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शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने नेमरा गांव में उमड़ी लोगों की भीड़

Updated at : 10 Aug 2025 11:04 PM (IST)
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शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने नेमरा गांव में उमड़ी लोगों की भीड़

शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने नेमरा गांव में उमड़ी लोगों की भीड़

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राजकुमार, रामगढ़/ गोला नेमरा गांव में शिबू सोरेन के श्राद्ध कर्म को लेकर तैयारी चल रही है. रविवार को नेमरा गांव में शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने के लिए झारखंड से लोगों की भीड़ उमड़ी. यहां न्यायाधीश, अधिवक्ता, पूर्व कुलपति, शिक्षाविद, विभिन्न धर्मों के अनुयायी, राजनेता व आदिवासी समाज की महिलाएं काफी संख्या में पहुंची थीं. शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने के बाद हेमंत सोरेन से मिलने के लिए सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री समेत कई विधायक इंतजार करते दिखे. विभिन्न विभागों के सचिव भी व्यवस्था व जानकारी लेने के लिए मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द हमेशा बने हुए थे. रामगढ़ उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज व एसपी अजय कुमार अधिकारियों की अगुवाई कर रहे थे. विधि-व्यवस्था से लेकर लगातार निर्देश देते दिखे. पिछले छह दिन में नेमरा गांव में कई व्यवस्था भी बदल गयी है. गांव के अंदर की सड़कें पूरी तरह से बन कर तैयार हो गयी हैं. कई विकास योजनाओं के रोड मैप विभिन्न अधिकारियों को सौंपे गये हैं. झामुमो नेता संजीव बेदिया ने बताया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के सदस्य श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंच रहे हैं. पार्टी के छोटे से बड़े सभी नेता की उपस्थिति लगातार बनी हुई है. चौधरी लाइन होटल से गुरुजी का 38 साल पुराना रिश्ता, चाय-बिस्कुट से शुरू होती थी हर मुलाकात : गोला प्रखंड के चक्रवाली स्थित चौधरी लाइन होटल और पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व सांसद गुरुजी शिबू सोरेन के बीच गहरा और भावनात्मक रिश्ता रहा है. होटल संचालक सच्चिदानंद चौधरी ने बताया कि बीते 38 वर्षों से उनका गुरुजी से नजदीकी परिचय था. जब भी गुरुजी रांची से बोकारो जाते, उस समय चौधरी लाइन होटल में अवश्य रुकते थे. चाय-बिस्कुट के साथ नमकीन का स्वाद लेना नहीं भूलते थे. उन्होंने बताया कि वर्ष 1982 में होटल शुरू हुआ था. गुरुजी से पहली मुलाकात 1967 में चक्रवाली फुटबॉल मैदान में आयोजित महाजनी प्रथा के खिलाफ सभा में हुई थी. उस सभा के बाद वह गुरुजी की विचारधारा से प्रेरित होकर उनसे जुड़ गये. वह लगातार संपर्क में रहे. इस क्षेत्र में उस समय एकमात्र यही होटल था. यहां पर आने-जाने वाले नेता से लेकर अफसर एवं आम लोगों का भी ठहरना होता था. सच्चिदानंद चौधरी ने बताया कि जब भी गुरुजी होटल में बैठते, उस समय स्थानीय लोगों का हाल-चाल पूछते . आंदोलन में जुड़े कार्यकर्ता सहदेव प्रसाद, अमर प्रसाद, जमील अहमद, अमरलाल महतो, नंदलाल महतो की जानकारी लेते थे. उनकी कर्मठता से प्रभावित होकर सच्चिदानंद चौधरी के बड़े पुत्र विनीत प्रभाकर ने भी झामुमो की सदस्यता ग्रहण की. आज वह जिला उपाध्यक्ष के रूप में पार्टी की सेवा कर रहे हैं. सच्चिदानंद चौधरी ने बताया कि गुरुजी का अचानक से इस दुनिया से चले जाने की सूचना मुझे मिली. हमें होटल में भी बैठने में मन नहीं लगा. उन्होंने बताया कि गुरुजी के अलावा उनके भाई लालू सोरेन एवं बड़े पुत्र दुर्गा सोरेन भी हमारे यहां आते थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SAROJ TIWARY

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By SAROJ TIWARY

SAROJ TIWARY is a contributor at Prabhat Khabar.

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