ePaper

रांची : हाइकोर्ट के नये भवन निर्माण में गड़बड़ी की जांच अभियंताओं की कमेटी से करायें, इधर, पीआइएल पर सुनवाई आज

Updated at : 02 Nov 2018 6:26 AM (IST)
विज्ञापन
रांची : हाइकोर्ट के नये भवन निर्माण में गड़बड़ी की जांच अभियंताओं की कमेटी से करायें, इधर, पीआइएल पर सुनवाई आज

भवन निर्माण विभाग ने प्रस्ताव भेज कर मुख्यमंत्री से मांगी अनुमति रांची : भवन निर्माण विभाग ने निर्माणाधीन हाइकोर्ट भवन की वित्तीय अनियमितता की जांच अभियंताओं की कमेटी से कराने का प्रस्ताव भेज कर मुख्यमंत्री की अनुमति मांगी है. विभाग ने विभिन्न विभागों के अभियंताओं की कमेटी बना कर जांच कराने का सुझाव दिया है. […]

विज्ञापन
भवन निर्माण विभाग ने प्रस्ताव भेज कर मुख्यमंत्री से मांगी अनुमति
रांची : भवन निर्माण विभाग ने निर्माणाधीन हाइकोर्ट भवन की वित्तीय अनियमितता की जांच अभियंताओं की कमेटी से कराने का प्रस्ताव भेज कर मुख्यमंत्री की अनुमति मांगी है. विभाग ने विभिन्न विभागों के अभियंताओं की कमेटी बना कर जांच कराने का सुझाव दिया है. प्रस्ताव में निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग भी अभियंताओं की कमेटी से कराने की बात कही गयी है.
विभाग ने मुख्यमंत्री को भवन निर्माण की लागत में वृद्धि से संबंधित जानकारी भी दी है. बताया गया है कि निर्माण आरंभ करने के बाद प्रस्तावित भवन का क्षेत्रफल चार लाख वर्गफीट बढ़ा है. इसमें एडवोकेट ब्लॉक का निर्माण जोड़ा गया है. एडवोकेट ब्लॉक में 1200 वकील बैठेंगे. इसके अलावा कोर्ट रूम की संख्या भी 20 से बढ़ा कर 25 कर दी गयी है. प्लींथ ऊपर उठाया गया है. फर्निशिंग का काम भी जोड़ा गया है.
पूछा कि कैसे कराना है निर्माण : भवन निर्माण विभाग ने हाइकोर्ट भवन के बचे हुए कार्य को पूरा करने के लिए दिशा-निर्देश मांगा है. बताया है कि भवन निर्माण का काम अभी अधूरा है. उसमें सड़क का निर्माण, सोलर लाइटिंग और आइटी का काम बचा हुआ है.
ये सारे कार्य अलग-अलग विभागों से भी कराये जा सकते है. सोलर लाइटिंग के कार्य के लिए जेरेडा या उर्जा विभाग से काम लिया जा सकता है. सड़क निर्माण का काम पथ निर्माण विभाग और आइटी का काम सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की सहायता से संपन्न कराया जा सकता है.
तीन साल में 434 करोड़ बढ़ गयी लागत : झारखंड हाइकोर्ट के निर्माण की लागत पिछले तीन वर्षों में करीब 432 करोड़ रुपये बढ़ गयी है. 2016 में संबंधित कंपनी को करीब 265 करोड़ रुपये में टेंडर दिया गया था.
बाद में इसका इस्टीमेट बढ़ा कर 697.32 करोड़ कर दिया गया. इस्टीमेट बढ़ाने के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया. बिना टेंडर के रामकृपाल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को काम दे दिया गया. शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री ने अनियमितता की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की. विकास आयुक्त डॉ डीके तिवारी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी ने जांच के बाद वित्तीय गड़बड़ियां पायी है.
इधर, हाइकोर्ट में पीआइएल पर सुनवाई आज
रांची : हाइकोर्ट के नये भवन के निर्माण में हुई वित्तीय अनियमितताअों को लेकर दायर जनहित याचिका पर दो नवंबर को सुनवाई होगी. गुरुवार को प्रार्थी की अोर से शीघ्र सुनवाई का आग्रह किया गया.
चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने सुनवाई की तिथि निर्धारित की. प्रार्थी अधिवक्ता राजीव कुमार ने याचिका दायर कर वित्तीय अनियमितताअों की सीबीआइ से जांच कराने की मांग की है. इसमें कहा गया है कि सरकार के अधिकारियों, अभियंताअों आैर संवेदक की मिलीभगत से लागत बढ़ता गया. 265 करोड़ में संवेदक को कार्य दिया गया, जो बढ़ कर लगभग 699 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
इसके लिए लिए सरकार से किसी प्रकार की अनुमति नहीं लेने का प्रार्थी ने आरोप लगाया है.
याचिका में यह भी कहा गया है कि बिल्डिंग निर्माण के पूर्व भवन निर्माण विभाग ने इंवायरमेंटल क्लियरेंस भी नहीं लिया है.बिना क्लियरेंस के ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया था. हाइकोर्ट ने पूर्व में एडवोकेट एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को नये परिसर के निर्माण के लिए जमीन देने का आदेश दिया था. सरकार ने नगड़ी अंचल के तिरिल माैजा (धुर्वा) में 165 एकड़ जमीन हाइकोर्ट निर्माण के लिए दी थी. वर्ष 2016 से निर्माण कार्य चल रहा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola