Jharkhand : बच्चा बेचने वाले और कितने गिरोह!
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Jul 2018 2:40 PM
रांची : रांची में मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम के संचालक द्वारा बिनब्याही मां के बच्चों को बेचने का मामला उजागर होने के बाद आश्रयणी फाउंडेशन की आर्य मोनिका ने कहा है कि झारखंड में भी ऐसा गिरोह सक्रिय हो सकता है, जो नवजात की हत्या करने में शामिल हो. पा-लो-ना की पा-लो-ना की संस्थापक आर्य […]
रांची : रांची में मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम के संचालक द्वारा बिनब्याही मां के बच्चों को बेचने का मामला उजागर होने के बाद आश्रयणी फाउंडेशन की आर्य मोनिका ने कहा है कि झारखंड में भी ऐसा गिरोह सक्रिय हो सकता है, जो नवजात की हत्या करने में शामिल हो. पा-लो-ना की पा-लो-ना की संस्थापक आर्य मोनिका ने कहा है कि शिशुओं की तस्करी का मामला शिशु परित्याग और शिशु हत्या से भी जुड़ी है. इसलिए ऐसा हो सकता है कि झारखंड में भी ऐसा गिरोह सक्रिय हो, जो नवजात का खरीदार नहीं मिलने पर उनकी (नवजात की) पत्थर से दबाकर बेरहमी से हत्या कर देता है.
आर्य मोनिका ने कहा है कि बड़े पैमाने पर देश भर में ऐसे मामले होते हैं, लेकिन मीडिया में इसे अंडरप्ले किया जाता है. उन्होंने कहा कि आंध्रप्रदेश में हुए एक स्टिंग में शिशु तस्कर ने स्वीकार किया था कि जिन बच्चों के लिए खरीदार नहीं मिल पाते हैं, या जिन शिशुओं का सौदा पक्का नहीं हो पाता है, रेट को लेकर विवाद होता है, वे उन्हें गड्ढा खोदकर शिशु को उसमें रखकर ऊपर से भारी पत्थर रख देते हैं. इससे बच्चे की मौत हो जाती है.
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आर्य मोनिका ने कहा है कि रांची के इस केस की गहनता से जांच होनी चाहिए. यदि इस मामले की गहन जांच हो जाये, तो ऐसे ही किसी गिरोह का यहां भी खुलासा हो सकता है. उन्होंने सवाल किया है कि सदर अस्पताल में इसी संस्था की लड़की के बच्चे की मौत की जो खबर आयी है, उस शिशु का क्या हुआ. उसे कहां दफनाया गया. उन्होंने कहा है कि पुलिस और बाल कल्याण केंद्र (CWC) इस मामले को गंभीरता से ले और ऐसे अन्य गिरोहों को उजागर कर उन्हें सलाखों के पीछे धकेले.
रांची में इस गिरोह के सामने आने के बाद आर्य मोनिका ने कई ज्वलंत सवाल खड़े किये हैं. उन्होंने कहा हैकि बच्चे मृत मिलते रहते हैं,लेकिन कोई जांच करने की जहमत नहीं उठाता. जैसे ही पैसे के लेन-देन का मामला आता है, सब सक्रिय हो जाते हैं.उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है, हमारी संवेदनाएं पैसे पर ही टिकी होती हैं. ऐसा नहीं होता, तो क्या इस मामले का उद्भेदन पहले नहीं हो सकता था, क्योंकि शक तो बहुत पहले से था, इस संस्था पर. कुछ चाइल्ड एक्टिविस्ट इस संस्था पर सवाल उठाते रहे हैं. क्यों इंतजार किया गया कि पीड़ित खुद संस्था के पास पहुंचे और गुहार लगाये.’
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CWC और रांची पुलिस की सक्रियता पर उन्होंने संतोष जाहिर करते हुए कहा है कि अब भी सरकार और प्रशासन को जाग जाना चाहिए. जो परित्यक्त और मृत शिशु मिल रहे हैं, उनके बारे में चिंता करें. उन्होंने कहा कि जांच का काम किसी संस्था का नहीं है. संस्थाएं समस्या से सरकार और प्रशासन को रू-ब-रू करा सकती हैं, उसका समाधान करना सरकार और प्रशासन का ही है.
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