पावर प्लांट लगाने पर 35 % बिजली राज्य को देनी होगी
Updated at : 10 Aug 2018 7:50 AM (IST)
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सुनील चौधरी ऊर्जा नीति 2018 का ड्राफ्ट जारी, 45 से 60 दिनों में दे दिये जायेंगे सभी क्लीयरेंस रांची : झारखंड में नया पावर प्लांट लगाने पर कुल उत्पादित बिजली का 35 प्रतिशत झारखंड सरकार को देना होगा. पहले यह 25 प्रतिशत था. सरकार ने यह प्रावधान नयी ऊर्जा नीति 2018 में किया है. इसका […]
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सुनील चौधरी
ऊर्जा नीति 2018 का ड्राफ्ट जारी, 45 से 60 दिनों में दे दिये जायेंगे सभी क्लीयरेंस
रांची : झारखंड में नया पावर प्लांट लगाने पर कुल उत्पादित बिजली का 35 प्रतिशत झारखंड सरकार को देना होगा. पहले यह 25 प्रतिशत था. सरकार ने यह प्रावधान नयी ऊर्जा नीति 2018 में किया है. इसका प्रारूप तैयार कर लिया गया है.
लोगों से इस पर राय मांगी गयी है. नयी नीति में यह प्रावधान किया गया है कि 35 प्रतिशत में से 18.2 प्रतिशत बिजली झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दर पर ली जायेगी. 16.8 प्रतिशत बिजली वेरिएबल कॉस्ट पर ली जायेगी. यह प्रावधान सरकार द्वारा कोल लिंकेज दिये जाने पर लागू होगा. कोल लिंकेज उपलब्ध नहीं कराये जाने की स्थिति में 35 प्रतिशत बिजली नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दर पर खरीदी जायेगी.
राज्य में स्थापित पावर प्लांट द्वारा राज्य से बाहर बिजली बेचने पर प्रति यूनिट छह पैसे की दर से इनवायरमेंटल प्रोटेक्शन फंड में जमा किया जायेगा. इस राशि का उपयोग पर्यावरण सुधार के लिए किया जायेगा.
राज्य में पावर प्लांट लगाने के लिए आवेदन दिये जाने पर उसे सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से 45 से 60 दिनों में सभी क्लीयरेंस दे दिये जायेंगे. बर्शर्ते आवेदन के साथ सभी दस्तावेज संलग्न किये गये हों.
राज्य सरकार उद्योगों को जमीन खरीदने पर छूट भी देगी. इसके तहत अगर कोई पावर प्लांट लगाने के लिए रैयती जमीन खरीदी जाती है, तो उसके स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क की शत प्रतिशत राशि राज्य सरकार वापस कर देगी. लेकिन यह सुविधा इंडस्ट्रियल पार्क और इंडस्ट्रियल एरिया की जमीन लीज पर लिये जाने पर नहीं दी जायेगी.
नयी ऊर्जा नीति में राज्य में बिजली ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ाने की बात कही गयी है. इस समय झारखंड में 5705 एमवीए इंटर स्टेट ट्रांसमिशन की क्षमता है. जो 3648 सर्किट किलोमीटर है. सरकार बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही क्षमता विस्तार करना चाहती है.
इसके लिए नये ग्रिड सबस्टेशन और लाइन बिछाये जायेंगे. इसके तहत 75 नये ग्रिड सब स्टेशन बनाये जायेंगे जिसकी क्षमता 21400 एमवीए की होगी और 11484 सर्किट किमी लाइन बिछाये जायेंगे. ये सारे काम 2019 तक कर लिये जायेंगे. सरकार द्वारा इस क्षेत्र में निजी कंपनियों को भी लाने की योजना बनायी गयी है.
वितरण नेटवर्क के बाबत जिक्र किया गया है कि वर्तमान में एक लाख 36844.82 सर्किट किमी लाइन है. जिसकी क्षमता 4026.65 एमवीए है. राज्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्ष 2019 तक 1.36 लाख वितरण ट्रांसफाॅर्मर और 51788 सर्किट किमी लाइन बिछाये जायेंगे.
गांवों में जले हुए ट्रांसफाॅर्मर को बदलने के लिए ज्योति मिशन आरंभ किया गया है. ऊर्जा नीति में 15 प्रतिशत एटीएंडसी लॉस करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. साथ ही 24 घंटे सातों दिन बिजली देने का लक्ष्य है. ग्राहकों को बेहतर सर्विस देने के लिए स्मार्ट मीटर, प्रीपेड मीटर, नेट मीटरिंग, स्मार्ट ग्रिड, स्काडा और इलेक्ट्रॉनिक्स व्हीकल जैसे नयी तकनीक का इस्तेमाल किया जायेगा.
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