रांची : हड़ताल खत्म होने तक रहा अफरातफरी का माहौल, तड़पते रहे मरीज, डॉक्टर और नर्स को ढूंढ़ते रहे परिजन

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
रिम्स में नर्सों और जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म होने तक रहा अफरातफरी का माहौल
रिम्स में नर्सों और जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के दूसरे दिन रविवार को स्थिति और बिगड़ गयी थी. सीनियर डॉक्टरों की कम संख्या, नर्सों व जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बीच मरीजों कि बिगड़ती स्थिति से परिजन बौखला गये थे.
दर्द से कराह रहे मरीजों को देखकर वह कभी डॉक्टर को, तो कभी नर्स को ढूढ़ रहे थे. परिजनों के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने मेडिकल चौक को जाम किया. परिजनों ने दिनभर में करीब चार बार मेडिकल चौक को जाम कराने का प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस बल की भारी संख्या के कारण वह सफल नहीं हो पाये.
रांची : रिम्स में शनिवार से शुरू हुई नर्सों और जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल ने रविवार को भयावह रूप ले लिया. महत्वपूर्ण वार्डों में मरीजों को रविवार की सुबह भी दवा नहीं मिल पायीं. सूई-दवा नहीं मिलने के कारण मरीजों के परिजनों में काफी आक्रोश था.
मरीज के परिजन डॉक्टर व नर्स को खोजने में असफल होने के बाद निदेशक व अधीक्षक के पास पहुंचे. अधिकारियों के नहीं मिलने पर वह इमरजेंसी के सामने बैठ गये. निदेशक के आने पर उनसे अपनी पीड़ा बतायी.
परिजनों की गुहार पर निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव, उप-निदेशक गिरिजाशंकर प्रसाद व अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप कुछ सीनियर डॉक्टर के साथ उन वार्डों में गये, जहां के परिजनों ने सूई-दवा नहीं मिलने की शिकायत की थी. मेट्रॉन मरीजों के मेडिसिन चार्ट के हिसाब से सूई और दवाएं दीं. इधर, इमरजेंसी के सामने जूनियर डॉक्टरों ने एक बेड व पारा मेडिकल स्टाफ काे काम पर लगा दिया था.
वहां ब्लड प्रेशर मापने की मशीन और कुछ दवाएं थीं. हालांकि, वहां किसी मरीज को परामर्श नहीं मिला. इसके अलावा रिम्स इमरजेंसी के बाहर झामुमो सहित कई दल व संगठन के लोग मरीजों के साथ हड़ताल का विरोध कर रहे थे. इधर, चर्चा यह भी थी कि हड़ताल के पीछे यहीं के एक सेवानिवृत्त अधिकारी का हाथ है.
न्यूरो, बर्न व हड्डी के मरीज दिखे असहाय
दो दिनों की हड़ताल में रिम्स के विभिन्न विभागों से मरीजों को पलायन हो रहा था. लेकिन, न्यूरो, बर्न, हड्डी विभाग में भर्ती मरीज बेबस थे. मरीज के परिजनों का कहना था कि वह असहाय है, नहीं तो वह भी अपने मरीज को ऐसी स्थिति में अन्य अस्पताल ले जाते. न्यूरो विभाग में अधिकांश मरीज बेहोश थे.
इनमें से कई वेंटिलेटर पर थे. वहीं, हड्डी विभाग में किसी का ऑपरेशन हुआ था, तो किसी के हाथ-पैर में प्लास्टर चढ़ा हुआ था. वह किसी अनहोनी में भी बाहर नहीं निकल सकते थे. बर्न वार्ड में कोई 50 तो काई 70 फीसदी झुलसा हुआ था. ऐसे में उनके कहीं और जाने का सवाल ही पैदा नहीं हो रहा था. उनके परिजन भी बेबस नजर आ रहे थे.
कुछ को अंत तक था रिम्स पर विश्वास
रिम्स में भर्ती मरीजों को हड़ताल के बाद की अव्यवस्था के बाद भी रिम्स पर विश्वास था. रिम्स के आइसीयू में भर्ती एक महिला मरीज व उसके परिजन यही कह रहे थे कि उनको रिम्स पर विश्वास है. कई बार बीमार होने के बाद हम यही ठीक होकर गये हैं. इसलिए कुछ कमी को हम बर्दाश्त कर लेंगे.
