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साल के अंत तक भुरकुंडा में खुलेगी नयी खदान

Updated at : 16 Apr 2025 6:01 PM (IST)
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साल के अंत तक भुरकुंडा में खुलेगी नयी खदान

सीसीएल बरका-सयाल क्षेत्र अंतर्गत भुरकुंडा परियोजना में इस वर्ष के अंत तक नयी खदान खुल जायेगी. यह खदान 10 वर्ष पूर्व बंद हुए संगम खदान के बगल में खुलेगी.

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प्रभात खास. राजकुमार सिंह. 15बीएचयू0008-भुरकुंडा की प्रस्तावित खदान यहीं खुलेगी. 50 लाख टन कोयले का है भंडार, पांच साल तक निकलेगा कोयला, आउटसोर्सिंग कंपनी से कराया जायेगा उत्पादन. भुरकुंडा. सीसीएल बरका-सयाल क्षेत्र अंतर्गत भुरकुंडा परियोजना में इस वर्ष के अंत तक नयी खदान खुल जायेगी. यह खदान 10 वर्ष पूर्व बंद हुए संगम खदान के बगल में खुलेगी. इस खदान में 50 लाख टन कोयले का अकूत भंडार है. जिससे अगले पांच साल तक निर्बाध रूप से कोयला निकाला जायेगा. यहां से 20 लाख टन क्यूबिक मीटर ओबी भी निकाला जायेगा. सीसीएल आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिये यहां से कोयला उत्पादन करायेगी. इसकी तैयारी जोरशोर से चल रही है. खदान खोलने के लिए सीटीओ व ईसी की प्रक्रिया चल रही है. यह खदान सीसीएल के अधीनस्थ क्षेत्र में है, इसलिए यहां विस्थापन की कोई समस्या नहीं होगी. प्रबंधन इस खदान को बलकुदरा खदान के बंद होने से पहले खोलने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि यहां के कर्मी यहीं रह सकें. बलकुदरा में फिलहाल सिर्फ आठ लाख टन कोयले का भंडार शेष है. आउटसोर्सिंग कंपनी का टेंडर भी फरवरी में खत्म हो जायेगा. प्रबंधन इसी वर्ष बलकुदरा का शेष कोयला निकालने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. पूर्व में भुरकुंडा परियोजना में एक साथ कई अंडरग्राउंड व ओपेन कास्ट माइसं चलता था. लंबे समय से अंडरग्राउंड माइंस बंद होने के कारण यहां के मजदूरों व मशीनों को सीसीएल के दूसरे क्षेत्रों में शिफ्ट कर दिया गया था. यह खदान वर्तमान में भुरकुंडा परियोजना के लिए लाइफलाइन होगा. इसलिए प्रबंधन भी खदान खोलने के प्रति गंभीर है. सौंदा बी साइडिंग जायेगा कोयला नये खदान का कोयला सीसीएल ई-ऑक्शन के जरिये बेचेगा. प्रस्तावित खदान में जी-5, जी-6 व जी-7 ग्रेड का कोयला निकलेगा. खदान की गहराई जैसे-जैसे बढ़ेगी, कोयले का ग्रेड भी उन्नत होता चला जायेगा. उत्पादित कोयला सौंदा बी साइडिंग भेजा जायेगा. जहां से यह देश के कोने-कोने में रेलवे रैक से पहुंचेगा. खुलेगी बरका-सयाल की अन्य बंद खदानें भुरकुंडा में प्रस्तावित खदान खुलने के बाद बरका-सयाल क्षेत्र की बंद पड़ी अन्य खदानों को भी एक-एक कर खोलने की योजना है. सीसीएल प्रबंधन सौंदा डी, सेंट्रल सौंदा, सीसीएल सौंदा व सयाल परियोजनाओं की बंद खदानों का मूल्यांकन कर रहा है. कोयला भंडार, समय, जोखिम, लागत आदि पर मंथन हो रहा है. कुछ दिन पूर्व सौंदा डी फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए वन विभाग के डीआइजी दौरा कर चुके हैं. सौंदा डी परियोजना सीसीएल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. यहां कोयले का अकूत भंडार है. जहां से अगले 25 साल तक निर्बाध रूप से कोयला निकाला जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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