रांची : मां के संस्कार उसके बच्चों को प्रभावित करते हैं : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू

Updated at : 30 Sep 2018 8:16 AM (IST)
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रांची : मां के संस्कार उसके बच्चों को प्रभावित करते हैं : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू

रांची : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मां के केवल मुस्कुराने से अानेवाले बच्चे को संस्कार नहीं मिलेगा. संस्कार वो है, जो मां के अंदर है. मां जो सोचती है, मां का व्यवहार व खान-पान का प्रभाव बच्चे पर पड़ता है. मां के जो संस्कार हैं, वो आनेवाले बच्चों को प्रभावित करता है. राज्यपाल […]

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रांची : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मां के केवल मुस्कुराने से अानेवाले बच्चे को संस्कार नहीं मिलेगा. संस्कार वो है, जो मां के अंदर है. मां जो सोचती है, मां का व्यवहार व खान-पान का प्रभाव बच्चे पर पड़ता है. मां के जो संस्कार हैं, वो आनेवाले बच्चों को प्रभावित करता है.
राज्यपाल ने कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम महिला कॉलेजों में भी चलाया जाये, ताकि उन छात्राओं को भी अद्भुत मातृत्व का ज्ञान मिल सके, क्योंकि वो बच्चियां भी आगे चल कर एक दिन मां की भूमिका अदा करेंगी. राज्यपाल शुक्रवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि व फॉग्सी के तत्वावधान में अद्भुत मातृत्व विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं.
राज्यपाल ने कहा कि जहां तक योग की बात है, तो योग एक दिन में नहीं होता है, योग नियमित होना चाहिए. मैं भी योग करती हूं. खुद को मानसिक तौर पर मजबूत करने के लिए करती हूं. जब तक नियमित तरीके से योग नहीं होगा, तब तक आपके अंदर परफेक्शन नहीं आयेगा.
मौके पर रिम्स निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने कहा कि अद्भुत मातृत्व कार्यक्रम आंख खोलने वाला कार्यक्रम है. मुंबई से आयीं
गायनोक्लोजिस्ट डॉ शुभदा नील ने कहा कि अब तक देश भर में 100 से अधिक कार्यक्रम किये गये हैं. डॉ ईवी स्वामीनाथन ने कहा कि बच्चे की पहली शिक्षक उसकी मां ही होती है. इससे पूर्व अद्भुत मातृत्व की महिमा पर नृत्य व नाटक का मंचन किया गया.
फॉर्मूला बताना आसान है, परिस्थितियां एक जैसी नहीं होती : सीपी सिंह
नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने कहा कि एक व्यक्ति स्वस्थ जीवन जीना चाहता है, लेकिन उसे पता नहीं रहता है कि कैसे जिया जाये. फॉर्मूला बताना आसान होता है, परंतु हर व्यक्ति के साथ एक जैसी परिस्थितियां नहीं होती हैं.जब से वैश्वीकरण आया है, समाज के अंदर हर व्यक्ति में बदलाव आया है. लोगों का उद्देश्य पढ़ लिख कर केवल पैसा कमाना है.
आप सर्वे करा लें कि आज शहर में गर्भवती महिलाओं का सामान्य ढंग से प्रसव होता है क्या? डॉक्टर पैसे लेकर तुरंत ऑपरेशन कर देते हैं. कभी बच्चा उल्टा हो गया है, तो कभी बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो रही है, यह कह कर आॅपरेशन कर देते हैं, लेकिन एक गरीब व्यक्ति कहां से पैसा देगा. आज हर व्यक्ति परेशान है, मेडिटेशन कहां से करेगा.
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