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फिर बढ़ी गर्मी, पलामू का पारा 42 डिग्री के पार

Updated at : 13 May 2025 10:06 PM (IST)
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फिर बढ़ी गर्मी, पलामू का पारा 42 डिग्री के पार

पलामू में पिछले कुछ दिनों से तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है.

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मेदिनीनगर. पलामू में पिछले कुछ दिनों से तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. आठ मई के बाद तापमान में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है. मंगलवार को पलामू का तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. सुबह से ही गर्मी का एहसास होने लगा था और 10 बजे के बाद गर्म हवा चलने लगी. यह स्थिति जिले के शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में एक समान रही. तेज धूप, गर्मी व गर्म हवा चलने से वदन झुलसता रहा और आम आदमी परेशान दिखे. बढ़ती गर्मी व लू से बचने के लिए लोग उचित जगह की तलाश करते देखे गये. दोपहर में धूप परवान पर थी. सड़क पर आवाजाही कम हो गयी. जो राहगीर चल रहे थे वे अपने सिर व चेहरे को ढंके हुए थे. इस स्थिति में गर्मी व लू से बचाव के लिए लोग तरल पदार्थ व मौसमी फल का सेवन करते देखे गये. लोग सत्तू, गन्ना का रस, नारियल पानी का सेवन कर रहे थे. इसके अलावा तरबूज, खीरा, ककड़ी की दुकान पर भी भीड़ देखी गयी. लोग अपनी जरूरत के अनुसार खरीदारी कर रहे थे. जगह-जगह पर ठेला लगा कर दुकानदार नारियल पानी, तरबूज, खीरा-ककड़ी बेच रहे थे.

स्कूली बच्चों को धूप व गर्म हवा से हो रही परेशानी

पिछले करीब-करीब एक सप्ताह से पलामू जिले के शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में तेज धूप व गर्मी बढ़ी है. चार दिनों से गर्म हवा चल रही है. सरकारी व निजी विद्यालय प्रातःकालीन संचालित हो रहे हैं. स्कूली बच्चों की छुट्टी दोपहर में होती है. उस समय धूप व गर्मी परवान पर रहती है. बड़े निजी स्कूल के बच्चे बस से घर पहुंचते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी सरकारी स्कूल के बच्चों को होती है. जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के केजी स्कूल, जिला स्कूल, आबादगंज बीसीसी मिशन स्कूल सहित अन्य विद्यालयों में दूर दराज के बच्चे पढ़ने जाते हैं. सुबह में तो वे लोग आराम से स्कूल पहुंचते हैं. लेकिन दोपहर में स्कूल की छुट्टी होने के बाद धूप में दो से तीन किलोमीटर मीटर दूरी तय कर पैदल घर पहुंचना काफी मुश्किल होता है. ऐसी स्थिति में अविभावकों, स्कूल प्रबंधन व प्रशासन को भी गंभीर होकर सोचना चाहिए, पांच मिनट धूप में खड़ा रहने से बदन झुलसने लगता है. प्रशासन को यह सोचना चाहिए की दोपहर में सूरज अपना तेवर दिखाते हैं, उस समय दो से तीन किलोमीटर चल कर बच्चे कैसे घर पहुंचते हैं, उनकी क्या दशा होती होगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SATYAPRAKASH PATHAK

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