रांची : एसटी सूची में शामिल समुदाय को आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता : ईसाई महासंघ
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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राष्ट्रपति से राष्ट्रीय ईसाई महासंघ ने राज्य सरकार को बरखास्त करने की मांग की भूमि अधिग्रहण के मामले में आदिवासी एकता को तोड़ने का हो रहा है षड्यंत्र रांची : राष्ट्रीय ईसाई महासंघ ने राज्य सरकार के ईसाई आदिवासियों को आरक्षण से वंचित करने की घोषणा पर सवाल उठाया है़ मंगलवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभाकर […]
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राष्ट्रपति से राष्ट्रीय ईसाई महासंघ ने राज्य सरकार को बरखास्त करने की मांग की
भूमि अधिग्रहण के मामले में आदिवासी एकता को तोड़ने का हो रहा है षड्यंत्र
रांची : राष्ट्रीय ईसाई महासंघ ने राज्य सरकार के ईसाई आदिवासियों को आरक्षण से वंचित करने की घोषणा पर सवाल उठाया है़ मंगलवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभाकर तिर्की ने जीईएल मिशन कंपाउंड स्थित कार्यालय में कहा कि ईसाई आदिवासी केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में हैं और इसके आधार पर संविधान के तहत उनके लिए केंद्र व राज्य सरकार की नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया गया है़
किसी भी समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने या हटाने का अधिकार संविधान के तहत राष्ट्रपति को दिया गया है़ जब तक राज्य का कोई भी समुदाय अजजा सूची में शामिल है, उसे आरक्षण या जाति प्रमाण पत्र से वंचित नहीं किया जा सकता़ फिर भी यदि राज्य सरकार ऐसा करती है, तो यह असंवैधानिक होगा़
इस मामले में पहले भी झारखंड उच्च न्यायालय व सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्णय दिया है कि धर्म बदलने से आदिवासियत में परिवर्तन नहीं होता़
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण के मामले में आदिवासी एकता को तोड़ने का षड्यंत्र रच रही है़ इसलिए धर्म के नाम पर आदिवासियों को बांटने की कोशिशें की जा रही हैं. इस संबंध में महासंघ राज्यपाल को ज्ञापन देगा़ राष्ट्रपति से मिल कर राज्य के असंवैधानिक कार्यों के बारे में भी बतायेगा़ राष्ट्रपति राज्य सरकार को इस कुकृत्य के लिए अविलंब बर्खास्त करे़ इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष दीपक तिर्की, विमल जॉन खेस, विनय केरकेट्टा, ऑल्विन लकड़ा, सूरज केरकेट्टा व अन्य मौजूद थे़
धर्म नहीं बदलने वालों को मिले आरक्षण : प्रतुल
रांची : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि आदि काल से अपनी परंपरा की रक्षा करनेवाले उन जनजाति समूह के हित में बड़ा फैसला लिया जाना चाहिए, जिसने डर ,लोभ और लालच के बावजूद भी अपने धर्म को नहीं बदला़ विकास की दौड़ में यही तबका पीछे रह गया. वहीं धर्मांतरण करने वाले जनजातीय समूह ने आरक्षण का ज्यादातर लाभ उठा लिया. झारखंड की 22 प्रतिशत आबादी आज भी अपनी परंपराओं को जीवित रखी हुई है़
राज्य सरकार से आग्रह है कि कानून में ऐसे प्रावधान किये जायें, जिससे जनजातीय समूह को मिलनेवाले आरक्षण का शत-प्रतिशत लाभ उन समूहों को मिले़ उन्होंने राज्य सरकार से यह भी आग्रह किया कि पत्थलगड़ी को गलत तरीके से परिभाषित करके समाज में अराजकता फैलानेवाले देशद्रोहियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे़ं
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