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जांच-परख कर मकान खरीदें, नहीं तो करना होगा बकाये बिल का भुगतान

रांची : पानी बिल में गड़बड़ी व उससे जुड़ी शिकायतों को दूर करने के लिए शनिवार को नगर आयुक्त शांतनु अग्रहरि की अध्यक्षता में वेभर कमेटी की बैठक हुई. इस कमेटी का गठन नगर निगम द्वारा भेजे जा रहे गलत पानी बिल के मामले को दूर करने के लिए किया गया है. बैठक में नगर […]

रांची : पानी बिल में गड़बड़ी व उससे जुड़ी शिकायतों को दूर करने के लिए शनिवार को नगर आयुक्त शांतनु अग्रहरि की अध्यक्षता में वेभर कमेटी की बैठक हुई. इस कमेटी का गठन नगर निगम द्वारा भेजे जा रहे गलत पानी बिल के मामले को दूर करने के लिए किया गया है. बैठक में नगर आयुक्त ने 30 शिकायतें सुनीं.

उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी मुहल्ले में मकान खरीद रहा है, तो वह मकान के होल्डिंग नंबर के माध्यम से निगम में जांच कर ले कि उक्त भवन पर निगम का किसी प्रकार का कोई बकाया तो नहीं है. अगर बिना जांच-पड़ताल के ऐसे मकान को खरीदते हैं और उस पर निगम का लाखों का पानी का बिल बकाया पाया जाता है, तो इसे नये खरीदार से ही वसूला जायेगा. बैठक में आम सहमति से बिल माफी व सप्लाई वाटर से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिये. बैठक में सहायक कार्यपालक पदाधिकारी, जल बोर्ड के प्रभारी, सिटी मैनेजर मृत्युंजय कुमार, कार्यपालक अभियंता आदि थे.
नगर आयुक्त ने वेभर कमेटी के साथ की बैठक
जिन लोगों ने वाटर कनेक्शन ले रखा है, लेकिन उनके यहां पानी नहीं आ रहा है या कम आ रहा है, इसके बावजूद उन्हें निगम ने बिल भेजा है. वैसे उपभोक्ताओं को नया मीटर लगाना होगा. मीटर लगाने के एक महीना बाद अगर उपभोक्ता के यहां पानी की आपूर्ति नहीं आयी, तो मीटर की जांच कर उसका बिल निगम माफ कर देगा. इसके अलावा जिनके यहां कनेक्शन है, लेकिन पानी सप्लाइ कम आया और उन्हें यूजर चार्ज उपयोग से ज्यादा आ गया, तो निगम एक महीने बाद मीटर की जांच करेगा. उदाहरण के तौर पर उपभोक्ता ने अगर पांच हजार लीटर पानी का इस्तेमाल किया, तो निगम पांच हजार लीटर प्रतिमाह पानी की खपत को औसत मान कर भवन मालिक से पैसे वसूलेगा.
जिन उपभोक्ताओं ने बिना कनेक्शन के बिल भेजने की शिकायत की थी. उन्होंने कभी निगम से कनेक्शन लिया है या नहीं इसकी जांच निगम के 1956-1958 वर्ष के कनेक्शन रजिस्टर से किया जायेगा. अगर रजिस्टर में वाटर कनेक्शन लेने के कोई सबूत मिले, तो उन्हें बिल में किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी. ज्ञात हो कि 1956-1958 के दौरान निगम में सात वार्ड हुआ करते थे.
वेभर कमेटी में कुछ शिकायतें अपार्टमेंट में रहने वाले उपभोक्ताओं से मिली थी. इसमें निगम को पानी का बिल अपार्टमेंट या सोसाइटी के सचिव के नाम पर भेजना था, लेकिन वह बिल अपार्टमेंट के किसी एक आदमी के नाम पर भेज दिया गया. इसमें सुधार करते हुए यह निर्णय लिया गया कि अब बिल सोसाइटी के सचिव के नाम से भेजा जायेगा, ताकि अपार्टमेंट में रहने वाले सभी लोग पैसे मिला कर बिल का भुगतान कर सकें.
किसी परिवार में बंटवारा हो गया है, तो बंटवारे के बाद जिसके यहां नल है, उसे बिल का भुगतान करना होगा. वहीं बंटवारे से पहले जिसके नाम से मूल होल्डिंग नंबर होगा, उसे बकाया का भुगतान करना होगा.
Prabhat Khabar Digital Desk
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