पारा टीचर हत्याकांड: पूर्व मंत्री एनोस एक्का को आजीवन कारावास, विधानसभा की सदस्यता रद्द

Updated at : 03 Jul 2018 2:01 PM (IST)
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पारा टीचर हत्याकांड: पूर्व मंत्री एनोस एक्का को आजीवन कारावास, विधानसभा की सदस्यता  रद्द

रांची/सिमडेगा : पारा टीचर हत्याकांड में पूर्व मंत्री और विधायक एनोस एक्का को आज मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उनपर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. आपको बता दें कि बीते शनिवार को एनोस एक्का सहित तीन को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरज […]

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रांची/सिमडेगा : पारा टीचर हत्याकांड में पूर्व मंत्री और विधायक एनोस एक्का को आज मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उनपर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. आपको बता दें कि बीते शनिवार को एनोस एक्का सहित तीन को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दोषी करार दिया है. अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए तीन जुलाई की तिथि निर्धारित की थी.

कोर्ट ने कोलेबिरा विधायक एनोस एक्का को धारा 302, 120 बी, 201 और 171 एफ के तहत दोषी माना था. इस सजा के साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है. पारा शिक्षक मनोज कुमार की हत्या नवंबर 2014 में हुई थी. हत्या के आरोप में गिरफ्तार एनोस एक्का रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंद हैं.

क्या है मामला
26 नवंबर 2014 को सिमडेगा जिले के जताडांड़ प्राथमिक विद्यालय से पारा टीचर मनोज कुमार का अपहरण कर लिया गया था. इस मामले में विधायक एनोस एक्का के खिलाफ प्राथमिकी ( 58/2014)दर्ज करायी गयी थी. दूसरे दिन सुबह मनोज कुमार की लाश मिलने के बाद मामला हत्याकांड में बदल गया. पुलिस ने पहले से पीएलएफआइ उग्रवादी बारूद गोप का मोबाइल फोन सर्विलांस पर रखा था. इस फोन पर हुई बातचीत के आधार पर पुलिस ने जांच के बाद विधायक एनोस एक्का और बारूद गोप के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया. इसमें यह आरोप लगाया गया था कि विधायक के कहने पर बारूद गोप ने मनोज कुमार की हत्या की. घटना को अंजाम देने से पहले उग्रवादी धनेश्वर बड़ाइक ने रेकी की थी. शिक्षक की हत्या के आरोप में तत्कालीन एसपी राजीव रंजन सिंह ने रात दो बजे एनोस एक्का को ठाकुरटोली स्थित घर से गिरफ्तार किया था. 27 नवंबर 2014 की शाम को श्री एक्का को जेल भेज दिया था. इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 30 जून की तिथि तय की थी.

तत्कालीन सीएम से लगायी थी सुरक्षा की गुहार
हत्या से पहले मनोज कुमार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ज्ञापन सौंप कर सुरक्षा की गुहार लगायी थी. हालांकि उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी.

कौन थे मनोज कुमार

26 नवंबर 2014 को सिमडेगा के शाहपुर प्रखंड संघर्ष समिति और कोलेबिरा प्रखंड पारा शिक्षक संघ के अध्यक्ष मनोज कुमार की हत्या कर दी गयी थी. वह लसिया गांव के रहनेवाले थे. मृत पारा शिक्षक मनोज कुमार के भाई ने कोलेबिरा थाने में एनोस एक्का व पीएलएफआइ के एरिया कमांडर बारूद गोप सहित अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी. इसके पहले वे एनोस एक्का की पार्टी के सक्रिय सदस्य थे. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एनोस का साथ छोड़ दिया था. एक दिन वे अपने सहयोगी पारा शिक्षक संजू नायक के साथ स्कूल में बैठे थे, तभी बाइक से दो हथियारबंद अपराधी आये और जबरन मनोज कुमार को उठाकर ले गये. बाद में उनका शव मिला था.

इस साल दो विधायकों की गयी सदस्यता
कोयला चोरी के आरोप में तीन साल की सजा सुनाये जाने पर 10 फरवरी को गोमिया के झामुमो विधायक योगेंद्र महतो की सदस्यता गयी जबकि सीओ के साथ मारपीट के मामले में दो साल की सजा सुनाये जाने के बाद दो अप्रैल को सिल्ली के झामुमो विधायक अमित कुमार महतो की सदस्यता रद्द कर दी गयी थी.

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