यूजीसी के युवा-विभाजनकारी नियम पर रोक स्वागतयोग्य : कर्नल संजय

Published by : Akarsh Aniket Updated At : 30 Jan 2026 9:42 PM

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यूजीसी के युवा-विभाजनकारी नियम पर रोक स्वागतयोग्य : कर्नल संजय

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मेदिनीनगर. यूजीसी द्वारा प्रस्तावित युवा-विभाजन से जुड़े नियम पर सुप्रीम कोर्ट की रोक एक दूरदर्शी और स्वागतयोग्य निर्णय है. शहरी भारत का युवा वर्ग लगभग जाति व्यवस्था से आगे निकल चुका है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसके स्वरूप में बड़ा बदलाव आया है. ऐसे समय में सामाजिक विभाजन को पुनर्जीवित करना देशहित में नहीं हो सकता. इतिहास गवाह है कि इस प्रकार के विभाजन भविष्य में राष्ट्र को गंभीर संकटों की ओर ले जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट की यह रोक भारत को संभावित सामाजिक टकराव की दिशा में बढ़ने से रोकने वाला कदम है. विश्वविद्यालय युवाओं के लिए सामाजिक समरसता का पहला मंच होता हैं, जहां मित्रता जाति या धर्म पूछकर नहीं होती. इन्हें विभाजन की प्रयोगशाला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता की पाठशाला होना चाहिए. हम सभी सैनिक और जागरूक नागरिक यह अपेक्षा करते हैं कि हमें वही भारत मिले, महाराणा प्रताप-भामाशाह, गांधी-नेहरू, भगत सिंह-सुखदेव-राजगुरु और चंद्रशेखर आज़ाद-अशफ़ाक़ उल्ला ख़ां ने जाति या धर्म नहीं, बल्कि देश को सर्वोपरि मानकर साथ चलने का संकल्प लिया था.

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