धर्मशाला बनाने में लगायी, जिंदगी भर की कमाई

Updated at : 19 Jun 2016 5:16 AM (IST)
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धर्मशाला बनाने में लगायी, जिंदगी भर की कमाई

शंकर पोद्दार लोग पैसे कमाने के लिए जिंदगी भर मेहनत करते हैं. उसे बुढ़ापे और अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचाते हैं. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो जीवन भर की कमाई को सामाजिक कार्य में खर्च कर देते हैं. ऐसे ही एक शख्स हैं चितरपुर काली चौक में रहनेवाले मित्तन राम. इस […]

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शंकर पोद्दार
लोग पैसे कमाने के लिए जिंदगी भर मेहनत करते हैं. उसे बुढ़ापे और अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचाते हैं. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो जीवन भर की कमाई को सामाजिक कार्य में खर्च कर देते हैं. ऐसे ही एक शख्स हैं चितरपुर काली चौक में रहनेवाले मित्तन राम. इस रिटायर्ड शिक्षक ने जीवन भर की कमाई से एक धर्मशाला का निर्माण कराया. हालांकि, धर्मशाला का निर्माण कराने से पहले कई बार उनके मन में आया कि पैसे की व्यवस्था कहां से होगी.
खर्च का जो अनुमान था, उससे कुछ कुछ परेशान जरूर हुए, लेकिन जो सोचा था, उसे करने की ठान ली. उन्होंने एक जमीन खरीदी थी. उसी जमीन पर माता-पिता स्व गुंजरी मुंगा राम के नाम से रिटायरमेंट के बाद मिले सारे पैसे और अपनी कुल जमा पूंजी लगा कर धर्मशाला का निर्माण शुरू करा दिया.
देखते ही देखते 11 कमरे, एक हॉल, चार शौचालय, स्नान घर, पूजा रूम के निर्माण पर 25 लाख रुपये खर्च हो गये. अब भी भवन की फिनिशिंग बाकी थी. हर महीने पेंशन से मिलनेवाले पैसे और इंश्योरेंस कंपनी में जमा किये गये तीन लाख रुपये को भी इस काम में लगा दिया. अब भी कुछ काम बाकी रह गया, तो उनके बेटे प्रमोद कुमार, प्रवीण कुमार और समीर राज ने दो-तीन लाख रुपये का सहयोग किया. धर्मशाला के निर्माण के लिए मित्तन ने कभी किसी से चंदा नहीं मांगा. खास बात यह है कि भवन का नक्शा भी उन्होंने स्वयं तैयार किया.
आज के समय में धर्मशाला में लोगों की सुविधा के लिए 50 कुरसियां, पांच टेबल, पांच दरी हैं. रजरप्पा में मां छिन्नमस्तिका के दर्शन के लिए आनेवाले श्रद्धालुओं के लिए यहां ठहरने की विशेष व्यवस्था की गयी है. धर्मशाला में धूम्रपान की सख्त मनाही है.
पेंशन से चलता है घर खर्च
मित्तन राम ने अपनी सारी राशि धर्मशाला बनाने में लगा दी. अब इनके घर-परिवार का खर्च पेंशन से चल रहा है. उन्होंने कहा कि मैंने कमायी हुई राशि को अपने बच्चों को नहीं दिया. इसका मुझे मलाल नहीं है. जीवन में समाज के बारे में भी लोगों को सोचना चाहिए. उन्होंने बताया कि मेरे माता-पिता भी धार्मिक प्रवृति के थे और सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़ कर भाग लेते थे. उनके आदर्शों को देखते हुए धर्मशाला का निर्माण किया.
बेटी की शादी के लिए बुक करने पर नहीं लेते पैसा
मित्तन राम ने बताया कि धर्मशाला को शादी-ब्याह व अन्य कार्यक्रमों के लिए किराये पर भी िदया जाता है. लेकिन, यदि किसी गरीब की बेटी की शादी हो, तो वह नि:शुल्क इस धर्मशाला को बुक कर सकता है. साथ ही दूसरे शादी-विवाह व अन्य समारोह में भी लोग स्वेच्छा से जो राशि दे देते हैं, उसी से धर्मशाला का रख-रखाव हो रहा है.
मित्तन के कार्यों की चारों ओर हो रही है सराहना
मित्तन राम के इस सामाजिक कार्य को क्षेत्र के लोग ही नहीं वरन आसपास के लोग भी सराह रहे हैं. लोगों का कहना है कि आज के समय में लोग रुपये हासिल करने के लिए कई हथकंडे अपनाते हैं. लेकिन इन्होंने ऐसा कार्य किया है, जो इस क्षेत्र के लोगों को हमेशा याद रहेगा.
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