नादिम बल्खी की शख्सियत से प्रेरणा लेने की जरूरत

राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन प्रतिनिधि, मेदिनीनगर अंजुमन फ़रोग-ए-उर्दू, पलामू इकाई ने रविवार को साहित्य समाज चौक के समीप ग्रामीण समाज कल्याण के कार्यालय में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया. वक्ताओं ने पलामू के उर्दू साहित्यकार नादिम बल्खी की शख्सियत और अदबी कारनामे विषय पर विचार व्यक्त कर श्रद्धांजलि दी.साथ ही नादिम बल्खी की साहित्यिक, मानवीय और सांस्कृतिक विरासत को विस्तार से रेखांकित किया.मुख्य अतिथि प्रोफेसर सैयद हसन अब्बास ने नादिम बल्खी की शख्सियत की चर्चा करते हुए कहा कि वे एक ऐसे रुझानसाज़ व फनकार थे, जिनकी सादगी, साफदिल इंसानियत और मजहबी संवेदनशीलता ने उन्हें समाज में विशिष्ट स्थान दिलाया. उन्होंने कहा कि नादिम बल्खी इंसानी और अख़लाक़ी मूल्यों के पैरोकार थे. उनकी रचनाओं में सूफियाना और दरवेशी अंदाज़ झलकता है. प्रोफेसर अब्बास ने कहा कि नादिम बल्खी की रचनाएं समाज के हर वर्ग और हर उम्र के लोगों के बीच लोकप्रिय है. उनके मजमुओं में समाज के हर तबके की झलक मिलती है. उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं का संपादन व प्रकाशन किया. उनकी शख्सियत से युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेने की जरूरत है. भारत ही नहीं विदेशों में भी उनकी रचनाओं की सराहना होती है. डॉ जाहिद इकबाल द्वारा कुरआन पाक की तिलावत के साथ सेमिनार शुरू हुआ. डॉ. मुजफ्फर बल्खी ने नादिम बल्खी द्वारा रचित नात का पाठ किया, जबकि नसीम रियाज़ी ने ग़ज़ल प्रस्तुत किया. अंजुमन फरोग ए उर्दू संस्था का परिचय डॉ. अब्दुल बासित ने कराया. डॉ मकबूल मंजर ने विषय प्रवेश कराते हुए नादिम बल्खी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला. सेमिनार के दौरान डॉ मकबूल मंजर द्वारा लिखित पुस्तक पलामू और नसरी अदब का विमोचन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. मुजफ्फर बल्खी व संचालन अशफाक अहमद ने किया. दूसरे सत्र में नादिम बल्खी पर आधारित शोध-पत्र प्रस्तुत किया गया. अंतिम सत्र में आयोजित मुशायरे में शायरों ने अपनी रचनाओं से समां बांधा.
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