:::: विचारों से ही हम सुख व दु:ख का अनुभव करते हैं : विज्ञानदेव जी

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:::: विचारों से ही हम सुख व दु:ख का अनुभव करते हैं : विज्ञानदेव जी

:::: विचारों से ही हम सुख व दु:ख का अनुभव करते हैं : विज्ञानदेव जी

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बरकाकाना. हमारे विचार ही हमें सुखी तथा दुखी बनाते हैं. विचारों से ही हम सुख तथा दुःख का अनुभव करते हैं. यह प्रवाह चल रहा है, जिसमें हमारा मन बहा जा रहा है. उक्त बातें स्वर्वेद कथामृत के प्रवर्तक संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने स्वर्वेद संदेश यात्रा के दौरान सामुदायिक भवन, बरककाना में आयोजित जय स्वर्वेद कथा व ध्यान साधना सत्र में श्रद्धालुओं से कही. संत प्रवर जी ने कहा कि जैसे गर्म लोहे को पीट -पीट कर इच्छित आकार का बना दिया जाता है, वैसे ही मन को आध्यात्मिक चिंतन रूपी हथौड़े से, श्रेष्ठ ज्ञान रूपी हथौड़े से अवगुणी से सद्गुणी बनाया जा सकता है. आयोजकों ने बताया कि 25 व 26 नवंबर को ध्यान साधना केंद्र (मेडिटेशन सेंटर) स्वर्वेद महामंदिर, वाराणसी के परिसर में स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ होना है. इसी के लिए यह स्वर्वेद संदेश यात्रा निकाली जा रही है. मौके पर केपी श्रीवास्तव, भोला अग्रवाल, सेवालाल मांझी, एनएन सिंह, दिलेंद्र सिंह उपस्थित थे.

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Saroj Tiwary

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