रांची : साइबर ठगी व धार्मिक उन्माद फैलाने के मामले में कांटाटोली व कांके में छापेमारी 7000 से अधिक सिम कार्ड मिले
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Oct 2018 7:24 AM
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रांची : साइबर ठगी व धार्मिक उन्माद फैलाने की सूचना पर एटीएस, रांची पुलिस और साइबर पुलिस ने कांटाटोली स्थित हासिब इंक्लेव के एक फ्लैट और कांके के भीठा स्थित एक घर में छापेमारी की. छापेमारी के दौरान वहां से हजारों की संख्या में सिम कार्ड बरामद किये गये हैं. साथ ही सिम बॉक्स और […]
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रांची : साइबर ठगी व धार्मिक उन्माद फैलाने की सूचना पर एटीएस, रांची पुलिस और साइबर पुलिस ने कांटाटोली स्थित हासिब इंक्लेव के एक फ्लैट और कांके के भीठा स्थित एक घर में छापेमारी की. छापेमारी के दौरान वहां से हजारों की संख्या में सिम कार्ड बरामद किये गये हैं. साथ ही सिम बॉक्स और मॉनिटर बरामद किये गये हैं. पुलिस ने दोनों स्थान से एक-एक युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है.
छापेमारी के दौरान फ्लैट में जावेद नहीं मिला. वहां से हिरासत में लिया गया युवक उसका रिश्तेदार बताया जाता है. फ्लैट के मालिक इंतिखाब से भी पुलिस ने पूछताछ की. उसने बताया कि अशरफ नामक व्यक्ति को फ्लैट किराये पर दे रखा था. छापेमारी का नेतृत्व सिटी एसपी अमन कुमार और एटीएस के एसपी पी मुरूगन कर रहे थे. पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि कहीं मामला आतंकी गतिविधियों से जुड़ा तो नहीं. जांच के दौरान 350 मोबाइल नंबरों की सूची भी मिली है.
जावेद अहमद की थी तलाश : पुलिस को सूचना मिली थी कि कांटाटोली चौक के समीप स्थित हसीबा इंक्लेव के एक फ्लैट में जावेद अहमद नामक व्यक्ति द्वारा एक कंपनी का सात हजार सिमकार्ड लेकर सिमबॉक्स का संचालन किया जा रहा है. कंपनी के पूर्व कर्मी अब्दुल जमीद के सहयोग से जावेद को सिमकार्ड मिला था. इसके एवज में अब्दुल ने जावेद से सात लाख रुपये रिश्वत भी लिये हैं.
मोबाइल नंबर को पटना स्थित कार्यालय से एक्टिव किया गया है. इसमें कंपनी के सीनियर मैनेजर पुरुषोत्तम भी शामिल हैं. इसी कंपनी से और 10 हजार सिमकार्ड मुहैया कराने की भी संभावना है. साथ ही यह भी आशंका है कि अन्य मोबाइल कंपनियों की सिमकार्ड का भी इसी प्रकार उपयोग किया जा सकता है. जावेद अहमद शायद अभी दुबई में है.
एक कंपनी की सात हजार सिमकार्ड को एक्टिव कराना इस आशंका को बल देता है कि इसका उपयोग साइबर क्राइम के लिए भी किया जा सकता है. पुलिस को आशंका है कि इस मामले में आम नागरिकों से साइबर अपराध को अंजाम दिया जा सकता है. साथ ही धार्मिक उन्माद फैलाया जा सकता है व आतंकी गतिविधियों का संचालन किया जा सकता है.
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