खास समुदाय के लोगों को सोशल मीडिया के जरिये भड़काने वाला संगठन देश के लिए बन गया है खतरा, लगेगा बैन

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खास समुदाय के लोगों को सोशल मीडिया के जरिये भड़काने वाला संगठन देश के लिए बन गया है खतरा, लगेगा बैन

प्रणव रांची : पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)को सरकार बैन करने जा रही है. संगठन पर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने का आरोप लगा है. आरोप है कि यह संगठन वीडियो और तकरीर को सोशल मीडिया में प्रसारित कर शासन और प्रशासन के खिलाफ समुदाय विशेष के युवाओं को भड़का रहा है. इससे पाकुड़ समेत पूरे देश […]

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प्रणव

रांची : पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)को सरकार बैन करने जा रही है. संगठन पर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने का आरोप लगा है. आरोप है कि यह संगठन वीडियो और तकरीर को सोशल मीडिया में प्रसारित कर शासन और प्रशासन के खिलाफ समुदाय विशेष के युवाओं को भड़का रहा है. इससे पाकुड़ समेत पूरे देश में विधि-व्यवस्था की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पाकुड़ के डीसी और एसपी ने PFI को प्रतिबंधित करने की अनुशंसा गृह विभाग के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे से की है. इसकी कॉपी डीजीपी को भी भेजी गयी है.

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पाकुड़ के एसपी शैलेंद्र वर्णवाल ने रिपोर्ट भेजे जाने की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि पांच जुलाई, 2017 को इस संगठन के सदस्योंने पाकुड़ में पुलिस को निशाना बनाया था. इसमें एसडीपीओ और इंस्पेक्टर सहित कई पुलिस अफसर और पत्रकार घायल हुए थे. इसके बाद से PFI के सदस्यों और समर्थकों द्वारा संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है.

पुलिस ने कहा कि यह संगठन पाकुड़ शहर और आसपास के इलाकों में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आॅफ इंडिया के नाम से सोशल मीडिया में लोगों को उत्तेजित करने वाले और भड़काऊ वीडियो क्लिप वायरल करता है. इन सामग्रियों का इस्तेमाल एक खास संप्रदाय के लोगों को भड़काने के लिए किया जाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के स्तर से अगर इस संगठन को प्रतिबंधित नहीं किया गया, तो भविष्य में यह देश के लिए गंंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है.

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पाकुड़ मुफस्सिल थाना को अपग्रेड करने और पिकेट खोलने की मांग : रिपोर्ट में पाकुड़ के मुफस्सिल थाना को अपग्रेड कर इंस्पेक्टर थाना करने की मांग की गयी है. साथ ही यहां पर सशस्त्र बल की एक कंपनी की तत्काल प्रतिनियुक्ति का अाग्रह भी किया गया है. इसके अलावा पाली गांव में पुलिस पिकेट बनाने की मांग की गयी है.

NCHRO ने पाकुड़ में की PFI के साथ मिल कर जांच : पाकुड़ में हुई घटना की जांच के लिए नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO) के सदस्य पाकुड़ आये थे. सदस्यों में दिल्ली के अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव, रांची की स्वाति सिन्हा, साउथ कन्नड़ के मो हनीफ, रामगढ़ केे सुमित सौरभ, बार काउंसिल ऑफ बंगाल के अब्दुल मोमेन हलधर, राजस्थान के अधिवक्ता एतमद हसनैन अजमेर, बीएमसी के जेनरल सेक्रेटरी छोटन दा, भानू सरकार और मो असरार शामिल थे. पाकुड़ के होटल रॉयल रिजेंसी में इन्होंने PFI के सदस्य सह मीडिया प्रभारी शमीम अख्तर के साथ मिलकर जांच कीथी.

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NCHRO के सदस्य देते हैं PFIको कानूनी संरक्षण : जांच में पता चला कि NCHRO के सदस्योंने मामले की एकपक्षीय जांच की. जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की. पुलिस और प्रशासन का मानना है कि इन लोगों ने जांच की आड़ में गुप्त एजेंडे के तहत समुदाय विशेष के युवाओं को प्रशासन के खिलाफ भड़काने का प्रयास किया, ताकि सांप्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ा जा सके. यह राज्यहित में नहीं है. NCHRO में कई बुद्धिजीवी, अधिवक्ता और बीएमसी के सदस्य हैं, जाे पीएफआइ को विधिक संरक्षण देते हैं.येलोग पूरे देश में घटित घटनाओं की जांच कर वस्तुस्थिति से अलग हटकर अपनी रिपोर्ट के जरिये देश में असहिष्णुता के नाम पर हाय-तौबा मचा रहे हैं. अफसरों ने कहा है कि एनसीएचआरओ द्वारा देश के विभिन्न भागों में जाकर गुप्त एजेंडे के तहत फैक्ट फाइंडिंग के नाम पर एकपक्षीय जांच कर प्रतिवेदन समर्पित किया गया होगा. उन सभी जांच प्रतिवेदनोंकी किसी केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराकर उसकी समीक्षा और विश्लेषण जरूरी है, ताकि उसकी असलियत सामने आ सके.

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कैसे बनाया था पुलिस अफसरों को निशाना: PFI ने पांच जुलाई, 2017 को पाकुड़ में आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया था. इसमें PFI के प्रदेश उपाध्यक्ष हेंजला शेख, सचिव अब्दुल हन्नान और पूर्व सचिव हबीब-उर-रहमान के नेतृत्व में संगठन के 300 लोगों ने झंडे, बैनर, तलवार अौर चाकू के साथ रैली निकाली थी. सभी लोगों ने पाकुड़ नगर थाना के गेट के समीप पहुंचकर सड़क को जाम कर दिया. प्रशासन द्वारा समझाने के बाद भी लोग हटने का तैयार नहीं हुए. वहां पर प्रतिनियुक्त पदाधिकारी और सुरक्षा बलों से उलझ गये. धक्का-मुक्की और गाली-गलौच करने के साथ पत्थरबाजी भी की. जवानों से हथियार छीनने का प्रयास किया. इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्जकिया, तब लोग वहां से भागे. इस घटना में एसडीपीओ श्रवण कुमार, इंस्पेक्टर शिव शंकर तिवारी, एसआई लव कुमार और पत्रकार धर्मेंद्र उपाध्याय घायल हो गये थे.

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