झारखंड में प्रोफेसरों की बहाली प्रक्रिया अचानक रुकी, JPSC नहीं, अब 'विश्वविद्यालय सेवा आयोग' करेगा 6,524 पदों पर भर्ती

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झारख‍ंड में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति की प्रक्रिया रुकी, Pic Credit- AI, Only for Symbolism

झारख‍ंड में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति की प्रक्रिया रुकी, Pic Credit- AI, Only for Symbolism

झारखंड सरकार ने सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी है. पुनर्गठन के बाद 6,524 पदों पर नई नियुक्तियां अब झारखंड राज्य विवि सेवा आयोग द्वारा की जाएंगी.

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रांची : झारखंड सरकार ने जेपीएससी के माध्यम से सरकारी विश्व विद्यालय और अंगीभूत कॉलेजों में शैक्षणिक (असिस्टेंट प्रोफेसर एसोसिएट प्रोफेसर) पदों पर की जा रही नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी है. इसे लेकर उच्च व तकनीकी शिक्षा निदेशक सुधीर बाड़ा ने जेपीएससी सचिव को पत्र भेजा है. जिसमें पूरी प्रक्रिया स्थगित रखने के लिए कहा गया है. ऐसे में कुछ दिन पहले लागू नियम के अनुसार अब नयी नियुक्तियां झारखंड राज्य विवि सेवा आयोग से होगी. निदेशक सुधीर बाड़ा ने अपने पत्र में कहा है कि राज्य सरकार ने सरकारी विवि व अंगीभूत कॉलेजों में शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक पदों का पुनर्गठन किया है. इस पुनर्गठन के फलस्वरूप सभी सरकारी विवि में शिक्षकों के 5173 पदों को पुनर्गठित करते हुए उसमें 1351 अतिरिक्त पद सृजित किये गये हैं.

नियुक्ति प्रक्रिया में लग सकता है लंबा समय

पुनर्गठन के बद शिक्षकों की कुल संख्या 6524 है. जिसके रोस्टर क्लियरेंस की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है. निदेशक ने सचिव को आवश्यक कार्रवाई करते हुए विभाग को अवगत कराने के लिए कहा है. फिलहाल जेपीएससी द्वारा विश्व विद्यालय में अधिकारियों के लगभग 23 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गयी थी. अब पूरी प्रक्रिया फिर से विवि सेवा आयोग द्वारा शुरू किये जाने से नियुक्ति में लंबा समय लगने की आशंका है.

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पीटी रिजल्ट में सदस्यों को अलग रखा गया

जेपीएससी दफ्तर में सीआईडी का छापा इन दिनों चर्चा का विषय बन गया है. आमलोगों के बीच ये मैसेज गया है कि गड़बड़ियों की वजह से ये रेड पड़ी है. लेकिन सूत्रों की मानें तो आयोग के अंदरूनी कलह भी सीआईडी छापेमारी की वजह बनी है. बताया जाता है कि अध्यक्ष और उप परीक्षा नियंत्रक आयोग के तीनों सदस्यों को किसी कार्य की भनक तक नहीं लगने दे रहे थे. इससे सदस्य नाराज थे. एल खियांग्ते द्वारा पीटी रिजल्ट में भी एक्ट का हवाला देकर सदस्यों को अलग रखने से असंतोष बढ़ा. उप परीक्षा नियंत्रक का कद बढ़ने और स्थानांतरण के बाद भी कार्य करते रहने से अधिकारी-कर्मचारी भी नाराज थे. इससे पूर्व एक परीक्षा नियंत्रक को हटाना भी इसी कड़ी से जोड़ा जा रहा है.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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