ट्रांसपोर्टिंग ट्रकों के खतरे से भयभीत हैं लोग

भुरकुंडा रेलवे स्टेशन साइडिंग से चलते हैं कई ट्रकें अब तक दो लोगों की हो चुकी है मौत, बगैर तिरपाल के होता है ट्रांसपोर्टिंग कार्य. भुरकुंडा : भुरकुंडा रेलवे स्टेशन साइडिंग से माल ढुलाई में लगे बड़े हाइवा ट्रक व टेलरों के कारण दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है. इस रेलवे साइडिंग पर रेलवे […]
भुरकुंडा रेलवे स्टेशन साइडिंग से चलते हैं कई ट्रकें
अब तक दो लोगों की हो चुकी है मौत, बगैर तिरपाल के होता है ट्रांसपोर्टिंग कार्य.
भुरकुंडा : भुरकुंडा रेलवे स्टेशन साइडिंग से माल ढुलाई में लगे बड़े हाइवा ट्रक व टेलरों के कारण दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है. इस रेलवे साइडिंग पर रेलवे रैक से आयरन ओर, सीमेंट बनाने के सामान व लोहा को अनलोड करने के बाद उसे ट्रकों के जरिये विभिन्न कंपनियों तक भेजा जाता है. इस ट्रांसपोर्टिंग के कार्य में लगे ट्रकों से अब तक कई लोग जख्मी हो चुके हैं. दो लोगों की मौत भी हो चुकी है. मार्क्सवादी समन्वय समिति के नेतृत्व में पिछले दिनों स्थानीय लोगों ने नियमों को दरकिनार कर चलने वाले ऐसे ट्रकों का विरोध किया था. कहा कि था कि ट्रकों के कारण दुर्घटनाएं हो रही है. इसके बावजूद हालात में सुधार नहीं हो रहा.
भीड़ भरे क्षेत्र से गुजरते हैं ट्रक : रेलवे स्टेशन साइडिंग से माल लोड करने के बाद ट्रक अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं. इनमें आयरन ओर से लदे ट्रक भुरकुंडा के बिरसा चौक, पटेल नगर, सयाल मोड़, रिवर साइड के भीड़ भरे इलाके से होते हुए गिद्दी क्षेत्र के लिए जाते हैं. इस क्षेत्र की पहचान एजुकेशन हब के रूप में है. पटेल नगर क्षेत्र में दर्जनों कोचिंग सेंटर के अलावा कई स्कूल व कॉलेज पड़ते हैं. बैंक व अन्य कंपनियों के कार्यालय होने के कारण भीड़ बनी रहती है. ऐसे में इन तेज रफ्तार ट्रकों से खतरे का अंदेशा बना रहता है.
जा चुकी है दो लोगों की जान : रेलवे स्टेशन साइडिंग से माल ढोने में लगे ट्रकों से अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है. लगभग महीने भर पूर्व भदानीनगर थाने से महज कुछ दूरी पर साइडिंग के एक ट्रक ने ऑटो को टक्कर मार दी थी. इसके कारण मौके पर ही एक व्यक्ति की मौत हो गयी, जबकि कई अन्य घायल हो गये. कुछ दिनों पूर्व मतकमा चौक पर ऐसे ही एक ट्रक ने एक ग्रामीण को कुचल कर मार डाला था.
ट्रांसपोर्टिंग में नियमों का नहीं होता पालन : रेलवे स्टेशन साइडिंग से चलने वाले ट्रक नियमों को दरकिनार कर ट्रांसपोर्टिंग का कार्य कर रहे हैं. ट्रक ओवरलोड होता है. तिरपाल भी नहीं ढंका जाता है. इसके कारण सड़क पर आयरन ओर समेत सीमेंट बनाने के पत्थर गिरते रहते हैं. पहले से ही खराब हो चुकी सड़कों को ऐसे बड़े वजनी वाहन और बदतर बना रहे हैं. यदि ट्रकों में यदा कदा तिरपाल लगाया भी जाता है, तो वह महज खानापूर्ति के लिए. तिरपाल रहने के बावजूद ओवरलोड होने के कारण आयरन ओर व पत्थर सड़क पर गिरता है. सड़कों पर इसके गिरे होने के कारण दोपहिया वाहन भी फिसल कर गिर रहे हैं.
किया जायेगा आंदोलन : निरंजन : पिछले दिनों विरोध करनेवाले मार्क्सवादी समन्वय समिति के प्रखंड सचिव निरंजन पटेल ने कहा कि संभावित खतरों को देखते हुए हम लोगों ने ऐसे ट्रकों का विरोध किया था. लेकिन हालात नहीं बदल रहे हैं. श्री पटेल ने कहा कि शीघ्र ही जिला प्रशासन से मिल कर कार्रवाई की मांग की जायेगी. जरूरत पड़ी तो आंदोलन शुरू किया जायेगा.
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