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81 लाख टन कोयला उत्पादन के साथ बरका-सयाल ने रचा इतिहास

Updated at : 30 Mar 2025 9:50 PM (IST)
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81 लाख टन कोयला उत्पादन के साथ बरका-सयाल ने रचा इतिहास

81 लाख टन कोयला उत्पादन के साथ बरका-सयाल ने रचा इतिहास

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उरीमारी. सीसीएल के बरका-सयाल क्षेत्र ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 81 लाख टन कोयले का उत्पादन करते हुए इतिहास रच दिया है. बरका-सयाल ने अपने पिछले वर्ष के 61.38 लाख टन कोयला उत्पादन के रिकॉर्ड को तोड़ा है. अकेले मार्च महीने में 14 लाख टन कोयले का उत्पादन हुआ, यह भी इस क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड है. इस वर्ष कोयला उत्पादन में 32 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए बरका-सयाल क्षेत्र पहली बार मुनाफे में गया है. इससे पहले हर वर्ष नुकसान हो रहा था. रविवार को जीएम ऑफिस में जीएम अजय सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कर यह जानकारी दी. जीएम ने बताया कि मार्च महीने में 19 तारीख को 10 रैक कोयला पावर प्लांटों को भेजा गया. पूरे वित्तीय वर्ष में 1721 रैक कोयले का डिस्पैच हुआ. जबकि पिछले वर्ष 1201 रैक कोयला डिस्पैच हुआ था. रैक डिस्पैच में भी इस वर्ष 43 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. बताया गया कि बरका-सयाल से 171.85 लाख क्यूबिक मीटर ओबीआर निकाला गया. जबकि पिछले साल 113.5 लाख क्यूबिक मीटर ओबी निकाला गया था. यानी ओबीआर में भी 51 प्रतिशत का ग्रोथ रहा. जीएम ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बरका-सयाल को 90 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य मिला है.

बिरसा परियोजना से हुआ सर्वाधिक उत्पादन : बिरसा परियोजना से 45 लाख टन, उरीमारी परियोजना ने 12.5 लाख टन, भुरकुंडा परियोजना ने 10 लाख टन, सयाल डी परियोजना ने 13.5 लाख टन कोयला उत्पादन किया. सभी परियोजनाओं ने निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा उत्पादन हुआ है. जीएम ने बताया कि आनेवाले समय में भुरकुंडा परियोजना क्षेत्र में नयी खदान चालू की जायेगी. इसमें करीब 50 लाख टन कोयले का भंडार है. पांच साल तक उत्पादन कार्य होगा. बताया कि सौंदा डी व केके पोड़ा कोलियरीकी इन्वायरनमेंट क्लीयरेंस नहीं हुआ. क्लीयरेंस मिलने के बाद दोनों खदानें चालू कर दी जायेगी.

टीम वर्क व सहयोग से मिली सफलता : जीएम.

जीएम अजय सिंह ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर सभी मजदूरों, विस्थापितों, श्रमिक संगठनों, अधिकारियों व आम-आवाम का आभार जताते हुए कहा कि सभी के सकारात्मक सहयोग व टीम वर्क के कारण यह सफलता मिली है. विशेषकर विस्थापितों का आभार जताते हुए कहा कि यदि इनके द्वारा परियोजनाओं के विस्तार के लिए जमीन नहीं दी गयी होती, यह सफलता नहीं मिल पाती.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SAROJ TIWARY

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