ePaper

झारखंड के प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क में पर्यटकों की एंट्री बंद, बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था

Updated at : 30 Jun 2024 6:22 PM (IST)
विज्ञापन
betla national park closed for monsoon season palamu news jharkhand

बेतला नेशनल पार्क में बनी सड़क. फोटो : प्रभात खबर

Jharkhand News: झारखंड के पलामू जिला स्थित प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क में पर्यटकों की एंट्री बंद कर दी गई है. 3 महीने के लिए. क्या है इसकी वजह, यहां पढ़ें.

विज्ञापन

Jharkhand News|बेतला (पलामू), संतोष कुमार : झारखंड के प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क में पर्यटकों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है. नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए ) के निर्देश पर पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है. इसके साथ ही बेतला नेशनल पार्क की सुरक्षा-व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है.

पलामू टाइगर रिजर्व में 3 महीने तक रहती है पर्यटकों की नो एंट्री

बरसात के कारण 1 जुलाई से 3 महीने के लिए हर साल पलामू टाइगर रिजर्व में नो एंट्री लगा दी जाती है. अब 30 सितंबर तक बेतला नेशनल पार्क का भ्रमण पर्यटक नहीं कर सकेंगे. पार्क में उनके प्रवेश पर पूरी तरह से रोक रहेगी. 1 अक्टूबर से बेतला नेशनल पार्क पर्यटकों के लिए फिर से खोला जाएगा.

वन्य प्राणियों के प्रजनन काल में हर साल बंद हो जाता है पार्क

बेतला नेशनल पार्क के रेंजर शंकर पासवान ने कहा कि वन्य प्राणियों के प्रजनन काल को देखते हुए हर साल मानसून के सीजन में पलामू और लातेहार जिले की सीमा पर स्थित पलामू टाइगर रिजर्व, जिसे बेतला नेशनल पार्क भी कहते हैं, को बंद कर दिया जाता है. उन्होंने बताया कि पार्क बंद होने के बाद जंगल की सुरक्षा और बढ़ा दी जाएगी. पेट्रोलिंग तेज होगी. जगह-जगह पर बनाये गये वाच टावर को भी सक्रिय कर दिया जाएगा.

बेतला टाइगर रिजर्व में विचरण करता हाथी. फोटो : प्रभात खबर

पार्क में आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए सुरक्षा कड़ी

उन्होंने बताया कि सभी वनकर्मियों को इसके लिए विशेष दिशा-निर्देश दिया गया है. नेशनल पार्क के बंद होने के किसी भी तरह की कोई आपराधिक गतिविधि नहीं हो, इसके लिए भी पूरी सुरक्षा व्यवस्था-मजबूत की गयी है. उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए कई आवश्यक उपाय किये जा रहे हैं. यही कारण है कि जंगल व जानवर पूरी तरह सुरक्षित हैं.

6000 हिरण समेत अन्य जानवर लेंगे चैन की सांस

बेतला नेशनल पार्क के बंद रहने से पार्क के अंदर मौजूद जंगली जानवरों को सुकून मिलता है. दर्जनों वाहनों के आवागमन से जंगली जानवर स्वतंत्र रूप से जंगल में विचरण करने में स्वयं को असहज महसूस करते हैं. प्रजनन काल के दौरान उनकी परेशानी और बढ़ जाती है.

बेतला नेशनल पार्क में 6000 हिरण समेत रहते हैं ये जानवर

बेतला नेशनल पार्क में 6000 हिरण सहित इतनी ही संख्या में बंदर, लंगूर बायसन, हाथी, तेंदुआ, लकड़बग्घा, जंगली बोर सहित कई अन्य जंगली जानवर मौजूद हैं. पार्क बंद होने से पर्यटक तो जंगली जानवरों का दीदार नहीं कर सकेंगे, लेकिन जानकार बताते हैं कि इससे जंगली जानवरों को काफी राहत मिलेगी.

खुले रहेंगे रेस्ट हाउस, कैंटीन के अलावा अन्य पर्यटन स्थल

बेतला नेशनल पार्क को 3 महीने के लिए बंद किया जा रहा है, लेकिन इस दौरान यदि कोई सैलानी बेतला पहुंचता है, तो वह रेस्ट हाउस में ठहर सकता है. बेतला में वन विभाग के सभी रेस्ट हाउस खुले रहेंगे .कैंटीन भी खुले रहेंगे. लोग पलामू किला, केचकी संगम, मिरचईया जल प्रपात सहित आसपास के दर्जनों पर्यटन स्थल का दीदार कर सकेंगे.

Also Read

झारखंड के बेतला नेशनल पार्क में बंगाल के टूरिस्ट को दिखा बाघ, कमरे में कैद की तस्वीर

बेतला पार्क की घेराबंदी से आक्रोशित ग्रामीणों ने रेंज कार्यालय घेरा

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola