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रांची : ....जब परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर ने कहा, कारगिल युद्ध में सांस रोक कर कैसे खुद को मुर्दा बना लिया था

Updated at : 10 Sep 2018 7:41 AM (IST)
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रांची : ....जब परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर ने कहा, कारगिल युद्ध में सांस रोक कर कैसे खुद को मुर्दा बना लिया था

रांची : रविवार काे रांची पहुंचे परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव ने बताया कि किस तरह उन्होंने कारगिल युद्ध दौरान सांस रोक कर अपने को मुर्दा जैसा बना लिया था. दुश्मन सेना के जवान दूसरे दिन हमारे बंकर को तबाह करने की योजना पर बात कर रहे थे. उस योजना को अपने […]

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रांची : रविवार काे रांची पहुंचे परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव ने बताया कि किस तरह उन्होंने कारगिल युद्ध दौरान सांस रोक कर अपने को मुर्दा जैसा बना लिया था. दुश्मन सेना के जवान दूसरे दिन हमारे बंकर को तबाह करने की योजना पर बात कर रहे थे.
उस योजना को अपने अफसर को बताने के लिए हाथ-पैर बुरी तरह घायल होने के बाद भी मैं काफी दूर तक रेंग कर उनके पास पहुंचा. उन्हें दुश्मनों की योजना बतायी. उस वक्त अफसरों ने मेरा प्राथमिक उपचार किया.
बाद में मुझे नीचे लाया गया. वहां मुझसे पूछा गया कि क्या स्थिति है, तो मैंने बताया कि मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा है. 72 घंटे तक खाने-पीने को भी कुछ नहीं मिला था. मैंने पानी मांगा, तो कहा गया कि इस हालत में पानी पीने से परेशानी बढ़ सकती है. लेकिन डॉक्टर ने मुझे पानी दिया. एक इंजेक्शन भी दिया. उसके बाद क्या हुआ मुझे पता नही. बाद में मुझे वहां से जम्मू के मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया. फिर वहां से मुझे दिल्ली रेफर कर दिया गया. श्री यादव ने सारी बातें रांची प्रेस क्लब में मीडिया संवाद में कही.
राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित
सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव रविवार को रांची पहुंचे. यहां उन्होंने कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. राजभवन में सम्मान समारोह का आयोजन हुआ. सूबेदार मेजर श्री यादव दिन के तीन बजे राजभवन पहुंचे, जहां उन्हें राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने मोमेंटो देकर सम्मानित किया. वहां उन्होंने काफी देर तक राज्यपाल से बातें की. मौके पर कई सैन्य पदाधिकारी व राजभवन के पदाधिकारी मौजूद थे.
वार मेमोरिययल में दी शहीदों को श्रद्धांजलि
परमवीर श्री यादव ने दीपाटोली कैंट स्थित वार मेमोरियल में शहीदों को श्रद्धांजलि दी. कार्यक्रम के संयोजक झारखंड वेटरन एसोसिएशन के अध्यक्ष कर्नल बीएन दुबे थे.
इनके अलावा एसोसिएशन के संयोजक कर्नल एलजे देव, कर्नल नीलांबर झा, कर्नल एमसी देवघरिया, मेजर जेएन सिंह, कैप्टन एसएस मिश्रा, एसएम टीके त्रिपाठी, सूबेदार आरएल सिंह, एसके सिंह, झारखंड पूर्व सैनिक सेवा परिषद के अनिरुद्ध सिंह, संगठन मंत्री मुकेश कुमार, जिला उपाध्यक्ष सूबेदार एसएन सिंह, कर्नल एसके सिंह व परिषद के जमशेदपुर शाखा के कई सदस्य उपस्थित थे.
प्रेस क्लब सहित कई संगठनों ने किया सम्मानित
प्रभात खबर का कॉफी टेबुल बुक ‘शौर्य गाथा’ समर्पित
परमवीर योगेंद्र सिंह यादव को भूतपूर्व सैनिक कल्याण संघ ने एक कार्यक्रम में शौर्य गाथा समर्पित किया. दो वर्ष पहले झारखंड से जुड़े सेना के 14 वीरों (शहीद और जीवित) को जिन्हें परमवीर चक्र, शौर्य चक्र,वीर चक्र, कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था़, उनके सम्मान में प्रभात खबर ने कॉफी टेबल बुक ‘शौर्य गाथा’ प्रकाशित की थी. संभवत: पूरे हिंदुस्तान में सेना के ऊपर किया गया शायद पहला प्रयास था. कुछ माह बाद कॉफी टेबल बुक को आधार मानकर इसमें शामिल शहीदों की जीवनी को झारखंड सरकार ने स्कूलों में 8वीं के पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया था.
भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया
रोड शो के बाद परमवीर सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव बिरसा चौक पहुंचे और वहां भगवान बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा पर माल्यापर्ण किया़ उसके बाद एयरपोर्ट पहुंचे. वहां उन्हें विदाई दी गयी़ इससे पहले परमवीर योगेंद्र सिंह यादव ने परमवीर अलबर्ट एक्का की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.
श्री यादव खुली जीप में सवार होकर अलबर्ट एक्का चौक पहुंचे़ दो परमवीरों को एक साथ देखने के लिए काफी लोग जमा हुए थे़ इस दौरान श्री यादव के साथ झारखंड पूर्व सैनिक सेवा परिषद के महासचिव अनिरुद्ध सिंह व अन्य सदस्य, परमवीर अब्दुल हमीद स्मारक समिति के सदस्य भी मौजूद थे़
मेरे नाम का एक जवान शहीद हो गया था, घर में मच गया था कोहराम
18 ग्रेनेडियर बटालियन में एक आैर योगेंद्र सिंह यादव नाम का जवान था. वह इस युद्ध में शहीद हो गया था़ मुझे जिस जहाज से भेजा गया था, उसी जहाज में उस शहीद का भी शव था. इसी बीच दूसरी तरफ बुलंदशहर के औरंगाबाद अहीर गांव में हल्ला हो गया कि योगेंद्र सिंह यादव शहीद हो गया़ इतना सुनते ही मेरे घर में कोहराम मच गया़ मेरा भाई भी फौज में है, उसने मेरे बारे में जानकारी ली तब पता चला कि मैं जिंदा हूं और दिल्ली के अस्पताल मेें भर्ती हूं.
वहां जब मेरी मां पहुंची, तो मेरे पूरे शरीर में पट्टी बंधी हुई थी. पहले तो वह पहचान नहीं पायी, लेकिन जब उन्हें बताया गया कि पट्टी बंधा व्यक्ति मैं ही हूं तो वह मेरे पास आयी और दहाड़ मार कर रोने लगी़ मैंने मां से कहा कि रोने से मैं ठीक नहीं हो जाऊंगा और अगर रोने से ठीक हो जाता हूं तो मैं भी तुम्हारे साथ रोता हू़ं मुझे बेड के साथ बाहर ले चलो़ इतना समझाने के बाद वह चुप हुई़ बाद मैं ठीक होकर घर आया़
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