श्मशान घाट में शेड नहीं, बरसात में अंतिम संस्कार बनी चुनौती

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श्मशान घाट में शेड नहीं, बरसात में अंतिम संस्कार बनी चुनौती

श्मशान घाट में शेड नहीं, बरसात में अंतिम संस्कार बनी चुनौती

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…. ग्रामीण शव लेकर डहूबेड़ा श्मशान घाट पहुंचे, लेकिन बारिश के कारण हुई परेशानी भुरकुंडा. पतरातू प्रखंड क्षेत्र में कई ऐसे पंचायत हैं, जहां के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. इस पंचायतों में किसी के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए भी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है. सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को शव का अंतिम संस्कार करने के लिए काफी जूझना पड़ता है. हरिहरपुर पंचायत के हरिहरपुर, मंझलीटांड़, अंबाटोला, चेतमा, बरघुटूवा, मेलानी, डहूबेड़ा, पुराना बस्ती, राजाबेड़ा, आदिवासी टोला में श्मशान घाट है, लेकिन कहीं भी घाट पर शेड की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में बरसात के मौसम में शव का अंतिम संस्कार किसी चुनौती से कम नहीं होता है. लोग घंटों तक बारिश थमने का इंतजार करते हैं. जब मौसम सामान्य होता है, तो चिंता सजाने व जलाने का काम शुरू होता है. इसमें चार-पांच घंटे का वक्त लगता है. इस स्थिति में वहां मौजूद लोग भींगते रहते हैं. पिंडदान, तर्पण जैसे कर्मकांडों में भी दो-तीन घंटे का समय लगता है. ऐसे में बारिश या तेज धूप के दौरान खुले आसमान के नीचे बैठकर संस्कार करना ग्रामीणों के लिए बेहद कठिन हो जाता है. शनिवार को मेलानी के छक्कू महतो के निधन के बाद ग्रामीण शव लेकर डहूबेड़ा श्मशान घाट पहुंचे थे, लेकिन बारिश के कारण घंटों तक शव नहीं जलाया जा सका. स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने घाट पर तिरपाल ताना. चिता को बारिश में बुझने से बचाने के लिए भी ऊंचाई पर तिरपाल लगाया. काफी मशक्कत के बाद शव जलाया जा गया. ग्रामीण इस हालात के लिए सांसद, विधायक, प्रशासन को दोषी बता रहे थे. शेड के लिए नहीं मिल रहा फंड : मुखिया : मुखिया गीता देवी ने कहा कि शेड निर्माण के लिए सांसद, विधायक, प्रशासन को पत्र लिखने के बाद भी कोई रिस्पांस नहीं मिलता है. हाल ही में ग्राम पंचायत में सभा कर एक शेड निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित किया गया है, लेकिन इसका फंड अभी तक नहीं मिला है. मरने के बाद भी चैन नहीं है : ग्रामीण : ग्रामीण संजय कुमार ने कहा कि कई बार शेड निर्माण की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा है. स्थिति यह है कि जीते जी हमलोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसते हैं. मरने के बाद कष्ट पीछा नहीं छोड़ता है.

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Saroj Tiwary

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