रांची : लोन वसूली का हुआ केस, तो व्यापारी ने बैंक पर ठोका मुकदमा

Updated at : 08 Aug 2018 9:45 AM (IST)
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रांची : लोन वसूली का हुआ केस, तो व्यापारी ने बैंक पर ठोका मुकदमा

रांची : अपर बाजार के श्रद्धानंद रोड महावीर चौक निवासी नारायण चौधरी पर जब बैंक ने लोन वसूली के लिए डीआरटी कोर्ट रांची में केस दर्ज कराया, तब व्यवसायी ने भी बैंक अधिकारियों के खिलाफ कोतवाली थाना में धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज करा दिया. अब तहकीकात में पुलिस ने व्यवसायी द्वारा लगाये गये […]

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रांची : अपर बाजार के श्रद्धानंद रोड महावीर चौक निवासी नारायण चौधरी पर जब बैंक ने लोन वसूली के लिए डीआरटी कोर्ट रांची में केस दर्ज कराया, तब व्यवसायी ने भी बैंक अधिकारियों के खिलाफ कोतवाली थाना में धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज करा दिया.
अब तहकीकात में पुलिस ने व्यवसायी द्वारा लगाये गये आरोप को सही नहीं पाया है. इस बात की पुष्टि सिटी एसपी की जांच रिपोर्ट से होती है. सिटी एसपी की जांच रिपोर्ट के अनुसार केस नारायण चौधरी की शिकायत पर पूर्व में कोतवाली थाना में दर्ज की गयी थी. इसमें प्राथमिक अभियुक्त सीए अनीश अग्रवाल, उनकी पत्नी सोनिया अग्रवाल, बैंक ऑफ इंडिया, मेन रोड के पूर्व एजीएम अनिल कुमार, वर्तमान एजीएम अमीन उल्लाह, पूर्व जोनल मैनेजर शंकर प्रसाद के अलावा अभिषेक अग्रवाल (फर्जी कंपनी के मालिक) और अमित सरावगी सहित अन्य को आरोपी बनाया गया था.
कोतवाली डीएसपी भोला प्रसाद ने इस केस में सुपरविजन रिपोर्ट जारी किया था. जिसमें जांच के बाद अभियुक्तों पर कार्रवाई का निर्णय लेने पर विचार किया गया था. रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि अनुसंधान के दौरान ऐसे कोई तथ्य नहीं मिले, जिसके आधार पर इस बात की पुष्टि हो कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता को लोभ या उत्प्रेरित या धोखाधड़ी कर लोन दिलवाया, ताकि उसका निवेश विभिन्न फर्मों में किया जा सके.
शिकायतकर्ता ने अपनी कंपनी में भी लोन का हस्तांतरण किया है. अनुसंधान के दौरान अनुसंधानक ने सहायक प्रबंधक और मुख्य प्रबंधक से भी पूछताछ की थी. इससे पता चला कि शिकायतकर्ता ने अपने लेटर पैड पर 80 लाख रुपये लोन के लिए आवेदन 19 सितंबर 2013 को दिया था.
अनुसंधानक द्वारा ट्रांजेक्शन से संबंधी विवरण भी प्राप्त किया गया. जिससे पुष्टि हुई कि ट्रांजेक्शन वादी के एकाउंट से हुई थी. इसकी जानकारी पूर्णत: वादी को थी. जांच में यह भी बात सामने आयी कि शिकायतकर्ता ने अपने पुत्र हरि चौधरी और एवं अपनी पत्नी के खाते में भी रुपये ट्रांसफर किया था. शिकायकर्ता द्वारा लोन का पैसा नहीं जमा करने के कारण एकाउंट एनपीए हो गया था. शिकायतकर्ता की पत्नी द्वारा भी दूसरे बैंक से लोन लिया गया था.
लेकिन लोन के एवज में कोई रुपये जमा नहीं करने के कारण उनका एकाउंट भी एनपीए हो गया. यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया ने भी शिकायतकर्ता की पत्नी पर डीआरटी कोर्ट रांची में केस किया था. सिटी एसपी की रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता और उनकी पत्नी के फर्म क्रमश: हरि फर्निशिंग और चौधरी टेक्सटाइल दोनों फर्म की लीज एक ही दुकान है. इसका निष्पादन भी एक ही तिथि पांच सितंबर 2012 को किया गया है.
सिटी एसपी ने बैंक अधिकारियों सहित अन्य को दी क्लीन चिट
व्यापार बंद होने की बात कहकर व्यवसायी ने बैंक ऑफ इंडिया को लोन चुकाना बंद किया, वहीं पंजाब नेशनल बैंक से दूसरी कंपनी के नाम पर कर रहा था व्यवसाय
हरि फर्निशिंग फर्म की जांच करने पर पुलिस ने पाया कि इसका खाता पंजाब नेशनल बैंक से संचालित है. जिसमें बड़ी रकम का लेन-देन आज भी हो रहा है. पंजाब बैंक के मुख्य प्रबंधक ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि शिकायतकर्ता ने अपने खाता से ललिता चौधरी के खाता में 13 अक्तूबर 2017 को 75 हजार रुपये ट्रांसफर किया है.
सिटी एसपी की जांच रिपोर्ट में कोतवाली डीएसपी की रिपोर्ट का उल्लेख है. इसमें इस बात का भी उल्लेख है कि लोन एकाउंट जो वर्ष 2013 में खुला था, वह 2015 में व्यापार बंद होने की बात कह कर बंद कर दिया गया था.
परंतु इसकी आड़ में वर्ष 2012 में पंजाब नेशनल बैंक में जो एकाउंट खोला गया था, उसके जरिये बैंक ऑफ इंडिया से तथ्य छिपा कर व्यापार किया जा रहा था. बैंक द्वारा जब डीआरटी कोर्ट में पैसा वसूली के लिए केस दर्ज कराया गया, तब शिकायतकर्ता ने कोतवाली थाना में केस दर्ज करा दिया. शिकायतकर्ता ने व्यापार बंद होने की बात कह कर बैंक ऑफ इंडिया की देनदारी बंद कर दी थी और हरि फर्निशिंग के नाम से पंजाब नेशनल बैंक के जरिये व्यवसाय कर रहा था. कोतवाली डीएसपी ने केस में प्राथमिकी के आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य की कमी दिखाते हुए फाइनल रिपोर्ट न्यायालय में सौंपने का निर्देश अनुसंधानक को दिया था. इस पर सिटी एसपी ने भी अपनी सहमति जतायी और मामले में आरोपी बैंक के अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी.
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