रांची : प्रभात खबर ने स्कूली बच्चों से की बातचीत, बच्चे बोले टाइम बचता है और पैसे भी, इसीलिए बाइक से स्कूल आना-जाना करते हैं
Updated at : 24 Aug 2018 12:21 AM (IST)
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रांची : राजधानी रांची की सड़कों पर स्कूली बच्चे बाइक और स्कूटी चलाते आसानी से देखे जा सकते हैं. इन के पास ड्राइविंग लाइसेंस होने का तो सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि इनकी उम्र 18 साल से कम होती है. इसके बावजूद ये बच्चे खुलेआम यातायात नियमों को उल्लंघन करते हैं. इस दौरान वे दुर्घटनाओं […]
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रांची : राजधानी रांची की सड़कों पर स्कूली बच्चे बाइक और स्कूटी चलाते आसानी से देखे जा सकते हैं. इन के पास ड्राइविंग लाइसेंस होने का तो सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि इनकी उम्र 18 साल से कम होती है.
इसके बावजूद ये बच्चे खुलेआम यातायात नियमों को उल्लंघन करते हैं. इस दौरान वे दुर्घटनाओं का भी शिकार हो जाते हैं. इसके बाद उनके माता-पिता खुद को कोसने के अलावा कुछ नहीं कर पाते हैं.
प्रभात खबर की टीम ने गुरुवार को शहर के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों से बातचीत की. टीम ने यह जानना चाहा कि नाबालिग हाेने और लाइसेंस नहीं होने के बावजूद वे बाइक या स्कूटी क्यों चलाते हैं?
जबकि यह नियम के खिलाफ है और उनकी उम्र के बच्चों के लिए खतरनाक भी. इस सवाल पर बाइक और स्कूटी सवार कुछ छात्र-छात्राएं वहां से भाग खड़े हुए. वहीं, कुछ विद्यार्थियों ने ईमानदारी से सवालों के जवाब दिये. कहा कि वे स्कूल के बाद ट्यूशन समय पर पहुंचने के लिए बाइक व स्कूटी का प्रयोग करते हैं. साथ ही यह पब्लिक ट्रांसपोर्ट से किफायती भी पड़ता है.
क्या कहते हैं स्कूली बच्चे
मैं बाइक से स्कूल नहीं आता हूं. हां! मेरे कुछ दोस्त जरूर बाइक और स्कूटी से स्कूल आते हैं. उनकी भी मजबूरी है. स्कूल के बाद सभी को अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग ट्यूशन करना पड़ता है. स्कूल के बाद ट्यूशन में समय पर पहुंचना पड़ता है. अगर देर हो गयी, तो ट्यूशन छूट जायेगा.
नितीश कुमार
बाइक या स्कूटी से स्कूल आना गलत है. इसके लिए माता-पिता को विकल्प तलाशना चाहिए. अगर कोई विद्यार्थी बहाना बनाकर बाइक या स्कूटी की मांग करता है, तो माता-पिता उसे ऑटो से भेंजे. ट्रैफिक पुलिस अगर सख्ती करे, तो विद्यार्थी बाइक व स्कूटी से स्कूल या ट्यूशन आना-जाना नहीं करेंगे.
शिवम कुमार
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