कोयला ढुलवा कर बन गये खान मालिक

Published at :29 Mar 2016 6:11 AM (IST)
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कोयला ढुलवा कर बन गये खान मालिक

रामगढ़ : रामगढ़ समेत पूरे क्षेत्र में रुंगटा ब्रदर्स की उन्नति की कहानी व इनका साम्राज्य काफी बड़ा है. रामगढ़ कोयलांचल में 80 के दशक के बाद रुंगट ब्रदर्स के उन्नति की कहानी शुरू होती है. यद्यपि 1974-75 में ही रुंगटा बंधुओं का आगमन रामगढ़ कोयलांचल में हो गया था. शुरुआती दौर में इनकी हालात […]

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रामगढ़ : रामगढ़ समेत पूरे क्षेत्र में रुंगटा ब्रदर्स की उन्नति की कहानी व इनका साम्राज्य काफी बड़ा है. रामगढ़ कोयलांचल में 80 के दशक के बाद रुंगट ब्रदर्स के उन्नति की कहानी शुरू होती है. यद्यपि 1974-75 में ही रुंगटा बंधुओं का आगमन रामगढ़ कोयलांचल में हो गया था. शुरुआती दौर में इनकी हालात कुछ विशेष अच्छी नहीं थी. ये कुजू से बनारस दो-चार ट्रक कोयला भेजने का काम करते थे.
कोल लिंकेज में होती थी हेराफेरी
रुंगटा ब्रदर्स का एक भाई आरएस रुंगटा बीसीसीएल में अधिकारी थे. इन्हें कोल कंपनियों की नीतियों की जानकारी रहती थी. तभी उत्तर प्रदेश के लिए कोयले का ऑफर कंपनियों द्वारा दिया जाता था. इसकी सूचना रुंगटा बंधुओं को होती थी तथा वे कागज आदि बना कर पूर्व से तैयार रहते थे.
हालात यह थी कि रुंगटा बंधु अगर 10 हजार टन कोयले का ऑफर यूपी के लिए होता तो वे इनमें से नौ हजार टन अपने नाम करा लेते थे. यहां से उन्होंने काफी पैसा कमाया. इसके बाद इन लोगों ने कुजू में अजंता ट्रांसपोर्ट खोला. साथ ही भरेचनगर सांडी में हार्ड कोक फैक्टरी आदि खोली तथा फैक्टरी के नाम पर लिंकेज आदि लेना प्रारंभ किया. इसमें काफी हेराफेरी हुई तथा रुंगटा बंधु स्थापित कोल व्यापारी बन गये.
साथ ही इनका एक भाई नंदकुमार रुंगटा बनारस में रह कर रामगढ़ क्षेत्र से भेजे जाने वाले कोयले को बेचने का कार्य करने लगे. इन लोगों ने मुगल सराय कोयला मंडी में ट्रांसपोर्ट खोला. इसी नंद कुमार रुंगटा की बाद में अपहरण कर हत्या कर दी गयी. इसमें यूपी के डॉन मुख्तार अंसारी का नाम सामने आया था.
पूर्व सैनिकों के नाम पर भी किया धंधा: इसी बीच एक और काम रुंगटा बंधुओं ने किया जिससे इन्हें काफी भारी कमाई हुई.
भारत सरकार ने एक पॉलीसी बनायी कि कोयला ढुलाई के लिए एक निर्धारित दर (एस्टीमेटेड कॉस्ट) पर वह पूर्व सैनिकों को कार्य देगी. इस पर रुंगटा बंधुओं ने कई पूर्व सैनिकों से संपर्क साध उनके नाम पर पूरे क्षेत्र में ट्रांसपोर्टिंग का कार्य लिया. इसके एवज में पूर्व सैनिकों को ये एक निर्धारित रकम देते थे. बताया जाता है कि उस समय इन्हें एक टन कोयला की ढुलाई में 40 से 50 रुपये प्रति टन का फायदा होता था.
जबकि आज के दिन ट्रांसपोर्टिंग कार्य प्रतिटन काफी कम के मार्जिन पर हो रहा है. रुंगटा बंधुओं ने बनारस के रामनगर औद्योगिक क्षेत्र में भी कई फैक्टरी स्थापित की तथा इनके कोल लिंकेज से भी काफी पैसा कमाया. बाद में रुंगटा ब्रदर्स लोहे के कारोबार में उतरे तथा रामगढ़ कोयलांचल में सन 2000 से 2003 के बीच अरगड्डा, गिद्दी, करमा आदि क्षेत्र में कई स्पंज फैक्टरी बैठाये.
बाद में इन्होंने बरकाकाना के निकट हेहल में स्थित मां छिन्नमस्तिका स्पंज फैक्टरी का भी अधिग्रहण कर लिया. बताया जाता है कि इन फैक्टरियों की आड़ में भी अवैध कोयला व लोहा का कारोबार कुछ वर्ष पूर्व तक जम कर किया गया. इन्हीं वर्षों में रुंगटा बंधुओं द्वारा रांची रोड में रामगढ़ जिमखाना क्लब खोला गया.
जिसमें बड़े पैमाने पर लोगों व वन विभाग की जमीन हड़पने का आरोप रुंगटा बंधुओं पर लगा. रुंगटा बंधुओं पर रामगढ़ व जिला के अन्य थाना में कोयला से संबंधित एक दर्जन से अधिक मामले लंबित है. एक बार रामगढ़ स्थित रुंगटा कंपनी के कार्यालय व आवास की कुर्की जब्ती भी हुई थी. अब कोल ब्लॉक आवंटन के मामले में गलत सूचना देकर कोल ब्लॉक आंवटन कराने के मामले में पहली सजा रुंगटा बंधुओं कोसुनाई गयी.
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