हजारीबाग व जमशेदपुर के बाद भुरकुंडा में लगता है सबसे बड़ा मेला

Author Deepak
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हजारीबाग व जमशेदपुर के बाद भुरकुंडा में लगता है सबसे बड़ा मेला

रामगढ़ के भुरकुंडा क्षेत्र में लगने वाला रामनवमी का मेला काफी पुराना है.

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कुमार आलोक, भुरकुंडा

रामगढ़ के भुरकुंडा क्षेत्र में लगने वाला रामनवमी का मेला काफी पुराना है. यहां आठ दशक से अधिक समय से मेले का आयोजन हो रहा है. इस वर्ष छह अप्रैल को भुरकुंडा में रामनवमी का जुलूस निकाला जायेगा. हजारीबाग और जमशेदपुर के बाद यहां का मेला सबसे बड़ा माना जाता है. यहां दूर-दूर से लोग आते हैं. आयोजन समिति के लोगों ने बताया कि लक्ष्मी टॉकीज मैदान में मेले की शुरुआत 1940 में हुई थी. इससे पूर्व 1939 तक भुरकुंडा कोयलांचल व भदानीनगर क्षेत्र के लोग महावीरी झंडे के साथ वर्तमान भुरकुंडा बाजार के खोपड़िया बाबा धर्मशाला के समीप जुटते थे. भीड़ बढ़ने के कारण जब जगह की कमी पड़ गयी, तो समितियों ने सर्वसम्मति से लक्ष्मी टॉकीज मैदान में मेला लगाने का निर्णय लिया. यह परंपरा आज तक जारी है. मेला में हजारों लोगों की भीड़ के बावजूद आज तक यहां किसी प्रकार का कभी भी कोई अप्रिय घटना नहीं घटी. लोग सौहार्द्रपूर्ण माहौल में रामनवमी मनाते रहे हैं. रामनवमी अखाड़ों के खिलाड़ी पारंपरिक शस्त्र से खेल का प्रदर्शन करते हैं. मेला में हर वर्ष आकर्षक झांकी, ऊंचे व बड़े झंडे, अनुशासन, बेहतर खेल के लिए निर्णायक मंडली द्वारा समितियों को पुरस्कृत किया जाता है. इस वर्ष भी करीब दो दर्जन समितियों द्वारा झांकी निकालने की तैयारी चल रही है. इसमें कुरसे, देवरिया, मतकमा, लादी, चिकोर, लपंगा, रेलवे स्टेशन, महुआ टोला, चौकिया टांड़, सलगा गोला, जवाहर नगर, तीन नंबर चीफ हाउस, नीचे धौड़ा, हुरूमगढ़ा, पटेल नगर, भुरकुंडा बाजार, हनुमानगढ़ी समिति द्वारा झांकी निकाली जायेगी. पूरे क्षेत्र में महावीरी पताका लगाने का काम चल रहा है.

चंद्रमोहन व बालेश्वर तिवारी ने शुरू कराया था मेलामेला के इतिहास के बारे में क्षेत्र के लोग बताते हैं कि उस वक्त के प्रधान बाबू चंद्रमोहन सिंह, सरपंच बालेश्वर तिवारी ने मेला शुरू कराया था. उनके साथ खेमलाल साव, श्याम लाल, रामलाल साव, इंद्रनाथ साव, मुन्ना महतो, लेदर सिंह ने मेले को भव्यता देने में सहयोग किया. आज इस मेला में क्षेत्र के करीब दो दर्जन समितियों द्वारा भव्य झांकी निकाली जाती है. ऊंचे-ऊंचे महावीरी झंडे लेकर लोग पहुंचते हैं. यही वजह है कि मेल में हर वर्ष लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है.

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