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श्रीराम का विवाह पति-पत्नी के आदर्श रिश्ते को दर्शाता है

Updated at : 29 Sep 2025 9:38 PM (IST)
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श्रीराम का विवाह पति-पत्नी के आदर्श रिश्ते को दर्शाता है

श्रीराम का विवाह पति-पत्नी के आदर्श रिश्ते को दर्शाता है

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पाटन. मां ललिता देवी शक्तिपीठ नैमिषारण्य तपोस्थली से पधारी परम पूज्या कथा प्रवक्ता मोहिनी किरण शुक्ला ने श्री राम कथा में भगवान राम व माता सीता के विवाह का प्रसंग का वर्णन किया. उन्होंने कहा कि राम और सीता की पहली मुलाकात जनकपुर के पुष्प वाटिका में हुई थी. उस समय माता सीता ने प्रभु राम को पति के रूप में स्वीकार कर लिया था. लेकिन राजा जनक ने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने वाले को अपनी पुत्री सीता का हाथ देने का निर्णय लिया था. राम ने शिव धनुष को उठाकर यह प्रतिज्ञा पूरी की. श्री राम और सीता का विवाह हिंदू धर्म में पति-पत्नी के आदर्श रिश्ते को दर्शाता है. उनके विवाह से यह संदेश मिलता है कि वैवाहिक जीवन प्रेम, विश्वास और आपसी सहयोग पर आधारित होना चाहिए. यह विवाह प्रेम और समर्पण की एक पवित्र गाथा है. जहां दोनों ने एक-दूसरे को पति-पत्नी के रूप में स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि रामचरितमानस में इस विवाह का विस्तृत वर्णन किया गया है. राम और सीता का मिलन पुरुषार्थ और स्त्रीत्व का संगम भी है, जो मर्यादा और धर्म की स्थापना करता है.

शिवशक्ति मंदिर परिसर में महोत्सव का आयोजन

पाटन. प्रखंड के किशुनपुर मौर्याटांड़ स्थित शिवशक्ति मंदिर परिसर में दुर्गापूजा महोत्सव पर प्रतापगढ़ से पधारे विद्वान पंडित आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि चाकू डाकू की तरह नहीं, बल्कि डॉक्टर की तरह चलाना चाहिए. क्योंकि डाकू चाकू को शरीर के नुकसान के लिए चलाता है. जबकि डॉक्टर शरीर को बचाने के लिए चलाता है. उन्होंने अरण्यकांड की चर्चा करते हुए कहा कि जयंत अपनी चोंच का प्रयोग सीता पर प्रहार के उद्देश्य से किया, तो उसे अपने पिता इंद्र का भी संरक्षण नहीं मिला. जबकि जटायु ने अपनी चोंच का प्रयोग सीता के उद्धार के लिए किया, तो उन्हें परमपिता परमात्मा की गोद प्राप्त हुआ. उन्होंने कहा कि सुंदर तन वाले को भगवान के पास जाना पड़ता है. लेकिन सुंदर मन वाले के पास स्वयं भगवान चल कर जाते हैं. प्रभु श्रीराम नारी को दु:ख देने वाले रावण को कुत्ते की मौत मार देते हैं और नारी के संरक्षण के लिए लड़ने वाले जटायु को पिता बना कर तार देते हैं. विज्ञान के बल पर आदमी पक्षी की तरह आकाश में उड़ रहा है. मछली की तरह पानी में तैर रहा है. लेकिन आध्यात्म के अभाव में आदमी की तरह धरती पर नहीं चल पा रहा है. जटायु रावण से तो हार गया, लेकिन इतिहास में अमर हो गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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