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उत्तर कोयल मुख्य नहर सूखने से दर्जनों इलाके में जलस्तर गिरने से जलसंकट बढ़ी

Updated at : 25 Apr 2025 9:45 PM (IST)
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उत्तर कोयल मुख्य नहर सूखने से दर्जनों इलाके में जलस्तर गिरने से जलसंकट बढ़ी

प्रखंड क्षेत्र के कई गांवों के चापानल सूख जाने से ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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पिछले तीन वर्षों से लगातार ऐसी स्थिति बन रही है नहर में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण ऐसी स्थिति बनी हुई है प्रतिनिधि, हैदरनगर प्रखंड क्षेत्र के कई गांवों के चापानल सूख जाने से ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि उत्तर कोयल मुख्य नहर में इस वर्ष रबी फसल के लिए नहर में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण ऐसी स्थिति बनी हुई है. बताया जाता है कि पिछले तीन वर्षों से लगातार ऐसी स्थिति बन रही है. पानी नहर में नहीं छोड़े जाने का मुख्य कारण विभाग के लोग मुख्य नहर का लाइनिंग कार्य में लगी कंपनी को बताया है. दरअसल मुख्य नहर में लाइनिंग कार्य में लगी कंपनी कार्य का समय सीमा बीत जाने के बाद भी इस कार्य को पूरा नहीं किया है. कार्य केंद्रीय जल आयोग मद की राशि से कराया जाना है. जब तक इस कार्य को पूरा नहीं होता, तब तक मुख्य नहर में रबी फसल के लिए पानी नहीं छोड़ा जायेगा. विभाग के इस रवैया से हैदरनगर प्रखंड के कई गांव के ग्रामीण इन दिनों जल संकट से जूझ रहे हैं. नहर में पानी रहने से आसपास के गांवों में जलस्तर बना रहता है. भीषण गर्मी में भू-जलस्तर इन दिनों तेजी से नीचे गिर रहा है. मुख्य नहर से सिंचाई के लिए पानी बिहार को जाती है. पिछले तीन वर्षों से केवल खरीफ फसल के लिए नहर में पानी छोड़ा जा रहा है, जो जून से अक्टूबर माह तक होता है. जबकि रबी फसल का मौसम नवंबर से अप्रैल तक निर्धारित है. वर्ष में दो बार पानी सिंचाई के लिए मोहम्मदगंज भीम बराज से छोड़ी जाती है. लेकिन इस वर्ष भी नहर की रिपेयरिंग को लेकर मुख्य नहर में पानी नहीं छोड़ा गया. जिससे कई चापानल की जल स्तर नीचे चला गया है. जलस्तर में कमी आ गयी है. अनुमंडल क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों के घरों में पेयजल को लेकर मुश्किलें पैदा हो गयी हैं. क्षेत्र के चौकड़ी, बलडिहरी, दुबा, सड़ेया, कोशिआरा, तारा, रामबांध, खारखोल, परता, कोठी, चचेरिया, रामबांध, पचपोखरी, भगड़ा हैदरनगर आदि गांवों में सैकड़ों चापानल की जल स्तर नीचे चला गया है. जिससे ग्रामीणों के हलक सूखने लगे है. नहर किनारे बसे गांव के लोगो की स्थिति पानी को लेकर भयावह है. मानसून आने तक नहर किनारे बसे ग्रामीण पेयजल संकट से अप्रैल माह से ही परेशानी में है. अभी पूरा मई व जून माह बाकी है.जल स्तर बनाये रखने के लिए नहर में बेड लेबल का जलस्तर बना रहना जरूरी बताया गया है. बहरहाल जिस कंपनी को नहर का लाइनिंग का कार्य मिला है. उसकी कार्य पूर्ण करने में शिथिलता के कारण पेयजल संकट गहराना एक बड़ी बात है. जिस पर यहां के जनप्रतिनिधियों व पंचायत प्रतिनिधियों का ध्यान नही है. ग्रामीण के साथ पशु भी इस संकट से परेशानी में है.पहले इस नहर किनारे पशुपालक पशुओं को चराते थे साथ ही प्यासे पशु स्वतः नहर में उतरकर प्यास बुझाते थे, जो अब यह स्थिति नहीं रही.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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