विजय मिश्रा ने बताया कि मां बार-बार बेटे के शव के पास यही कह रही थी कि बेटे आंखें खोल, तू ऐसे नहीं जा सकता है. बेटे के मोबाइल को लेकर कह रही थी कि बेटा तेरे दोस्तों का मैसेज आ रहा है, आंख खोल कर पढ़ ले.
रिम्स को निधि खरे ने दी बधाई
आइएएस अधिकारी व पूर्व स्वास्थ्य सचिव निधि खरे ने रिम्स में नेत्र प्रत्यारोपण पर खुशी जतायी है. उन्हाेंने कहा कि यह रिम्स व मेरे लिए गौरव की बात है. उन्हाेंने कहा कि मैं हमेशा से चाहती थी कि रिम्स में आइ बैंक सक्षम हो, ताकि वह दृष्टिहीन लाेगों की आंखों को रोशनी दे सके.
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