रांची : विपक्ष ने भी बोला हमला, किसी ने कहा, बजट नाकाफी है तो किसी ने बताया चुनावी जुमला
Author Prabhat khabar digital desk
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रांची : बीमारी का इलाज बीमा कंपनी नहीं, चिकित्सक करते हैं : हेमंत सोरेन रांची : झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना एक स्वास्थ्य बीमा योजना है. लेकिन, सरकार को मालूम होना चाहिए कि बीमारी का इलाज बीमा कंपनी नहीं, चिकित्सक करते हैं. सरकार ये बताये […]
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रांची : बीमारी का इलाज बीमा कंपनी नहीं, चिकित्सक करते हैं : हेमंत सोरेन
रांची : झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना एक स्वास्थ्य बीमा योजना है.
लेकिन, सरकार को मालूम होना चाहिए कि बीमारी का इलाज बीमा कंपनी नहीं, चिकित्सक करते हैं. सरकार ये बताये कि बीमा कंपनियों को पैसा दे देने से क्या हर गांव में चिकित्सक पहुंच जायेंगे? सभी पीएचसी एवं स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सकों की संख्या बढ़ जायेगी? उन्होंने कहा कि राष्ट्र स्वास्थ्य बीमा योजना पहले से झारखंड में चल रहा है.
पहले यह श्रम विभाग के तहत संचालित था. अब यह स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित है. सरकार यह बताये कि पिछले चार वर्षों में इस सरकार ने राष्ट्र स्वास्थ्य बीमा के अंतर्गत बीमा कंपनियों को कितने पैसे दिये और इसके विरुद्ध बीमा कंपनियों ने गरीबों के इलाज के लिए कितने रुपये भुगतान किये?
आप को पता चल जायेगा कि स्थिति क्या है. जहां गांव में बीमार लोग हैं, वहां डॉक्टर नहीं हैं और जहां डॉक्टर हैं वहां गरीब पहुंच नहीं पाता है. असाध्य रोग के लिए झारखंड में एक लाख रुपये मिलते थे. हमारी सरकार ने इसे बढ़ा कर ढाई लाख किया था. जनता इसका भी लाभ उठा नहीं पाती है.
रांची : प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ अजय कुमार कहा कि आयुष्मान भारत के लिए जो बजट निर्धारित किया गया है, वह नाकाफी है. यह योजना केवल भाजपा को आयुष्मान बनाने के लिए लागू की गयी है. भारत तो आयुष्मान है और आयुष्मान रहेगा. डाॅ अजय ने कहा कि आयुष्मान भारत को लागू करने से पहले जानकारों की राय थी कि इस योजना का बजट एक लाख करोड़ होनी चाहिए, जबकि इस योजना में दो हजार करोड़ के ही बजट का प्रावधान किया गया है.
डेढ़ लाख वेलनेस सेंटर खोलने की बात हो रही है, जो सत्य से परे है. यह चुनाव को लेकर जनता के आंख में धूल झोंकने वाला कदम है. जब प्रधानमंत्री का कार्यकाल 2019 तक है, तो किसी भी योजना का लक्ष्य 2022 बताना विश्व का सबसे बड़ा जुमला है.
प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, अटल पेंशन योजना पूरी तरह से फेल साबित हुई है. यहां तक कि यूपीए सरकार के समय में चालू की गयी राष्ट्रीय सुरक्षा बीमा योजना अब तक एनडीए सरकार के संवेदनहीनता के कारण अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पायी है.
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