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संतोष हत्याकांड से बरका-सयाल कोयलांचल में उबाल, आठ घंटे बंद रही कोयला खदान

Updated at : 08 Jan 2025 11:14 PM (IST)
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संतोष हत्याकांड से बरका-सयाल कोयलांचल में उबाल, आठ घंटे बंद रही कोयला खदान

लीड) संतोष हत्याकांड से बरका-सयाल कोयलांचल में उबाल, आठ घंटे बंद रही कोयला खदान

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उरीमारी. उरीमारी के बड़कीटांड़ में झामुमो नेता संतोष सिंह की हत्या के बाद क्षेत्र के लोगों का गुस्सा उबल उठा. झामुमो कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों ने बरका-सयाल क्षेत्र की तीनों बड़ी कोलियरियों उरीमारी, बिरसा व न्यू बिरसा में कोयला उत्पादन ठप करा दिया. उरीमारी-बड़कागांव मेन रोड को चेकपोस्ट के समीप जाम कर कोयले की ढुलाई भी रोक दी. पावर प्लांट में रैक लोडिंग के लिए बने सायलो को भी ग्रामीणों ने बंद करा दिया. इससे पावर प्लांट के लिए एक भी रैक कोयला नहीं निकल सका. इससे सीसीएल को करोड़ों का नुकसान होने का अनुमान है. ग्रामीण हत्यारों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे. ग्रामीणों का कहना था कि क्षेत्र में अपराध बढ़ता जा रहा है. इसे रोने में पुलिस पूरी तरह से असफल साबित हो रही है. इधर, विधायक रोशनलाल चौधरी, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद व बरका-सयाल जीएम अजय सिंह ने उरीमारी पहुंच कर कर आंदोलित ग्रामीणों से वार्ता की. वार्ता के बाद करीब आठ घंटे से ठप पड़ा कामकाज शुरू हो गया. वार्ता के तत्काल बाद स्व सिंह के पुत्र को प्रोविजनल ज्वाइनिंग लेटर दिया गया. पुत्र के 18 वर्ष की उम्र पूरी होने पर अप्रैल महीने में उसे स्थायी नियुक्ति पत्र दी जायेगी. पोस्टमॉर्टम के विलंब के कारण शाम तक संतोष सिंह का शव रांची से उनके आवास पर नहीं लाया गया था. तीन भाइयों में संतोष सबसे बड़े थे. परिवार में पत्नी, एक पुत्र व एक पुत्री छोड़ गये हैं. आलोक गिरोह ने फिर दी है धमकी : संतोष हत्याकांड की जिम्मेवारी लेते हुए मीडिया को भेजे संदेश में आलोक गिरोह ने कहा है कि संतोष को बार-बार मैनेज करने के लिए कहा जा रहा था. उसने बात नहीं मानी. इसके बाद यह कार्रवाई की गयी है. गिरोह ने क्षेत्र के ट्रांसपोर्टरों को धमकाते हुए कहा है कि बिना मैनेज किये जो कोई भी काम करेगा, उसे अंजाम भुगतना होगा.

दो दशक में हुई डेढ़ दर्जन चर्चित हत्याएं : सीसीएल बरका-सयाल क्षेत्र में कोयला, ठेकेदारी, ट्रांसपोर्टिंग, रैक लोडिंग, रोड सेल, स्क्रैप, लाइजनिंग आदि धंधे से जुडे करीब डेढ़ दर्जन लोगों की हत्या पिछले दो दशक में हो चुकी है. हत्या की पहली बड़ी घटना 2003 में हुई थी. जब क्षेत्र के मजदूर नेता निर्मल यादव को अपराधियों ने उनके उरीमारी स्थित कार्यालय में ही गोली मार दी थी. यहां से शुरू हुआ हत्या का सिलसिला आज तक जारी है. अब तक हुई चर्चित हत्याओं में विस्थापित नेता शर्मा मांझी, कांटा बाबू मुट्टू मांझी, संजीव सिंह बाघेल, विस्थापित नेता गहन टुडू, विस्थापित नेता बिरसा करमाली, राजेंद्र गंंझू, बिरसा मांझी, ठेकेदार रवींद्र सिंह, टुनटुन सिंह, सीसीएलकर्मी सकरूल्लाह, ट्रांसपोर्टर सिकंदर बाउरी, विधायक प्रतिनिधि बितका बाउरी, रेड्डी आउटसोर्सिंग के मैनेजर मल्लिकार्जुन, राजू चौधरी, अमित बक्शी की हत्या हो चुकी है. सभी हत्याएं थोड़े-थोड़े अंतराल पर हुई है. बितका की हत्या फरवरी 2023 में हुई थी. इसके बाद जनवरी 2024 में संतोष सिंह की हत्या कर दी गयी है. कई चर्चित लोगों पर गोलियां चला कर हत्या का प्रयास भी हो चुका है. इसमें प्रमुख विस्थापित नेता दसई मांझी, झामुमो नेता सोनाराम मांझी, मजदूर नेता राजू यादव, रेलवे कंस्ट्रक्शन कंपनी के इंजीनियर रोहित कुमार हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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