पोटाश की कमी के कारण पौधों का विकास नहीं हो पाता है

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पोटाश की कमी के कारण पौधों का विकास नहीं हो पाता है

कृषि विज्ञान केंद्र में 15 दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन

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कृषि विज्ञान केंद्र में 15 दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन मेदिनीनगर. चियांकी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र बिरसा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा 15 दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जो 27 नवंबर तक चलेगा. इसमें सीनियर वैज्ञानिक डॉ राजीव कुमार ने लोगों को पौधों के वृद्धि में पोषक तत्वों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पौधों के वृद्धि व विकास में 17 तरह के पोषक तत्वों की मुख्य भूमिका रहती है. झारखंड की मिट्टी में नेत्रजन व पोटेशियम की काफी कमी देखी जा रही है. धान, मकई, चना, मटर, फूलगोभी की फसल में जिंक की कमी के कारण मौलिबेडनम की कमी के लक्षण दिखाई पड़ रहे हैं. जिससे पौधों के जीवन क्रिया में बाधा पड़ती है. बताया कि पोटाश की कमी के कारण पौधों का विकास नहीं हो पाता है. इसके लिए खड़ी फसल में पोटेशियम सल्फेट का गोल का छिड़काव किया जा सकता है. कैल्शियम की कमी के कारण नये पत्ते मुड़कर सूख जाते हैं. मैगनेशियम की कमी को पूरा करने के लिए चूना, डोलोमाइट व जैसे युक्त खाद का उपयोग किया जा सकता है. आत्मा के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण राज ने किसानों को बताया कि किस फसल में कितना मात्रा में खाद डालना है. इसके बारे में जानकारी दी. सरकार के अनुसार जिन लोगों को फ़र्टिलाइज़र के डीलर के लिए लाइसेंस बनवाना है. उनलोगों को भी इस तरह का प्रशिक्षण लेना जरूरी है. एक्शन के बाद ही कृषि विभाग में लाइसेंस के लिए आवेदन दे सकते हैं. मौके पर रेहला, बिश्रामपुर, पड़वा, पाटन, पांकी से कई महिला व पुरुष प्रशिक्षण में शामिल थे.

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Akarsh Aniket

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