पलामू में लोन देने की धीमी रफ्तार पर डीसी ने जताई नाराजगी, बैंकों को सुधार के निर्देश

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 09 Jun 2026 9:35 PM

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समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश देते पलामू के डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत. फोटो: प्रभात खबर

Palamu News: पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने स्वरोजगार योजनाओं के तहत ऋण स्वीकृति में बैंकों की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई. पीएमएफएमई योजना में 91 आवेदनों में सिर्फ चार स्वीकृत होने पर उन्होंने जवाबदेही तय करने और लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन का निर्देश दिया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट

Palamu News: पलामू जिले में स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं की प्रगति को लेकर मंगलवार को जिला समाहरणालय सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गयी. उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उद्योग विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) और पीएम विश्वकर्मा योजना की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गयी. बैठक के दौरान उपायुक्त ने योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं और विशेष रूप से बैंकों की धीमी कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जाहिर की.

युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का है उद्देश्य

समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं का मुख्य उद्देश्य अंतिम पायदान पर खड़े युवाओं, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं, लेकिन बैंकों की सुस्त कार्यशैली के कारण योग्य लाभुकों को समय पर ऋण नहीं मिल पा रहा है. इससे योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न हो रही है. उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिला प्रशासन युवाओं के भविष्य और रोजगार के अवसरों को लेकर पूरी तरह गंभीर है. ऐसे में योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

पीएमएफएमई योजना में बेहद धीमी प्रगति

बैठक में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की समीक्षा के दौरान चिंताजनक आंकड़े सामने आये. अधिकारियों ने उपायुक्त को बताया कि जिले के लिए 75 लाभुकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके विरुद्ध उद्योग विभाग द्वारा कुल 91 आवेदन तैयार कर विभिन्न बैंकों को भेजे गये हैं. हालांकि इन आवेदनों के बावजूद बैंकों की धीमी प्रक्रिया के कारण अब तक केवल चार आवेदनों को ही स्वीकृति मिल सकी है. इतनी धीमी प्रगति पर उपायुक्त ने गहरा असंतोष व्यक्त किया. उन्होंने बैंकवार लंबित आवेदनों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों से जवाब तलब किया. उन्होंने कहा कि यदि समय पर ऋण स्वीकृत नहीं होंगे तो योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित होगा और लाभुकों का भरोसा भी कमजोर पड़ेगा. सरकारी योजनाओं को सफल बनाने के लिए सभी विभागों और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है.

पीएम विश्वकर्मा योजना में मिले 909 आवेदन

बैठक के दौरान पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए संचालित पीएम विश्वकर्मा योजना की भी समीक्षा की गयी. अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले में अब तक कुल 909 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं. इन सभी आवेदनों की जांच और स्क्रूटनी की प्रक्रिया चल रही है तथा पात्र लाभुकों को योजना का लाभ दिलाने के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है. उपायुक्त ने निर्देश दिया कि आवेदन प्रक्रिया और सत्यापन कार्य को तेजी से पूरा किया जाये, ताकि पात्र कारीगरों को समय पर प्रशिक्षण, प्रमाणन और ऋण सुविधा उपलब्ध करायी जा सके. उन्होंने कहा कि यह योजना पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

बिना ठोस कारण आवेदन अस्वीकार न करें बैंक

ऋण वितरण की धीमी रफ्तार पर उपायुक्त ने सभी बैंक प्रतिनिधियों के प्रति सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि जिन मामलों में ऋण स्वीकृति मिल चुकी है, उनका नियमानुसार जल्द निष्पादन किया जाये और लाभुकों के खातों में ऋण राशि का भुगतान शीघ्र सुनिश्चित किया जाये. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बैंक बिना किसी ठोस वित्तीय अथवा तकनीकी कारण के आवेदनों को अस्वीकृत करने से बचें. यदि किसी आवेदन में कोई कमी है तो संबंधित लाभुक को जानकारी देकर उसे दूर कराने का अवसर दिया जाना चाहिए.

औद्योगिक गतिविधियों में संभावनाएं काफी: उपायुक्त

उपायुक्त ने कहा कि पलामू एक आकांक्षी जिला है और यहां औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की काफी संभावनाएं हैं. उद्योगों के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. लेकिन यह तभी संभव है, जब बैंक भी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय सहयोग करें. आखिर कागजों में रोजगार पैदा करना आसान है, मगर जमीन पर उसके लिए बैंकों का पहिया भी घूमना चाहिए.

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कई अधिकारी और बैंक प्रतिनिधि रहे मौजूद

बैठक में जिला उद्योग महाप्रबंधक रघुबर सिंह, अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) अशोक श्रीवास्तव सहित विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ प्रतिनिधि और उद्योग विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे. सभी से योजनाओं के प्रभावी संचालन और लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए समन्वय के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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