कांग्रेस नेताओं ने स्वास्थ्य मंत्री को घेरा
रिम्स में मरीजों की हुई मौत को लेकर प्रदेश कांग्रेस के नेता विनय सिन्हा दीपू के नेतृत्व में स्वास्थ्य मंत्री का घेराव किया गया. साथ ही रिम्स की व्यवस्था को सुधारने व मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की गयी. घेराव कार्यक्रम में रामाकांत आनंद, बबलू शुक्ला, हैदर खान, कलीमुद्दीन, राजेश, राजू राम समेत कई कार्यकर्ता शामिल थे.
बरियातू थाने में दो प्राथमिकी दर्ज
हड़ताल खत्म होने के बाद रिम्स में शुक्रवार रात हुई मारपीट के मामले में दो प्राथमिकी बरियातू थाने में दर्ज करायी गयी हैं. मृतक की बेटी ऋचा कुमारी ने भी रिम्स की दो नर्सों मनोरंजनी बाखला व सुधा कुमारी सिन्हा और एक डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है.
ऋचा ने आरोप लगाया है कि गलत इंजेक्शन देने के कारण उसकी मां की मौत हुई. ऋचा कुमारी ने कहा है कि वह डॉक्टर को देख कर पहचान जायेगी. नर्सों की ओर से रिम्स जूनियर नर्स एसोसिएशन की सचिव आइवी रानी खलखो ने प्राथमिकी दर्ज करायी है. जिसमें उन्होंने लिखा है कि मरीज की मौत के बाद 10 लड़के आये और नर्सों के साथ मारपीट की अोर खिड़की का शीशा तोड़ दिया.
गरीब आदमी इलाज कराने कहां जाये : प्रमोद
रांची : डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होते हैं, लेकिन यहां तो डॉक्टर ही मरीजों की जान लेने पर तुले हैं. यह कहना है चतरा के ब्रहमना निवासी प्रमोद भुइंया का. उसकी पत्नी अकली देवी बीते एक सप्ताह से रिम्स की सर्जरी आइसीयू में भर्ती है. प्रमोद ने कहा : मेरी पत्नी के पेट में असहनीय दर्द हो रहा है.
डॉक्टर आैर नर्स हड़ताल पर हैं, इसलिए उसे कोई देखने नहीं आ रहा है. प्रमोद कहता है : साहब! मैं गरीब आदमी हूं. चतरा में ठीक से इलाज नहीं हो रहा था. लोगों के कहने पर पत्नी को लेकर रांची आ गया. गरीब लोग रिम्स को इलाज का मंदिर समझते हैं, लेकिन यहां भी इलाज नहीं होगा, तो गरीब आदमी कहां जायेगा?
बाहर से नर्स बुलाकर करा रहे हैं मरीज की देखभाल : सुबोध
रांची : रिम्स के न्यूरो सर्जरी की आइसीसीयू में भर्ती ओमप्रकाश चौधरी को ब्रेन हैमरेज हुआ है. उनके भाई सुबोध चौधरी ने बताया कि नर्सों की हड़ताल के कारण उन्होंने ट्रेंड नर्स रख लिया है.
सुबोध चौधरी ने बताया कि हड़ताल के बावजूद डॉक्टर उनके मरीज के लिए काफी मेहनत कर रहे हैं. स्थिति गंभीर होने के कारण दो-दो डॉक्टर लगे हुए हैं. उन्होंने बताया कि एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर आनंद प्रकाश काफी मेहनत कर रहे हैं. उनके साथी डॉक्टर भी उनका साथ दे रहे हैं. हर तरह की जांच करा ली गयी है. दवा भी शुरू हो गयी है.
काश! मेरे पास पैसे होते, तो बेटे को अच्छे अस्पताल में ले जाता
रांची. पाकुड़ निवासी भागीरथ प्रसाद भगत का 25 वर्षीय बेटा रामचंद्र भगत 24 मई से ही रिम्स में भर्ती है. उसके दोनों पैर टूट गये हैं. कमर के नीचे का पूरा हिस्सा बेकार हो गया है. रविवार को हड़ताल का दूसरा दिन था और इधर, रामचंद्र की हालत बिगड़ती जा रही थी. आंखों में अांसू लिये भागीरथ प्रसाद कहते हैं : यहां भर्ती कराये हुए 10 दिन बीत चुके हैं. डॉक्टर कह रहे हैं कि बेटे को दूसरे अस्पताल में ले जायें. काश! मेरे पास भी पैसे होते, तो मैं भी अपने बेटे को किसी अच्छे अस्पताल में इलाज कराने के लिए ले जाता.
