बरका-सयाल के चार परियोजना पदाधिकारी के खिलाफ कुर्की वारंट
Author Prabhat khabar digital desk
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भुरकुंडा : सीसीएल के बरका-सयाल एरिया के चार परियोजना पदाधिकारियों के खिलाफ खनन विभाग ने कुर्की वारंट निकाला है. कुर्की वारंट भुरकुंडा, सौंदा, सौंदा डी व सयाल डी परियोजना पदाधिकारी के खिलाफ जारी हुआ है. यह मामला खनन राजस्व के बकाये का है. चारों परियोजनाओं को मिला कर 26 करोड़ 22 लाख 41 हजार 716 […]
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भुरकुंडा : सीसीएल के बरका-सयाल एरिया के चार परियोजना पदाधिकारियों के खिलाफ खनन विभाग ने कुर्की वारंट निकाला है. कुर्की वारंट भुरकुंडा, सौंदा, सौंदा डी व सयाल डी परियोजना पदाधिकारी के खिलाफ जारी हुआ है. यह मामला खनन राजस्व के बकाये का है. चारों परियोजनाओं को मिला कर 26 करोड़ 22 लाख 41 हजार 716 रुपये का राजस्व बकाया है. इसमें अकेले सयाल डी की देनदारी 20 करोड़ 32 लाख चार हजार 793 रुपये की है.
इसी तरह भुरकुंडा का चार करोड़ 37 लाख 66 हजार 663 रुपये, सौंदा का 97 लाख 43 हजार 352 रुपये व सौंदा डी का 55 लाख 26 हजार 908 रुपये राजस्व बकाया है. उत्तरी छोटानागपुर खनन विभाग के नीलाम पत्र पदाधिकारी सह उप निदेशक के आदेश से जारी कुर्की वारंट में स्पष्ट कहा गया है कि उक्त राशि अविलंब जमा नहीं करने की सूरत में कुर्की वारंट का तामिला कराया जायेगा. इस कुर्की वारंट के जारी होने के बाद बरका-सयाल क्षेत्र में हड़कंप है.
प्रबंधन सकते में है. यह मामला सीसीएल व खनन विभाग के बीच लंबे समय से चल रहा था. राजस्व की राशि गणना को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद था. यह मामला राजस्व न्यायालय हजारीबाग में लंबित था. अब जाकर मामले पर न्यायालय का आदेश निर्गत हुआ है. सयाल डी के बकाये का मामला वर्ष 2002-03 का है. जबकि अन्य परियोजनाओं का मामला वर्ष 2008-09 से जुड़ा है. कुर्की वारंट के जारी होने के बाद बरका-सयाल एरिया प्रबंधन की चिंता बढ़ गयी है. मुख्यालय से लगातार परामर्श लिया जा रहा है. दिशा-निर्देश के बाद मामले पर आगे कदम उठाया जायेगा.
क्या है मामला : यह मामला कोयला खनन के एवज में राजस्व भुगतान का है. खनन विभाग ने राजस्व की राशि का जो हिसाब लगाया है, सीसीएल उससे सहमत नहीं है. बरका-सयाल प्रबंधन का कहना है कि राजस्व का भुगतान खनन के एवज में होता है. जबकि खनन विभाग ने राजस्व की राशि की गणना खनन के अलावा साइडिंग से कोयला भेजने के ऊपर भी कर दी है, जो न्यायसंगत नहीं है. जिस कोयले का खनन के समय राजस्व दिया जा चुका है, उसी पर डिस्पैच के समय फिर से राजस्व लगाया गया था. यही विवादित राशि नहीं जमा की गयी थी. यह मामला न्यायालय में चल रहा था.
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