ज्ञान और स्वाभिमान का केंद्र बना नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय : डॉ ऋचा

Published by :Akarsh Aniket
Published at :17 Jan 2026 9:37 PM (IST)
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ज्ञान और स्वाभिमान का केंद्र बना नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय : डॉ ऋचा

17 वर्षों में एनपीयू ने कई उपलब्धियां हासिल चुनौतियों के बीच शिक्षा, शोध और डिजिटल सिस्टम में हुआ

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17 वर्षों में एनपीयू ने कई उपलब्धियां हासिल चुनौतियों के बीच शिक्षा, शोध और डिजिटल सिस्टम में हुआ प्रतिनिधि, मेदिनीनगर नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के अंगीभूत इकाई जीएलए कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ ऋचा सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय ने स्थापना के 17 वर्षों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, हालांकि इस दौरान अनेक चुनौतियां भी सामने आयी हैं. उन्होंने कहा कि एनपीयू पूर्व में रांची विश्वविद्यालय का अंग था. विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य पलामू प्रमंडल के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए रांची की व्यर्थ भाग-दौड़ से बचाना और इस क्षेत्र को ज्ञान व बौद्धिकता के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करना था. डॉ सिंह ने बताया कि 17 जनवरी 2009 को नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई. इसके पीछे असंख्य छात्रों और शिक्षकों का संघर्ष रहा है, जिन्होंने क्षेत्र के अधिकार के लिए सड़क से सदन तक आंदोलन किया. इसी संघर्ष के परिणामस्वरूप भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पलामू के अमर शहीद नीलांबर-पीतांबर के नाम पर विश्वविद्यालय को पहचान मिली. उन्होंने कहा कि शहीदों का नाम और शिक्षा का धाम जब एक साथ जुड़ते हैं, तो वह भूमि केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि स्वाभिमान भी पैदा करती है. आज यह विश्वविद्यालय पलामू, गढ़वा और लातेहार जिले के छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका है.स्थापना के बाद विश्वविद्यालय ने विकास के कई पड़ाव तय किये हैं. वर्तमान में इसके अंतर्गत अनेक अंगीभूत व संबद्ध कॉलेज संचालित हैं. विश्वविद्यालय ने पारंपरिक स्नातक व स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ-साथ बीएड, एमबीए तथा मेडिकल शिक्षा जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में भी विस्तार किया है. डॉ ऋचा सिंह ने कहा कि इस 17 वर्षीय यात्रा में शिक्षकों की कमी, नयी शिक्षा नीति का क्रियान्वयन और बुनियादी ढांचे का अभाव जैसी चुनौतियां भी सामने आयीं. लेकिन यह संतोषजनक है कि विश्वविद्यालय अब संक्रमण काल से बाहर निकल रहा है. विभिन्न स्तरों पर नये शिक्षकों की नियुक्ति हुई है. परीक्षा प्रणाली में डिजिटल व्यवस्था लागू की गयी है और प्रशासनिक सुधारों से सकारात्मक बदलाव दिख रहा है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का दायित्व केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि समाज की बौद्धिकता, संस्कृति और आर्थिक विकास को मजबूत करना है. इसी उद्देश्य से रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज की स्थापना की गयी है. पलामू क्षेत्र की समस्याओं जैसे जल संरक्षण, पर्यावरण नीति, पंचायत व्यवस्था और जनजातीय अध्ययन पर शोध कार्य किये जा रहे हैं. शैक्षिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का निरंतर उपयोग हो रहा है. डॉ सिंह ने कहा कि औद्योगिक क्रांति 4.0 और जेन-जेड के दौर में विश्वविद्यालय को नवाचार और कौशल का केंद्र बनना होगा. मजबूत फिजिकल कैंपस के साथ-साथ डिजिटल कैंपस भी जरूरी है. नयी शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा और अंतर विषयक अध्ययन को बढ़ावा देकर विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार किया जा सकता है.. उन्होंने छात्राओं के लिए बेहतर छात्रावास, तथा छात्र-छात्राओं के तनाव प्रबंधन के लिए परामर्श केंद्र को प्राथमिकता देने पर भी बल दिया. विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि प्रतिभा को निखारकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाली युवा पीढ़ी तैयार करना है.

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