ePaper

डॉक्टरों की कमी, रेफर सिस्टम बना मजबूरी

Updated at : 08 Feb 2026 10:01 PM (IST)
विज्ञापन
डॉक्टरों की कमी, रेफर सिस्टम बना मजबूरी

पलामू के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली के शिकार

विज्ञापन

पलामू के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली के शिकारप्रभात खबर टीम, मेदिनीनगर पलामू जिले के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाल स्थिति से गुजर रहे हैं. चिकित्सकों की भारी कमी, स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, साफ-सफाई की कमी, आवश्यक दवाओं की अनुपलब्धता, जांच उपकरणों की कमी और जर्जर बुनियादी ढांचा यहां की प्रमुख समस्याएं हैं. हालात ऐसे हैं कि मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों या दूर-दराज के जिला अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे कई बार मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है. कई स्थानों पर करोड़ों की लागत से बने भव्य भवन तो हैं, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं नदारद हैं. गंभीर मरीजों के पहुंचते ही उन्हें रेफर कर दिया जाता है. मोहम्मदगंज : उद्घाटन के पांच साल बाद भी चिकित्सक की स्थायी पदस्थापना नहीं पलामू और गढ़वा जिले के सुदूरवर्ती सैकड़ों गांवों के मरीजों के लिए उपयोगी मोहम्मदगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आज भी चिकित्सक विहीन है. 29 दिसंबर 2021 को उद्घाटन के बावजूद पांच साल बाद भी यहां एक भी स्थायी चिकित्सक पदस्थापित नहीं किया गया है. लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से बने इस केंद्र का संचालन केवल एक एएनएम और एक सीएचओ के भरोसे किया जा रहा है. करीब पांच एकड़ में फैला यह अत्याधुनिक भवन 30 बेड, 24 घंटे बिजली आपूर्ति और आपातकालीन सेवाओं की सुविधा से युक्त है. पहाड़ों और हरियाली के बीच स्थित यह केंद्र मरीजों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है. बावजूद इसके चिकित्सक नहीं होने से केवल प्राथमिक उपचार और सामान्य प्रसव की सुविधा उपलब्ध है. गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है. स्थायी चिकित्सक की पदस्थापना होने पर पलामू और गढ़वा जिले के कई प्रखंडों के लोगों को इसका लाभ मिल सकता है. केंद्र का मुख्य भवन बना झारखंड जगुआर का ठिकाना खाली पड़े केंद्र के अधिकांश कमरों में झारखंड जगुआर के जवानों का अस्थायी आवास बना हुआ है. नक्सल अभियान के दौरान जवान यहां ठहरते हैं. स्वास्थ्य केंद्र का संचालन कर्मियों द्वारा एक कमरे से किया जा रहा है, जबकि शेष कमरों में जवान रहते हैं. पांडू : दो डॉक्टरों के भरोसे चलता है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पांडू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति भी चिंताजनक है. यहां स्वीकृत पदों के मुकाबले अधिकतर पद खाली हैं. चार चिकित्सकों की आवश्यकता के बावजूद केवल दो डॉक्टर पदस्थापित हैं, जो रोस्टर के अनुसार सप्ताह में तीन-तीन दिन सेवा देते हैं. सर्दी-बुखार का इलाज तो हो जाता है, लेकिन अन्य बीमारियों के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता है. गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था नहीं होने से कई बार मरीज घर में ही दम तोड़ देते हैं. गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए विश्रामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाता है. यहां एएनएम, ड्रेसर, एक्सरे टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, लिपिक, सफाईकर्मी और गार्ड समेत कई पद रिक्त हैं. एनजीओ के माध्यम से बहाल कर्मियों के सहारे किसी तरह कार्य किया जा रहा है.

विज्ञापन
Akarsh Aniket

लेखक के बारे में

By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola