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रिम्स में जिस मरीज को दिया गया था 50,000 के इंप्लांट का एस्टिमेट, मुफ्त में हो गयी उसकी सर्जरी

6 Oct, 2018 1:19 am
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रिम्स में जिस मरीज को दिया गया था 50,000 के इंप्लांट का एस्टिमेट, मुफ्त में हो गयी उसकी सर्जरी

रांची : रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती बेरमो निवासी अशोक चौहान की सर्जरी शुक्रवार को न्यूरो सर्जन डॉ सीबी सहाय की देखरेख में की गयी. यह सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क की गयी. मरीज के परिजन को इंप्लांट, दवा व अन्य सेवा के लिए कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ा. मरीज […]

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रांची : रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती बेरमो निवासी अशोक चौहान की सर्जरी शुक्रवार को न्यूरो सर्जन डॉ सीबी सहाय की देखरेख में की गयी. यह सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क की गयी. मरीज के परिजन को इंप्लांट, दवा व अन्य सेवा के लिए कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ा. मरीज को ऑपरेशन के बाद वार्ड में भर्ती किया गया है.
हालांकि, मरीज के पास आयुष्मान भारत का गोल्डेन कार्ड था. इसके बावजूद उसके परिजन से इंप्लांट खरीद कर लाने को कहा गया था. यह खबर जब मीडिया में आयी, तो स्वास्थ्य विभाग और रिम्स प्रबंधन हरकत में आये और मरीज की मुफ्त सर्जरी संभव हो पायी. खबर प्रकाशित होने के बाद रिम्स प्रबंधन सजग हुआ और एक दिन में भी लोकल टेंडर पर इंप्लांट की खरीदारी की गयी.
साथ ही डॉ सीबी सहाय को सर्जरी का निर्देश दिया. डाॅ सहाय की ओटी तिथि नहीं होने के बाद भी मरीज की सर्जरी की गयी. खास बात यह है कि जिस इंप्लांट के लिए मरीज के परिजन काे 50,000 का स्टीमेट और सप्लायर का नंबर दिया गया था, उसी इंप्लांट को कंपनी के अधिकृत सप्लायर ने मात्र 37,100 रुपये में ही उपलब्ध करा दिया.
यानी अगर मरीज आयुष्मान भारत का लाभार्थी नहीं हाेता, तो उसे 50,000 रुपये खर्च करने पड़ते. ऐसे यह साबित होता है कि इंप्लांट के लिए मरीज के परिजनों को अधिक कीमत देना पड़ता है. डॉ सीबी सहाय ने बताया कि मरीज का ऑपरेशन सफल रहा है. शीघ्र ही वह अपनी समस्या से निजात पा जायेगा.
मरीज के परिजन को गुमराह कर रहे हैं कुछ अवांछित लोग : निदेशक
रिम्स निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने बताया कि मरीज की पत्नी लालपरी देवी ने पूछताछ में बताया कि उससे पैसा नहीं लिया गया है. इंप्लांट के खर्च का ब्योरा दिया गया था. किसी डॉक्टर व कर्मचारी ने उनसे पैसे नहीं मांगे थे. किसी व्यक्ति ने उससे संपर्क किया था. कुछ अवांछित लोग मरीज के परिजन को आयुष्मान भारत के लिए गुमराह कर रहे हैं, जिसकी रोकथाम के लिए सुरक्षाकर्मी को नजर रखने के लिए कहा गया है.
आयुष्मान भारत के लिए लाभार्थी व डॉक्टर को किया जा रहा जागरूक
अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप व नोडल ऑफिसर डॉ संजय कुमार ने बताया कि आयुष्मान भारत के लाभार्थियाें को जागरूक किया जा रहा है. आयुष्मान मित्र को बेड पर जाकर लाभार्थी की पहचान करने को कहा गया है. बैनर पोस्टर के माध्यम से लाभार्थी को सीधे रिम्स प्रबंधन से संपर्क करने को कहा गया है. डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वह मरीज के परिजन से पूछे कि उनके पास गोल्डेन कार्ड है या नहीं.
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