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रांची में बोलीं सुमित्रा महाजन- क्या आरक्षण से होगा देश का कल्याण ?

Updated at : 01 Oct 2018 7:25 AM (IST)
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रांची में बोलीं सुमित्रा महाजन- क्या आरक्षण से  होगा देश का कल्याण ?

रांची : लोकसभा की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि हम सामाजिक समरसता की बात करते है़ं आज आत्मचिंतन, आत्म निरीक्षण करने का समय है़हमारा अपने देश व समाज के प्रति क्या योगदान है़ हर एक को, जिनको आरक्षण मिल गया, जिनको आरक्षण नहीं मिला़ आत्मचिंतन करना चाहिए कि हमें तो आरक्षण मिल गया़ खुद […]

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रांची : लोकसभा की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि हम सामाजिक समरसता की बात करते है़ं आज आत्मचिंतन, आत्म निरीक्षण करने का समय है़हमारा अपने देश व समाज के प्रति क्या योगदान है़ हर एक को, जिनको आरक्षण मिल गया, जिनको आरक्षण नहीं मिला़ आत्मचिंतन करना चाहिए कि हमें तो आरक्षण मिल गया़ खुद आगे बढ़ तो गये, मैंने समाज को क्या बांटा़ हम समाज को कितना साथ लेकर चले, कितना सहारा दिया.डॉ आंबेडकर ने खुद ही कहा था कि 10 वर्षों के लिए आरक्षण होना चाहिए़ उनकी कल्पना सामूहिक उत्थान की थी़ सामाजिक समरसता की सोच थी़
हमने क्या किया़ सृजन में, सामूहिक चिंतन का काम नहीं किया़ पार्लियामेंट में बैठे लोगों ने भी यही किया़ हर 10 साल में आरक्षण बढ़ाते गये़ फिर 20 साल बढ़ा दिया़ केवल आरक्षण देने से देश का उद्धार हो सकता है क्या़ भेदभाव से सामाजिक समरसता नहीं आ सकती़ श्रीमती महाजन रविवार को लोकमंथन-2018 के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहीं थी़ं
लाेकसभा अध्यक्ष ने कहा : मीडिया वाले ध्यान से सुने़ं मैं आत्मचिंतन और आत्मनिरीक्षण की बात कर रही हू़्ं मेरे अंदर भावना आयी है, मैं व्यक्त कर रही हू़ं ऐसा नहीं है कि मैं आरक्षण विरोधी हू़ं.

उन्होंने एक उदाहरण देते अपनी बातों का मर्म भी समझाया
श्रीमती महाजन ने कहा : एक भोज रखा, ब्राह्मण यहां बैठेंगे, क्षत्रिय वहां बैठेंगे, शुद्र हैं यहां बैठेंगे़ क्या यह भोजन पूर्ण होगा? ब्रह्म की प्राप्ति होगी? अलग-अलग बैठे लोग यही सोचते रहेंगे कि हम यहां बैठे,वो वहां बैठे़ एक तरह के समाज की कल्पना होनी चाहिए़ लोकसभा अध्यक्ष ने पूरे संबोधन में भारतीय संस्कृति, राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, समाजबोध को लेकर अपनी बातें रखी़ं राष्ट्र निर्माण, समाज के प्रति सचेत प्रयास के लिए युवाओं को आगे आने का आह्वान किया. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास, मंत्री अमर कुमार बाउरी, मेयर आशा लकड़ा, प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे नंदकुमार, केंद्रीय विवि के कुलपति नंदकुमार इंदू और कार्यक्रम के संयोजक राजीव कमल बिट्टू ने भी संबोधित किया. समारोह में लेखक-चिंतक देवी सहाय पांडेय को सम्मानित किया गया़ लोकमंथन में पहली बार प्रज्ञा प्रवाह सम्मान की शुरुआत की गयी़ मौके पर विधानसभा के स्पीकर दिनेश उरांव भी मौजूद थे़.