रांची. धनबाद निवासी इरफान एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था. उसे 31 मई को रिम्स के सर्जरी विभाग की आइसीयू में भर्ती कराया गया था. उसकी पत्नी ने बताया कि शुक्रवार को पानी चढ़ाया गया था. उसके बाद से कोई इलाज नहीं हुआ. उसने पत्रकारों से ही गुहार लगायी : साहब! हमलोग बहुत गरीब हैं. यहां इलाज ठीक से नहीं हो रहा है. अाप ही लोग हमें किसी अच्छे अस्पताल में भर्ती करवा दें. जब उसे पता चला की सवाल करने वाले पत्रकार हैं, तो वह थोड़ी मायूस हुई. फिर भी उसने कहा : आप लोग ही अफसरों से बात कर हड़ताल जल्दी खत्म करा दें.
मरीजों की हालत थी खराब, परिजन ही दे रहे थे दवा
रांची. हड़ताल की वजह से दूसरे दिन रविवार को भी विभिन्न यूनिटों में भर्ती मरीज परेशान रहे. समय पर दवा और सूई नहीं मिलने से मरीज कराह रहे थे. स्थिति यह थी कि मरीजों के परिजन ही किसी तरह दवा दे रहे थे. सबसे ज्यादा परेशानी ऑक्सीजन वाले मरीजों को हो रही थी. कोई 10 दिनों से भर्ती है, तो कोई दो माह से. मजबूरी में वे कहीं दूसरी जगह जा नहीं पा रहे थे.
ऐसे थे हालत
सर्जरी की आइसीयू में मरीज सुमित कुमार लगभग दो माह से भर्ती है. सुमित की मां रिंकू देवी ने बताया कि बच्चे को खाना नहीं पच रहा है. दर्द और बुखार से काफी परेशान है. किसी तरह खुद से ही दवा दे रही हूं. बेटे का दर्द सहा नहीं जा रहा है. धनबाद के तोपचांची से आये तिलक महतो 22 मई से न्यूरो सर्जरी के आइसीयू में भर्ती हैं.
वे दुर्घटना में घायल हो गये थे. परिजन खुद ही मरीज के मुंह में राइस ट्यूब लगाने का प्रयास कर रहे थे, ताकि कुछ खिलाया जा सके. मरीज की हालत काफी खराब थी. इसी तरह अब्दुल समद मेडिसिन की आइसीयू में 16 दिनों से भर्ती है. उनके बेटे फिरोज ने बताया कि पिता किडनी प्रॉब्लम और ब्रेन पैरालाइसिस की समस्या से जूझ रहे हैं. कोई देखने वाला नहीं है. चार्ट देख कर पिता को दवा खिला रहे हैं. बेडशीट पूरी तरह से गीली हो गयी है. इसे बदला भी नहीं जा रहा है.
हड़ताल के कारण मरीज की छुट्टी करा ली : नरेंद्र
रांची : हड़ताल के कारण रविवार को कई मरीजों को उनके परिजन निजी अस्पताल में ले गये. जबकि कई मरीज छुट्टी करा कर घर चले गये. 80 वर्षीय पार्वती देवी इन्हीं मरीजों में शामिल थीं. उनके पुत्र नरेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि मां को कुछ दिन पहले ही रिम्स में भर्ती कराया था. फिलहाल वे मां कुछ हद तक ठीक हैं. हड़ताल के कारण चिकित्सकों ने कहा कि सेवा नहीं पायेगी, इसलिए अभी अपने मरीज को घर ले जाइये. जब हालात सामान्य हो जायेंगे, तो दिखाने आ जाइगा.
निदेशक से भिड़े झामुमो नेता, कहा : निदेशक ने मरीजों के परिजन को ठेंगा दिखाया
इमरजेंसी के सामने विरोध कर रहे परिजनों में शामिल झामुमो नेता अंतू तिर्की व रिम्स निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव कई बार झड़प हुई. अंतू तिर्की ने बताया कि गुहार कर रहे मरीजों के परिजनाें को निदेशक ने अंगूठा दिखाय. यह उन्हें शोभा नहीं देता है. जब मीडिया कर्मियों ने मंत्री से निदेशक के व्यवहार के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि यह उनके बॉडी लैग्वेंज में शामिल है. अाप अपना नजरिया बदलिये.
एबीवीपी कार्यकर्ताओं और पुलिस में हुई झड़प
रिम्स में स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी व मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी रिम्स में हड़ताल समाप्त करने के लिए रिम्स पहुंचे थे. स्वास्थ्य मंत्री के पहुंचते ही एबीवीपी के कार्यकर्ता नारेबाजी करने लगे. वह मंत्री के रिम्स कार्यालय तक पहुंचना चाहते थे, लेकिन पुलिस कर्मियों ने उन्हें धकियाते हुए बाहर कर दिया.
Share Via :
Published Date
Comments (0)
metype

संबंधित खबरें

अन्य खबरें