निर्णय देशहित में हो: लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि हर विषय पर डिबेट हो, डिस्कशन हो, लेकिन जब निर्णय हो, तो वह देश हित को ध्यान में रख कर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि बतौर लोकसभा अध्यक्ष उनकी कोशिश होती है कि संसद मेें देश के लिए निर्णय हो जाये़ संसद पूरे देश के लिए सोचने का काम करती है़ नीति तय करती है़ कानून बनाती है़ विचार अलग-अलग हो सकते है़ं लेकिन निर्णय वही होना चाहिए, जो देश के लिए अच्छा हो़ देश काल, परिस्थिति को आधार बना कर निर्णय होना चाहिए़ सामाजिक सोच उभर कर आना चाहिए़ जन का मन, गण का मन बनना चाहिए.

पहले राष्ट्र, हम पूरा टैक्स दे रहे हैं, तो इस देश के नागरिक हैं : लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती महाजन ने कहा : मेरा राष्ट्र है, यह भाव जरूरी है़ सरकार अपना काम करती है़ हमें अधिकार बोध के साथ कर्तव्य का भी भाव रखना होगा़ समाज के लिए मैं कितना कर रहा हू़ं

इसे सोचना होगा़ क्या हम पूरा टैक्स दे रहे है़ं, तब इस देश को नागरिक होंगे़ भारतीय संस्कृति है कि जीवन में जो मिलेगा, उससे ज्यादा हाथ देने के लिए आगे आये़ हाथ मांगने के लिए केवल नहीं होना चाहिए़ यह मेरा देश है कि भावना जब तक तीव्र नहीं होगी, देश विकास नही करेगा़
आंदोलन में पहला पत्थर सरकारी संपत्ति को नुकसान करने के लिए ही उठता है : लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आंदोलन प्रजातांत्रिक अधिकार है़.आंदोलन होता है, तो सबसे पहले बात होती है कि सरकारी चीज का बहिष्कार करो़ पहला पत्थर सरकारी बस का शीशा तोड़ने, स्ट्रीट लाइट फोड़ने के लिए ही उठता है़ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते है़ं सोचना चाहिए कि यह सब मेरे टैक्स से बनी है़ हम अपने पैसे का ही नुकसान कर रहे है़ं
नारी का पूजन नहीं, सम्मान होना चाहिए, रथ की सारथी है, दिशा देगी : लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि नारी का पूजन नहीं, सम्मान होना चाहिए़ नारी भी मनुष्य है़ एक साथ विकास चाहती है़ समाज का घटक है़. वह पीछे रह जायेगी, तो विकास नहीं होगा़ स्त्री सांसारिक रथ की सारथी है़ पुरुष पराक्रम का प्रतीक रथ की सारथी स्त्री दिशा देती है़ पुरुष का काम तब पराक्रम दिखाने का है़ स्त्री में मातृत्व और समर्पण का गुण होना चाहिए़ स्त्री मुक्ति की बात नहीं, उसको समानता देने की बात होनी चाहिए.

आंबेडकर ने सामूहिक उत्थान और समरसता की बात कही थी, भेदभाव से समरसता नहीं आयेगी
एक तरह के समाज की कल्पना होनी चाहिए
श्रीमती महाजन ने एक उदाहरण देते अपनी बातों का मर्म भी समझाया़ उन्होंने कहा : एक भोज में ब्राह्मण यहां बैठेंगे, क्षत्रिय वहां बैठेंगे, शुद्र हैं यहां बैठेंगे़ क्या यह भोजन पूर्ण होगा? ब्रह्म की प्राप्ति होगी? अलग-अलग बैठे लोग यही सोचते रहेंगे कि हम यहां बैठे, वो वहां बैठे़ एक तरह के समाज की कल्पना होनी चाहिए़
कांग्रेस ने महापुरुषों के साथ भेदभाव किया : सीएम
सीएम रघुवर दास ने कहा कि कांग्रेस ने महापुरुषों के साथ भेदभाव िकया. सरदार पटेल, नेताजी, शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु जैसे वीर सपूतों को वैसा सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे.
इसी प्रकार झारखंड के वीर शहीद भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, सिदो-कान्हू समेत सभी शहीदों के योगदान को कमतर दिखाया गया. मार्टिन लूथर किंग की तरह ही बाबा साहब ने वंचितों के लिए लड़ाई लड़ी. देश को संविधान दिया, लेकिन उन्हें भारत रत्न के लायक नहीं समझा गया. वाजपेयी की सरकार ने उन्हें भारत रत्न दिया, जो उन्हें काफी पहले मिल जाना चाहिए था.
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